स्वास्थ्य सेवाओं को गुलजार करते राजेश

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में बाइस सालों से राज्य के लिए सबसे बडी चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं को धरातल पर लाने की दिखाई देती रही है क्योंकि आज तक जितने भी स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव बने हैं उन्होंने कभी भी एक बडे विजन के साथ आगे आकर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर लाने के लिए कोई पहल नहीं की जिसका खामियाजा राज्य की जनता को अकसर भुगतना पडा है और यही कारण है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों पर आवाम को विश्वास नहीं हो रहा कि उन्हें सरकार के सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज मिल पायेगा। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री की कुर्सी सम्भालने वाले पुष्कर सिंह धामी ने बाइस सालों से राज्य में धडाम दिख रही स्वास्थ्य सेवाओं को पंख लगाने का जिम्मा डा० आर राजेश को सौंपा तो उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के बिगडे रूप को सुधारने के लिए आने वाली हर चुनौती का सामना करने का संकल्प लिया और उन्होंने अपने साथ कुछ चुनिंदा लोगों की ऐसी टीम तैयार की जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य सचिव के साथ पंख लगाने के लिए रात-दिन एक कर दें। राजधानी में डीएम के पद पर तैनात रहने वाले डा० आर राजेश कुमार ने अपने कार्यकाल में स्मार्ट सिटी को बेहतर बनाने की दिशा में बडे विजन के साथ काम किया था जिसे देखकर राजधानीवासी भी डा० आर राजेश कुमार के विजन को देखकर गद्गद् हो गये थे और अब उन्होंने जिस तरह से राज्य के स्वास्थ्य महकमें को चार चांद लगाने के लिए राजधानी से लेकर उत्तराखण्ड के अंतिम छोर तक बडे विजन के साथ काम करना शुरू किया है उससे साफ नजर आ रहा है कि स्वास्थ्य सचिव उत्तराखण्ड की स्वास्थ्य सेवाओं को रोशन करने की दिशा में किस तेजी के साथ आगे बढते जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के आईएएस डा० आर राजेश कुमार को जब भी सरकार ने कोई जिम्मेदारी सौंपी तो उन्होंने उस जिम्मेदारी को जिस अंदाज में निभाया उसे देखकर उत्तराखण्डवासी भी यह सोचने के लिए मजबूर हो गये कि अगर डा० आर राजेश कुमार जैसे कुछ और अफसर हो जायें तो उत्तराखण्ड में विकास की गंगा जिस तेजी के साथ बहेगी उसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। बाइस सालों से राज्य का स्वास्थ्य महकमा खुद बीमार चला आ रहा है और उससे पहाड से लेकर मैदान तक के लोगों के मन में सरकारों को लेकर जो एक बडा गुस्सा देखने को मिलता आ रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। उत्तराखण्ड की पूर्व सरकारें दावे करती रही कि राज्य को स्वीजरलैंड की तर्ज पर विकसित किया जायेगा लेकिन जिस तरह से राज्य ने स्वास्थ्य महकमा खुद वैलीटीनेटर पर दिखाई देता रहा उससे राज्य की जनता के मन में एक सरकारों को लेकर एक बडी नाराजगी देखने को मिलती रही। उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बडे विजन के साथ काम कर रहे हैं और उन्होंने राज्य को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प लिया हुआ है जिसके चलते वह हर उस क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में आगे बढे हुये हैं जो क्षेत्र हमेशा आवाम के निशाने पर रहते हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य महकमें को पंख लगाने के लिए बडे विजन के साथ काम करने वाले आईएएस डा० आर राजेश कुमार को चुना और उन्हें टास्क दिया कि वह अपने कार्यकाल में स्वास्थ्य महकमें को इतना विशाल और बेहतर बना दें कि राज्य की जनता प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के बजाए सरकार के निशुल्क सरकारी अस्पतालों में इलाज करने का गर्व कर सकें। मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतराने के लिए डा० आर राजेश कुमार ने वैल्टीनेटर पर आ रखे स्वास्थ्य महकमें को आक्सीजन देने का काम शुरू किया और डा० आर राजेश कुमार के इस ऑक्सीजन से वैल्टीनेटर पर आ रखे स्वास्थ्य महकमें में हर दिन एक नई जान आने लगी है जिसे देखकर राज्य की जनता के मन में भी एक नई उमंग दिखाई दे रही है कि अब पुष्कर राज में उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पतालों के अन्दर गरीब से गरीब इंसान को वो इलाज मिल जायेगा जिसकी चाहत में वह प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराने का साहस नहीं कर पा रहे हैं। डा० आर राजेश कुमार का साफ कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें जो मिशन सौंपा है उस मिशन को धरातल पर उतारने के लिए वह दिन-रात एक करने से पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि उत्तराखण्ड के हर इंसान का जीवन बचाना सरकार का दायित्व है और स्वास्थ्य महकमा सरकार के विजन को पंख लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोडेगा। डा० आर राजेश कुमार की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने की जो मुहिम शुरू हुई है उससे अब उत्तराखण्ड का स्वास्थ्य सेवायें धीरे-धीरे गुलजार होती हुई नजर आ रही हैं।

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