कांग्रेस ने मुख्यमंत्री व आयोग के अध्यक्ष से मांगा इस्तीफ ा

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देहरादून(नगर संवाददाता)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कम्युनिकेशन विभाग में सचिव वैभव वालिया ने विगत दिवस हुई कनिष्ठ सहायक भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्रों में पायी गयी गम्भीर त्रुटियों पर सरकार और आयोग पर तीखा हमला बोला और कहा कि मुख्यमंत्री को तत्काल इसका संज्ञान लेना चाहिए और आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त किया जाये और साथ ही मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
यहां कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों से रूबरू होते हुए वालिया ने कहा कि राज्य सरकार बार बार प्रदेश युवाओं के साथ भर्ती परीक्षा के नाम पर भद्दा मजाक कर रही है। वालिया ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभाली तो प्रदेश के युवाओं को युवा मुख्यमंत्री से भारी अपेक्षाएं थी। उन्होंने कहा कि युवाओं को लगा कि वह बेरोजगारी से उन्हें मुक्ति दिलाएगें। परंतु पिछले एक साल में जितनी भी भर्ती परीक्षाएं हुयी उनमें युवाओं के साथ छल के अलावा कुछ नही हुआ। इस अवसर पर वालिया ने सिलसिले वार गिनाते हुए कहा कि उत्तराखंड पुलिस, पटवारी, लेखपाल, वन क्षेत्राधिकारी (फॉरेस्ट गार्ड भर्ती), आरओ, एआरओ, पीसीएस जेई, प्रवक्ता एई, लोअर पीसीएस, अपर पीसीएस, जूनियर इंजीनियर की परीक्षाएं दे चुके युवा अभी भी बेरोजगार भटक रहे हैं, और किसी को भी नियुक्ति नहीं मिली है। वालिया ने बीते फरवरी माह में पुलिस प्रशासन द्वारा युवाओं के साथ हुई बर्बरता की भी कड़े शब्दों में निंदा की।
इस अवसर पर वालिया ने कहा कि जो सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया न करा पाये उसे सत्ता पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि युवा लगातार सीबीआई की मांग को लेकर धरनारत थे परन्तु सीबीआई की जांच से घबराई हुई राज्य सरकार ने पुलिस को ढाल बनाकर युवाओं के ऊपर लाठियां भाजीं। वालिया ने कनिष्ठ सहायक की विगत दिन को हुई कनिष्ठ सहायक भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्रों में हुई गड़बडिय़ों को लेकर पत्रकार बन्धुओं के समक्ष साक्ष्य और सबूत प्रस्तुत किये।
इस अवसर पर वार्ता को सम्बोधित करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी ने कहा कि कुछ ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री जी ने सार्वजनिक सभा में यह घोषणा की थी कि कैलेंडर द्वारा जारी सभी भर्ती परीक्षाएं एक बार सम्पन्न हो जाए तो वह सीबीआई जांच की संस्तुति करेंगें परंतु उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं कि वह जनता को विपक्ष को और युवाओं को अपनी बातों में घुमाने के बजाय सीधे बताएं कि कारवां लुटा कैसे। दसौनी ने कहा कि आज आपके सामने दुख हो रहा है यह बताते हुए कि बीते रोज को कनिष्ठ सहायक भर्ती परीक्षा लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई और अब वो भी गंभीर त्रुटियों के चलते सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि सवाल यह है की ऐसा क्यों है कि हमारी सरकार एक भी भर्ती परीक्षा पारदर्शिता से नहीं करा पा रही हैं। दसौनी ने कहा कि क्या यह नैतिकता का पतन है और सत्ता का अहंकार या प्रदेश भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ चुका है।
दसौनी ने कहा कि बर्बाद गुलिस्तां को करने बस एक ही भ्रष्टाचारी काफी था यहां तो हर शाख पे भ्रष्टाचारी बैठा है अंजामे उत्तराखण्ड क्या होगा। दसौनी ने कहा कि सवाल ये भी उठता है की क्या आयोग में बैठे हुए अधिकारी कर्मचारियों की खालें इतनी मोटी हो चुकी हैं कि उन्हें युवाओं के सड़क पर उतरने, लाठियां खाने और लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड करने में आयोग की रूह तक नही कांप रही है। दसौनी ने कडा हमला बोलते हुए कहा कि शासन और आयोग में बैठे हुए लोगों में कोई जमीर नाम की चीज नहीं बची है।
इस अवसर पर दसौनी ने कहा कि प्रदेश में जो कुछ भी चल रहा है चाहे वो भर्ती परीक्षाओं से सम्बन्धित हो या फिर गिरती कानून व्यवस्था से उसका डेबिट या क्रेडिट तो मुख्यमंत्री के ही खाते में गिना जाएगा। दसौनी ने कहा कि कल की परीक्षा में अभ्यर्थियों को परिपाटी के अनुसार चार सेट उपलब्ध कराये गए यानी एबीसीडी परन्तु हतप्रभ करने वाली बात यह है कि चार के चार सेट में प्रश्न एक से लेकर 1०० तक कोई भिन्नता नहीं थी और तो और उनके क्रमांक संख्या में भी कोई फेरबदल नहीं था। कुछ अभ्यर्थियों ने पहले से सील खोले जाने की शिकायत भी कि है उनका कहना था कि शील जिस स्थान पर थी उसको बड़ी सफाई से खोला गया और उसकी जगह पर नए स्थान पर सील लगा दी गई। इस अवसर पर दसौनी ने सवाल दागते हुए कहा कि आयोग के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं कि यह किन विशेष लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है और यह भी की आपने यानी आयोग ने चार अलग अलग प्रश्नपत्र बनाने की जहमत क्यों उठाई। दसौनी ने बताया कि अमूमन होता यह है कि अभ्यर्थियों को चारसेट दिए जाते हैं ताकि वह नकल ना कर सके और चारों सेट में प्रश्न अलग-अलग होते हैं अगर एक चौथाई प्रश्न एक से भी होते हैं तो उनकी क्रमांक संख्या में फेरबदल किया जाता है परंतु यहां ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला प्रश्न भी एक से थे और क्रमांक संख्या भी वही थी।
उन्होंने कहा कि तीसरी त्रुटि यह थी कि अभ्यर्थियों को जब प्रश्न पत्र और ओएमआर शीट दी जाती है तो उसकी क्रमांक संख्या हुबहू मेल खानी चाहिए परंतु प्रश्न पत्र और और ओएमआर शीट की क्रमांक संख्या में भी भिन्नता पाई गई। अचरज इस बात से भी हो रहा है कि सरकार भर्ती परीक्षाओं और इन परीक्षाओं से प्रभावित युवाओं के भविष्य के प्रति गंभीर या सजग क्यों नहीं दिखाई पड़ रही है। उन्होंने कहा कि आखिर क्यों भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है और व्यवस्था परिवर्तन नहीं हो रहा है।
दसौनी ने कहा कि उच्च न्यायालय के सीटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग इस लिए भी उठ रही है क्योंकि एसआईटी या एसटीएफ कोई भी जांच करेगी तो यदि उनके आला अधिकारी भी इस नकल सिंडिकेट से जुड़े होंगे तो वह उनके गिरेबान में हाथ डालने की हिमाकत नहीं कर पाएंगे । उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के हिसाब से उनके हाथ बंधे हुए है। आखिर आयोग लूप होल छोड़ ही क्यों रहा है कि भर्ती परीक्षा में सवाल उठाए जा सकें, क्यों प्रश्नपत्रों की मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।
इस अवसर पर दसौनी ने सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष पर भी कडा हमला बोला है। दसौनी ने कहा कि आज उत्तराखंड के हालात ,झारखंड और बिहार से बदतर हो चुकें है। उन्होंने कहा कि हर तरफ अराजकता का माहौल है। जनता डरी और सहमी हुयी है। अपराधी कानून को अपने हाथ की कठपुतली समझ रहे हैं सत्तारूढ़ दल भ्रष्टाचार और आरोप साबित होने के बावजूद अपने पदाधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है एक तरफ आदित्य कोठारी जो कि प्रदेश महामंत्री हैं उन पर टिहरी के जिलाधिकारी सहकारी बैंक की एक करोड़ से अधिक धन राशि के गबन का आरोप लगाते हुए उनकी संपत्ति की कुर्की के आदेश दे चुके हैं परंतु ना ही कुर्की हुई और ना ही भारतीय जनता पार्टी के संगठन ने अपने महामंत्री पर कोई एक्शन लिया, दूसरी ओर भाजपा के छह पार्षदों के द्वारा अंसल ग्रीन वैली में सत्ता का कैसा नंगा नाच किया गया किसी से छुपा नहीं है सबको दिखाई दिया उसके बावजूद कोई कारवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि क्यों विजय वात्सल्य हत्या कांड सवालों के घेरे में है लेकिन हत्याकांड और उसकी साजिश में जिन भाजपा के पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं उन पर कार्यवाही के नाम पर संगठन मौन है। आखिर क्यों मुख्यमंत्री धृतराष्ट्र क्यों बने हुए हैं, क्या मुख्यमंत्री के संज्ञान में उपरोक्त सभी प्रकरण नहीं है या फिर यह समझा जाए कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े हुए सभी लोग कानून से ऊपर हैं और कानून या नियम कायदे सिर्फ गरीब जनता के लिए और विपक्ष के लिए है इस प्रदेश में एक तरफ अभी अंकिता हत्याकांड में वीआईपी के खुलासा नहीं हो पाया है वहीं दूसरी ओर भंडारी बाग में एक महिला की दिनदहाड़े हत्या हो जाती है ।
दसौनी ने कहा कि एक बात मुख्यमंत्री जान और समझ ले कि सुशासन की परिभाषा कहती है कि जो सरकार अपनी जनता की जान माल की रक्षा करें उसे ही गुड गवर्नेंस कहते हैं और क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश को सुशासन नहीं दे पा रहे हैं अपनी जनता की जान माल की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं उन्होंने कहा कि ऐसे में नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री को भी और आयोग के अध्यक्ष को भी तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
इस अवसर पर एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नकल विरोधी कानून को लेकर जगह जगह अपने लिए आभार रैली का आयोजन करवा रहे हैं, परंतु शायद वह यह नहीं जानते कि इन आभार रैलियों में प्रदेश का युवा शामिल नहीं हो रहा बल्कि सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ताओं को और भाडें में लायी गयी भीड को इन कार्यक्रमों में देखा जा रहा है।
नेगी ने कहा कि प्रदेश का युवा आज राज्य सरकार की कार्यप्रणाली से उदासीन हो चुका है। नेगी ने एनएसयूआई के साथियों संग कनिष्ठ सहायक भती परीक्षा के प्रश्नपत्रों में हुई गडबडी और युवाओं के साथ हो रहे धोखे से क्षुब्ध है और प्रदेश में व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में वैभव वालिया, गरिमा माहरा दसौनी, अजय रावत, विकास नेगी, शीशपाल सिंह बिष्ट, अमरजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।

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