देहरादून(संवाददाता)।उत्तराखण्ड में बाइस सालों से राज्य का स्वास्थ्य महकमा खुद ही वैल्टीनेटर पर आ रखा था जिसके चलते राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों पर आवाम और वीआईपी ज्यादा विश्वास नहीं दिखा रहे थे और प्राइवेट अस्पतालों में ही इलाज कराने के लिए वह अपने कदम आगे बढाते थे लेकिन जबसे सरकार ने डा० राजेश कुमार को स्वास्थ्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है तबसे उन्होंने स्वास्थ्य महकमें को वैल्टीनेटर से उठाकर उसे आक्सीजन देते हुए जिस तरह से ठीक करने का मिशन शुरू कर रखा है उससे स्वास्थ्य महकमा राज्य के मैदान व पहाड में अब आने वाले समय में आदर्श दिखाई देगा क्योंकि सरकारी अस्पतालों में सभी व्यवस्थायें करने के लिए स्वास्थ्य सचिव ने राजधानी से लेकर उत्तराखण्ड के अंतिम छोर तक उसे ठीक करने का मिशन शुरू किया है उससे राज्य के आम आदमी के मन में एक विश्वास पैदा हो रहा है कि अब उन्हें सरकारी अस्पतालों में जरूर वैसा इलाज मिल पायेगा जिसकी कल्पना वह बाइस सालों से करते आ रहे थे।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 824 ए.एन.एम. पदों की भर्ती पर लगी रोक को नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के निर्णय के पश्चात सरकार शीघ्र ही चयनित अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने जा रही है। इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा कोर्ट के फैसले के पश्चात बताया गया की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र ही आरंभ की जाएगी तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिहं रावत द्वारा रोजगार मेले के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। स्वास्थ्य सचिव द्वारा बताया गया कोर्ट के निर्णय के बाद शीघ्र ही चयनित 824 ए.एन.एम. प्रदेश की स्वास्थ्य इकाइयों में नियुक्ति हो जाने से प्रदेश के चिकित्सा इकाइयों में आम जनमानस को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में तेजी आएगी। ए.एन.एम. अस्पताल, स्वास्थ्य कार्यक्रमों व परियोजनाओं के अनुरुप मरीजों को सुरक्षित एवं कारगर देखभाल के लिए नियुक्त होंगे साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी सहयोग करेंगे। ए.एन.एम. द्वारा सही तरीके से मरीजों को इलाज का ध्यान रखना है। मरीजों को समय समय पर दवाई देना एवं उन्हें देखभाल करना है। प्रथम उपचार, नुट्रिशन, सामान्य बीमारियों का उपचार प्रदान करना व बच्चों का टीकाकरण करवाना है तथा डॉक्टर के आदेशनुसार मरीजों को दवाई देना या मरीजों को दिए गए दवाइयों को लेने के लिए प्रोत्साहित करना है साथ ही आमजनमानस में जागरुकता को बढ़ावा देने का भी कार्य ए.एन.एम. द्वारा किया जाता है। गौरतलब है कि राज्य के स्वास्थ्य सचिव डा० राजेश कुमार उत्तराखण्ड के सभी सरकारी अस्पतालों को प्राइवेट अस्पताल की तर्ज पर बेहतर बनाने के लिए एक बडे विजन के तहत काम कर रहे हैं और उनका यह विजन धरातल पर अब सच साबित होता हुआ दिखाई दे रहा है जिससे यह साफ नजर आ रहा कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड के सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज बेहतर दिखाई देगा।