फिर सुलगने लगी चिंगारी!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भर्ती प्रकरण में हुये घोटालों को लेकर राज्य की राजनीति में पिछले काफी समय से तूफान मचा हुआ है और सरकार ने आन्दोलन की राह पर चलने वाले बेरोजगार छात्रों और उनके नेता को लगभग एक सप्ताह जेल की सलाखों के पीछे भी उस समय डाल दिया था जब पुलिस और बेरोजगार छात्रों के बीच पथराव और लाठीचार्ज हो गया था। जेल से छात्रों की रिहाई के बाद कुछ समय तक बेरोजगार छात्रों की खामोशी से सरकार को यह आभास हुआ कि अब बेरोजगार छात्र आन्दोलन की राह से दूर हो जायेंगे लेकिन एक बार फिर भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर बेरोजगार छात्रों ने अपने आंदोलन को सत्याग्रह के रूप में शुरू किया है उससे भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच कराने को लेकर शांत हो चुका माहौल फिर गरमाने लगा है और बेरोजगार छात्रों के सत्याग्रह से सीबीआई जांच की चिंगारी फिर सुलगते हुए दिखाई दे रही है और बेरोजगारों का यह सत्याग्रह कहीं न कहीं सरकार के लिए आने वाले दिनों में एक बडा सिरदर्द बन सकता है? वहीं कांग्रेस का बेरोजगार छात्रों को शुरूआती दौर से ही समर्थन मिल रहा है जिसके चलते गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र में राज्य के अन्दर हुये सभी भर्ती घोटालों की सीबीआई से जांच कराने को लेकर भी विपक्ष सरकार की घेराबंदी के लिए बडी रणनीति के तहत आक्रामक दिखाई दे सकता है?
उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष और कुछ छात्रों को जब जमानत मिली तो सरकार और प्रशासन को यह आभास हो रहा था कि अब बेरोजगार संघ भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर खामोश हो जायेगा? काफी दिन तक बेरोजगार संघ की चुप्पी के बाद सीबीआई जांच का मामला ठंडा हो गया था लेकिन इसी बीच उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ ने गांधी पार्क के बाहर भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर जब वहां सत्याग्रह शुरू करने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो प्रशासन ने गांधी पार्क में प्रदर्शन की सख्त मनाही करते हुए वहां एक बैनर चस्पा कर दिया की वहां धरना नहीं दिया जा सकता जिसके बाद उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ ने सहस्रधारा रोड स्थित एकता विहार में अपना बेमियादी सत्याग्रह शुरू कर सरकार और सिस्टम के लिए एक चुनौती पैदा कर दी? संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाया कि युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और राजनीतिक दलों एवं बेरोजगार युवाओं के लिए अलग-अलग कानून लागू किये जा रहे हैं। उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ अधिनस्थ चयन सेवा आयोग एवं उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग के भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच की मंाग पर फिर एक बार अड गये हैं और उन्होंने इसके लिए सत्याग्रह शुरू कर यह संदेश दे दिया है कि जब तक सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं कर देती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ ने अब अपने आंदोलन को सत्याग्रह का रूप देकर कहीं न कहीं सरकार और सिस्टम के लिए एक बडा सिरदर्द खडा कर दिया है?
गौरतलब है कि गांधी पार्क से शांत आंदोलन की राह पर चल रहे बेरोजगार छात्रों को जब पुलिस ने लाठीचार्ज से एक दिन पूर्व रात्रि में उठाने का प्रयास किया था तो उसके अगले दिन गांधी पार्क के आसपास बेरोजगार छात्रों के उमडे हुजूम से सरकार और सिस्टम अचम्भित हो गया था और कई धंटे बाद जब पुलिस और बेरोजगार छात्रों के बीच बडा टकराव हुआ तो उससे राजधानी का शांत दिख रहा माहौल एकाएक उबाल ले गया था। इसके बाद बेरोजगार छात्रों को जेल हुई और जेल से रिहाई के बाद सीबीआई जाचं का मामला शांत हो गया था लेकिन विधानसभा सत्र से कुछ दिन पूर्व एकाएक जिस तरह से उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ ने भर्ती घोटालों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर सत्याग्रह शुरू किया है वह सरकार के लिए एक बार फिर सिरदर्द बनता हुआ दिखाई दे रहा है?

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