घोटाले चीख रहे मेरा अंत करो सरकार?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून।उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बडा संकल्प ले रखा है और वह भ्रष्टाचार पर चोट करने के लिए भी आगे आ रहे हैं लेकिन जिस तरह से उनके पास बार-बार कुछ घोटालों का राज बेनकाब करने के लिए उसकी बडी जांच कराने की मांग उठ रही है उस पर सरकार कब अपने संकल्प को पूूरा करने के लिए उसकी जांच बडे स्तर पर कराने के लिए आगे आयेगी यह आज भी एक रहस्य ही बना हुआ है? उत्तराखण्ड में अब भी काफी घोटाले ऐसे हैं जो चींख-चीखकर कह रहे हैं कि मेरा अंत करो सरकार? घोटाले और भ्रष्टाचार चाहे किसी की भी सरकार के कार्यकाल में हुये हों अगर उन सबका पोस्टमार्टम एकसाथ न किया गया तो फिर सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ छेडा गया मिशन अधूरा ही नजर आयेगा ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि घोटाले के खिलाडियों को बेनकाब करने के लिए सरकार को उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में आईपीएस अफसरों की एक टीम बनाकर उन्हें राज्य में हुये सभी घोटालों की जांच करानेे के लिए आगे आना चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी यह आरोप न लगा सके कि सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो जंग शुरू की थी उसमें भाई-भतीजावाद किया गया है?
उत्तराखण्ड में अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का जमकर तांडव हुआ और इन घोटालों और भ्रष्टाचार की गूंज उच्च न्यायालय नैनीताल से लेकर देश की सर्वोपरि न्याय पालिका सुप्रीम कोर्ट में भी गूंजी थी जिससे हमेशा राज्य के कुछ राजनेताओं और अफसरों पर सवाल खडे हुये थे कि आखिरकार क्या कारण है कि उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटालों का काला साया कभी छटा ही नहीं? हैरानी वाली बात है कि एक सरकार के कार्यकाल में ऐसा घोटाला भी सामने आया था कि बडी संख्या में राशन को स्कूटर और मोटर साइकिल से ढोना बताया गया था जबकि वह इतना राशन था जो बडे वाहन में ले जाना ही सम्भव था लेकिन भ्रष्टाचार का खेल ऐसे खेला गया कि उसका जब आरटीआई से सच सामने आया तो हैरानी हो गई थी कि भ्रष्टाचार करने वाले किस तरह से बेखौफ होकर अपने काम को अंजाम दे रहे थे? उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार चलाने के लिए आवाम के सामने संकल्प लिया कि भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ उनकी जंग शुरू हो गई है और इस जंग को अंजाम तक पहुंचाये बिना वह खामोश नहीं बैठेेंगे। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और घोटालों को एक-एक कर बेनकाब करने का सिलसिला शुरू किया तो उसके बाद इस बात से पर्दा उठा कि राज्य में कुछ सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से भर्तियां हुई थी और इन भर्तियों को अंजाम देने वाले सफेदपोश और नकल माफियाओं का एक बडा सिंडिकेट वर्षों तक काम कर रहा था। हाकम सिंह जैसे सफेदपोश ने राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ बडा खिलवाड करते हुए जिस तरह से नौकरियां बेचने की दुकान सजा रखी थी वह उत्तराखण्ड की कुछ सरकारों पर एक बदनुमा दाग लगा चुका है? हैरानी वाली बात है कि राज्य में भ्रष्टाचार की इतनी लम्बीचौडी फैरिस्त है कि वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए आगे आ रखे हों लेकिन आज भी काफी संख्या में इतने भ्रष्टाचार और घोटाले फाइलों में कैद हैं जो चीख-चींख कर कहीं न कहीं यही कह रहे हैं कि सरकार सभी भ्रष्टाचार का अंत करो? जनसंघर्ष मोर्चा कई बार रैंकर दरोगा परीक्षा और सहकारिता विभाग में हुये घोटालों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर चुका है और दो दिन पूर्व ही उसने मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा था जिसमें कहा गया कि रैंकर उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा में लगभग 3०० परीक्षार्थियों का परिणाम वर्ष 2०16 में घोषित किया गया, जिसमें लिखित परीक्षा ओएमआर शीट के माध्यम से कराई गई थी और उक्त रैंकर परीक्षा उसी जी बी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संपन्न कराई गई, जिसने उप निरीक्षक (सीधी भर्ती) परीक्षा संपन्न कराई थी। उन्होंने कहा कि सूत्र बताते हैं कि उक्त लिखित परीक्षा में कई सेटिंगबाज अभ्यर्थियों, जालसाजों ने ओएमआर शीट में बामुश्किल 3०-4० प्रश्न हल किए तथा शीट कोरी छोड़ कर आ गए, जिसको बाद में ओएमआर शीट में सेटिंग-गेटिंग के आधार पर भरा गया और इसलिए ओएमआर शीट की फॉरेंसिक जांच आवश्यक है ।
इतना ही नहीं पत्र में कहा गया कि सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश के सहकारी बैंकों में 423 चतुर्थ श्रेणी (सहयोगी,गार्ड) कर्मचारियों की भर्ती कराई गई थी, जिसमें देहरादून, अल्मोड़ा व ऊधम सिंह नगर जनपद में बड़े पैमाने पर जालसाजों ने भर्ती घोटाले को अंजाम दिया था, जिसको लेकर सरकार ने एक अप्रैल 2०22 को जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि उक्त कमेटी ने अक्टूबर 2०22 को रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, लेकिन चार-पांच माह बीतने के बाद भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। इस अवसर पर नेगी ने कहा कि उक्त भर्तियों में एक पद 1० लाख से लेकर 15 लाख रुपए तक बेचा गया था, जिसकी पुष्टि जालसाजों व नौकरी पाए अभ्यर्थियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन की डिटेल से पुष्टि की जा है। इस अवसर पर नेगी ने कहा कि इन घोटाले बाजों ने अपने रिश्तेदारों के साथ- साथ बैंक में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों के रिश्तेदारों, परिजनों से मोटी रकम हासिल कर नौकरियां बांट दी थी। इसके अलावा केदारनाथ आपदा के समय हुये घोटाले सहित कई घोटाले आज भी राज्य की वादियों में चीख-चीखकर यही कह रहे हैं कि सरकार मेरा अंत कब करोगे?

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