सीएम के सख्त आदेश फिर भी बेखौफ अवैध खनन?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। कैंट इलाके में एक पुलिसकर्मी पर ट्रैक्टर चालक द्वारा अवैध खनन के दौरान ट्रैक्टर चढाये जाने की घटना को राज्य के मुख्यमंत्री ने भले ही सख्ती से लेकर अवैध खनन पर नकेल लगाने का आदेश दिया हो लेकिन उनके आदेश का आज सुबह भी विकासनगर इलाके में पालन होता हुआ दिखाई नहीं दिया क्योंकि बेखौफ खनन माफिया नदियों का सीना चीरकर सरेआम ट्रक और ट्रैक्टर में जिस तरह से अवैध खनन भरकर ले जाते हुए कैमरे में कैद हुये उससे यह सवाल खडा हुआ कि आखिर अवैध खनन करने वाले सिंडिकेट का किला कौन नेस्तनाबूत करेगा? विकासनगर इलाके में अगर अवैध खनन का तांडव मुख्यमंत्री के आदेश को हवा में उडाकर हो रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस इलाके में खनन माफियाओं को न तो सरकार का और न ही सिस्टम का कोई खौफ है?
उत्तराखण्ड का गठन होने के बाद से ही जब भी राज्य में किसी राजनीतिक दल की सरकार बनी तो उसके कार्यकाल में अवैध खनन का खुला तांडव होता रहा और इस तांडव को देखते हुए भी सरकारें क्यों खामोश रही यह हमेशा एक पहेली ही बनकर रह गया? उत्तराखण्ड के अन्दर अवैध खनन का खेल राज्यवासियों के लिए एक अभिशाप बन गया है क्योंकि उन्हें अपना मकान बनाने के लिए जिस तरह से महंगे दामों पर खनन सामाग्री खरीदने के लिए मजबूर होना पड रहा है उससे राज्य के अन्दर हमेशा एक ही आवाज उठती आ रही है कि आखिर खनन माफियाओं के सिंडिकेट को सरकार कब नेस्तनाबूत करेगी?
उत्तराखण्ड में आज तक अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में खनन माफियाओं का सिंडिकेट इतना पॉवरफुल रहा कि उन्होंने दिन-रात जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से नदियों का सीना चीरा और एक-एक दिन में सरकार का लाखों रूपये का खनन सरेआम चोरी किया और इस चोरी की खबर सारे सिस्टम को रही लेकिन हर बार सिस्टम खनन माफियाओं के सिंडिकेट के आगे क्यों इतना लाचार दिखाई दिया कि वह उस पर नकेल लगाने के लिए एक बडे विजन के साथ कभी भी आगे नहीं आ पाया? उत्तराखण्ड के अन्दर हमेशा एक सवाल खडा हुआ कि अगर सरकार सभी नदियों पर पीएससी के कुछ जवानों को तैनात कर दे तो नदी से किसी भी खनन माफिया में इतनी शक्ति नहीं दिखेगी कि वह नदी से खनन चोरी करने का दुसाहस कर सके? उत्तराखण्ड की राजधानी में जब खनन माफियाओं को सरकार का कोई भय कभी नजर नहीं आया तो फिर राज्य के कुछ जिलों में जहां अवैध खनन की हमेशा गंूज उठती रहती है वहां का सिस्टम कैसे खनन माफियाओं पर नकेल लगाने के लिए आगे आ सकता है इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है? राजधानी के कुछ इलाकों में सरेआम अवैध खनन का काला कारोबार होते देख सिस्टम की रहस्यमय चुप्पी यह सवाल खडे कर रही है कि आखिरकार वो कौन पॉवरफुल शक्तियां हैं जिनके आगे सिस्टम के कुछ अफसर सिर्फ खामोश रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं?

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