63 साल का हुआ उत्तरकाशी, आपदाओं से रहा पुराना नाता

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उत्तरकाशी(चिरंजीव सेमवाल)। उत्तरकाशी जिला टिहरी जनपद से पृथक होकर 24 फरवरी 196० को अस्तित्व में आया था। आज 63 साल का उत्तरकाशी बन चुका है। उत्तरकाशी का पुराना नाम बाड़ाहाट है। समुद्र तल से 3799 फीट की ऊंचाई पर है। 2०11के जनगणना के अनुसार 2397०9 जनसंख्या है। यहां पर कई सारे मंदिर है। यहीं पर प्रसिद्ध विश्वनाथ का मंदिर भी है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद ही आकर्षक है। पहाड़ों के बीच बहती नदियों का आकर्षक देखते ही बनता है। इसके दूसरी तरफ घने ऊंचे ऊंचे जंगल देखने को मिलते हैं।
उत्तरकाशी जिले का इतिहास प्राचीन काल में महाभारत से जुड़ा है। विशेष रूप से यहां पर किरात, उत्तरा, कौरस, खासा, तांगना, कुनिंद और प्रतानगनाओ की ढलान जनजातियों का उल्लेख महाभारत में मिलता है। स्कंद पुराण के केदारखंड में भी उत्तरकाशी और भागीरथी नदी, जानवी और भील गंगा का उल्लेख मिलता है। पहले उत्तरकाशी का यह क्षेत्र व्यापार समृद्ध था। कहा जाता है कि भारत और तिब्बत के बीच व्यापार करने के लिए यह प्राथमिक व्यवसाय क्षेत्र वाला शहर था। शोधकर्ताओं का कहना है कि उत्तरकाशी का पुराना नाम बराह पुरातन त्रिशूल से हुआ था और यह बराह शब्द बराह का एक अवगुण है। उत्तरकाशी जिला 8०16 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में हिमाचल प्रदेश और तिब्बत क्षेत्र है तथा पूर्व में चमोली जिला है। उत्तरकाशी देहरादून से लगभग 15० किलोमीटर की दूरी पर है। यह गंगा नदी के तट पर बसाया गया है। धार्मिक दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण स्थान है।
उत्तरकाशी में स्थित कुछ पर्यटन स्थल बहुत ही प्रसिद्ध हैं जिसमें सप्त ऋषि कुंड, शनि मंदिर, भगवान परशुराम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, शक्त मंदिर, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, गोपेश्वर मंदिर, डोडीताल, गंगोत्री, यमनोत्री, गौमुख, तपोवन, सहत्रताल, केदारताल, खेड़ाताल, दयारा बुग्याल, हरकीदून, सरूताल आदि प्रमुख रूप से शामिल है। उत्तरकाशी जिले के अस्तित्व आने बाद से ही आपदाओं से ग्रसित रहा है। यही वजह रही कि उत्तरकाशी का आपदाओं से रहा पूरराना नाता रहा है। 1978 विनाशकारी बाढ़ 1991 की भूकंप 2००3 के और वरूर्णावत भूस्खलन, 2०1०,2०12-13की विनाशकारी बाढ़ ने उत्तरकाशी का नक्शा ही चेंज कर दिया था।

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