अवैध खनन का चल रहा काला कारोबार

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विकासनगर(मनोज सैनी)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने माफिया तंत्र पर नकेल लगाने के लिए खुला अल्टीमेटम दे रखा है और उन्होंने राज्य में अवैध खनन करने वालों पर शिकंजा कसने का भी हुकम दिया हुआ है लेकिन मुख्यमंत्री के यह आदेश पछवादून के विकासनगर में पुलिस, खनन व वन विभाग हवा में उडा रहा है और यही कारण है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो रखे हैं कि वह रात के अंधेरे में खुलकर अवैध खनन का काला कारोबार कर रहे हैं। नदियों में जिस तरह से सरकार के सफेद सोने को चुराया जा रहा है उसे देखकर यह आभास हो रहा है कि खनन माफियाओं को सरकार का तिनकाभर भी डर नहीं है जिसके चलते वह नदी में रात के अंधेरे में भी अवैध खनन का खुला तांडव कर रहे हैं। विकासनगर में अवैध खनन का काला कारोबार देखकर ऐसा आभास हो रहा है कि वहां सिस्टम नाम की कोई चीज ही नहीं है जिसके चलते खनन माफिया बेखौफ होकर नदियों का सीना चीर रहे हैं? अगर इसी तरह से खनन माफियाओं पर सिस्टम घृतराष्ट्र बना रहा तो उससे सरकार के मुखिया का माफियातंत्र पर नकेल लगाने का सपना सिर्फ एक सपना ही बनकर रह जायेगा? आखिर पछवादून में आखिर वह कौन सी ताकते हैं जिनके इशारे पर नदियों का सीना चीरा जा रहा है और रात के अंधेरे में नदियों के अन्दर ट्रैक्टरों की खनन से लदी कतारे यह चीख-चीख कर कह रही हैं कि उन्हें सिस्टम का तिनकाभर भी डर नहीं है अगर सरकार के मुखिया के उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के विजन पर राजधानी का सिस्टम आगे नहीं आना चाह रहा तो इससे राजधानी के अन्दर आवाम के मन में क्या संदेश जा रहा होगा इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है?
पुल और सड़कें देश के साथ साथ क्षेत्र का विकास भी करती हैं आवागमन को सुगम बनाने का कार्य पूलो द्वारा किया जाता है उत्तराखंड सरकार द्वारा पूलों की सुरक्षा के मद्देनजर शासनादेश जारी करते हुए लोक निर्माण एवं समस्त जनपदों के जिलाधिकारी एवं पुलिस कप्तानों को को निर्देशित किया था साथ ही प्रशासन को एवं नियम बनाया था कि किसी भी पुल के पिलर से 2०० मीटर अपस्ट्रीम 3०० मीटर डाउनस्ट्रीम में किसी भी तरह के खनन कार्य पर प्रतिबंध लगाया था परंतु पछवादून का प्रशासन खनन माफियाओं के आगे घुटने टेक नतमस्तक है यमुना नदी के निर्माणाधीन भिमावाला नाव घाट यमुना पुल पिलर के ठीक नीचे जमकर अवैध खनन कार्य किया जा रहा है जिससे निर्माणाधीन पुल के पिलर कभी भी धराशाई हो सकते हैं बड़े हैरत की बात है कि उक्त अवैध खनन को रोकने के लिए पीआरडी के जवान तैनात है परंतु माफिया का खौफ देखिए पीआरडी के जवान माफियाओं को देखते ही आंखें मूंद लेते हैं यदि ऐसे ही निर्माणाधीन पुल के नीचे अवैध खनन कार्य चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं उक्त पुल बनने से पहले ही धराशाई हो जाएगा सूत्रों की माने तो उक्त पुल निर्माण किए जा रहे अवैध खनन सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है एवं सरकार को करोड़ों रुपए की चपत निर्माण कंपनी एवं खनन माफियाओं द्वारा लगाई जा रही है ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि जब निर्माणदाई संस्था ही सरकार के निर्देशों एवं नियमों की धज्जियां उड़ायेगी तो स्थानीय खनन माफिया भला क्यों पीछे रहे हो रहे बेतरतीब खनन से सरकार को भी रोजाना लाखों रुपए राजस्व की चपत लग रही है

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