चंद विभागों में चाणक्य नीति से चलता है भ्रष्टाचार का खेल!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों ने अपनी जडों को धीरे-धीरे इस कदर विशाल कर दिया कि इन जडों को समाप्त करने के लिए कोई भी सरकार सफल होती हुई दिखाई नहीं दी और यही कारण रहा कि अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का दंश राज्य की अधिकांश जनता को भुगतना पडा और राज्य के चंद विभाग ऐसे देखने को मिलते आ रहे हैं जहां तैनात कुछ भ्रष्ट अफसर और दलालों का गठजोड़ चाणक्य नीति से भ्रष्टाचार का खेल इतनी चतुराई से खेलता आ रहा है कि वह विजिलेंस के जाल में कभी फंस नहीं पाया? उत्तराखण्ड के एक दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने तो राज्य के सभी विभागों में विजिलेंस कर्मचारियों को तैनात करने का खाका तैयार किया था लेकिन कुछ भ्रष्ट अफसरों की चतुराई के चलते यह फैसला परवान नहीं चढ पाया था और यही कारण है कि आज भी राज्य के चंद विभागों में भ्रष्ट अफसरों और दलालों का बडा गठजोड पर्दे के पीछे से देखने को मिल रहा है जिससे सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार इस गठजोड को कौन भेदेगा? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य से भ्रष्टाचार का अंत करने का संकल्प लिये हुये हैं लेकिन उनके संकल्प पर राज्य के कुछ भ्रष्ट अफसर ही ग्रहण लगाते हुए नजर आ रहे हैं ऐसे में मुख्यमंत्री को उन भ्रष्ट अफसरों और उनके साथ गठजोड करने वाले दलालों के चेहरे पहचानने होंगे जिससे उन्हें राज्य की जनता के सामने बेनकाब करके उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त राज्य बनाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड देश में ऐसा राज्य बन चुका था जहां भ्रष्टाचार और घोटाले करने वालों का इतना बडा साम्राज्य बन गया था कि उसे भेदना राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के बस मंे भी दिखाई नहीं दिया? उत्तराखण्ड मंे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के साथ बिगुल बजाने वाले भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के कार्यकाल में राज्यवासियों को आशा की किरण दिखाई दी थी कि सख्त रूख में सत्ता चलाने वाले खण्डूरी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का तांडव देखने को नहीं मिलेगा लेकिन आवाम की यह सोच सच साबित नहीं हुई और राज्य में कुछ भ्रष्ट अफसरों ने दलालों के सिंडिकेट के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने के जो गुल खिलाये वह ईमानदार छवि के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी की सत्ता को भी कटघरे में खडा करते रहे थे? उत्तराखण्ड के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने राज्य से भ्रष्टाचार और घोटालों का तांडव समाप्त करने को दावे तो बडे-बडे किये लेकिन हैरानी वाली बात रही कि चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के करीबियों व उनके मुंह लगे भ्रष्ट अफसरों ने चंद विभागों में भ्रष्टाचार का खेल दलालों के गठजोड के साथ मिलकर जिस तेजी के साथ खेला उससे वह उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में काफी बदनामी का दाग अपने दामन पर लगवा गये थे? उत्तराखण्ड में चंद विभाग ऐसे हैं जहां आज भी भ्रष्टाचार का खेल बडी चाणक्य नीति के साथ कुछ भ्रष्ट अफसर दलालों का गठजोड खेलता आ रहा है? हालांकि एक विभाग तो ऐसा है कि जिसे बार-बार समाप्त करने के लिए आवाज बुलंद होती रही और यह आरोप लगते रहे कि इस विभाग में भ्रष्टाचार का खेल कुछ भ्रष्ट अफसर इतनी चतुराई से खेलते आ रहे हैं कि विजिलेंस की आंखों में वह धूल झोंक सकें और कभी भी वह विजिलेंस की रडार पर न आ पायें? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक विजन के साथ राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिये हुये हैं और वह चाहते हैं कि राज्य से जब भ्रष्टाचार और घोटालों का काला साया छट जायेगा तो नये उत्तराखण्ड में जो ईमानदारी का प्रकाश होगा उससे उत्तराखण्ड आदर्श राज्य बन जायेगा। हालांकि मुख्यमंत्री का यह संकल्प धरातल पर उतारने के लिए उनकी किचन टीम के कुछ अफसर तो एक बडी सोच के साथ काम कर रहे हैं लेकिन चंद विभागों में आज भी कुछ भ्रष्ट अफसर अपने चुनिंदा दलालों के सहारे भ्रष्टाचार का जो शातिराना खेल पर्दे के पीछे से रहकर खेल रहे हैं वह मुख्यमंत्री के विजन को कमजोर करता हुआ ही नजर आ रहा है? सवाल यह है कि चंद विभागों में बैठे भ्रष्ट अफसर भ्रष्टाचार का खेल अपने दलालों के माध्यम से खेलने में सफल हो रहे हैं जिससे कि वह भ्रष्टाचार से दौलत भी कमा लें और उनका नाम भी कहीं सामने न आये? ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि 2025 तक राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का वचन राज्य की जनता को दिये हुये हैं वह उस वचन पर खरा उतरने के लिए किस तरह से उन कुछ भ्रष्ट अफसरों और उनके आंगन में पलने वाले दलालों के गठजोड के चेहरे बेनकाब करेंगे जो अभी भी भ्रष्टाचार का दामन थामकर दौलत कमाने की हवस पाले हुये हैं?