भ्रष्ट अफसरों की सम्पत्तियां कौन सील करेगा हुजूर?

0
139

बेनामी सम्पत्ति का किला खडा करने वालों को कब ध्वस्त करेगी विजिलेंस!
सिर्फ अपराधियों की नहीं भ्रष्ट सफेदपोश और भ्रष्ट अफसरों की सम्पत्तियां भी खंगालो सरकार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने अपराधियों और नकल माफियाओं की बेनामी सम्पत्तियों को सील करने का खुला आदेश देकर यह संदेश दिया है कि अब उनके राज्य में ऐसे माफिया नहीं पनप पायेंगे और जिन्होंने अपराध और नौकरियां बेचकर बेनामी सम्पत्तियांे का साम्राज्य खडा किया है उन्हें ध्वस्त कर दिया जायेगा जिसके चलते अब पुलिस के कुछ अफसर दावा कर रहे हैं कि अपराधियों और नकल माफियाओं की सम्पत्तियांे को सील किया जायेगा। अपराधियों और नकल माफियाओं की सम्पत्तियों को सील करने से उत्तराखण्ड आदर्श राज्य नहीं बन पायेगा क्योंकि जिन भ्रष्ट अफसरों ने बाइस सालों से राज्य में बडे-बडे भ्रष्टाचार कर अपने रिश्तेदारों और परिवारों के नाम पर बेनामी सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा कर रखा है उस साम्राज्य का किला ध्वस्त करने के लिए कब विजिलेंस अपना तीसरा नेत्र खोलकर उन पर शिकंजा कसने के लिए आगे आयेगी यह आज भी राज्य के अन्दर एक सवाल खडा हो रखा है? उत्तराखण्ड के अन्दर बहस चल रही है कि हुजूर भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों को सील करने के लिए कब उनका चाबुक चलेगा क्योंकि अभी तक विजिलेंस की कार्यवाही सिर्फ छोटे-मोटे कर्मचारी और अफसरांे पर ही होती दिखाई दी है जबकि कुछ भ्रष्ट अफसर ऐसे हैं जिनके पास बेनामी सम्पत्ति होने की आशंका वर्षों से चली आ रही है लेकिन इन पर विजिलेंस की रडार इसलिए शायद नहीं पहुंच पाती क्योंकि उसके पास जो अधिकार हैं वह सीमित हैं और इस सीमित अधिकार के चलते उन भ्रष्ट बडे अफसरों पर विजिलेंस हाथ डालने से हमेशा कतराती है जिनके पास दौलत का विशाल साम्राज्य खडा है? उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस भी चल रही है कि अपराधियों और नकल माफियाओं की सम्पत्तियों को सील करने का फैसला तो धाकड है लेकिन इस धाकड फैसले में उस समय चार चांद लग जायेंगे जब भ्रष्ट सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों पर सरकार का चाबुक चलेगा?
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बडी पहल की है और उन्होंने जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार और घोटाले करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेना शुरू किया है उससे भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों की नींद उड गई है और यही कारण है कि वह सीएम के एक्शन से अपने आपको बचाने की जुगत में हाथ-पैर मारते हुए पर्दे के पीछे दिखाई दे रहे हैं? उत्तराखण्ड एक ऐसा राज्य बन गया है जहां कुछ सरकारों के कार्यकाल में हुई सरकारी नियुक्तियां भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई नजर आ रही हैं और हैरानी वाली बात है कि सरकारी भर्तियों को करने के लिए जिन दो आयोगों का गठन सरकार द्वारा किया हुआ है उनके द्वारा कराई गई अधिकांश भर्तियां भ्रष्टाचार के दलदल में डूबी हुई नजर आ रही हैं और अब राज्य में हुई सभी भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर उत्तराखण्ड के अन्दर आवाज बुलंद होने लगी है। सवाल उठ रहा है कि क्या एसटीएफ और एसआईटी नकल कराने और नौकरियां बेचने वालों पर ही अपना शिकंजा कसने तक सीमित होकर रहेगी या फिर वह इतना साहस दिखा पायेगी कि इन भर्तियों के पीछे जो बडे चेहरे मौजूद थे उन्हें वह बेनकाब कर पायेंगे? एसटीएफ और एसआईटी की जांच पर अब सवाल खडे होने लग गये हैं और यही कारण है कि कुछ संगठन चाहते हैं कि राज्य में जिस तरह से सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार का खुला तांडव हुआ था उसकी सीबीआई से जांच कराई जाये क्योंकि सीबीआई ही ऐसी मजबूत एजेंसी है जो इन भ्रष्ट भर्तियों में शामिल छोटे से लेकर बडे सभी को बेनकाब कर सकती है? एसटीएफ और एसआईटी पुलिस का अंग है इसलिए इनकी जांचो को कुछ बडे सफेदपोश अपनी पॉवर का इस्तेमाल कर उसे प्रभावित कर सकते हैं इसलिए इन भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर अब उत्तराखण्ड के अन्दर एक नया भूचाल मचने लगा है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपराधियों और नकल माफियाओं की बेनामी सम्पत्तियों को सील करने का आदेश देकर राज्य की जनता के मन में अपनी सरकार के दृढ़ निश्चय को जाहिर किया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी बडी लडाई लड रही है। हालांकि राज्य के अन्दर यह बहस भी शुरू हो रखी है कि सरकार के मुखिया को अगर उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाना है तो वह उन भ्रष्ट सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों को भी खंगालने का हुकम दें जिन्होंने मात्र कुछ वर्षों में बेनामी सम्पत्तियों का बडा साम्राज्य बना लिया है? विजिलेंस ने उत्तराखण्ड के अन्दर आज तक सिर्फ छोटे कर्मचारी और छोटे अफसरों पर ही अपना शिकंजा कसा लेकिन किसी बडे भ्रष्ट अफसर पर नकेल लगाने के लिए उसने अपने कदम आगे बढाये हों यह राज्यवासियों को अब तक दिखाई नहीं दे रहा है? विजिलेंस की ऐप बनाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लडना समझ से परे है क्योंकि इस ऐप के सहारे छोटे-मोटे कर्मचारी और अधिकारियों पर तो शिंकजा कसा जा सकता है लेकिन जो भ्रष्ट अफसर राज्य के अन्दर वर्षों से पॉवरफुल दिखाई देते रहे हैं उनकी ओर कभी विजिलेंस के कदम बढते हुए दिखाई देंगे ऐसी उम्मीद राज्यवासियों को अभी तक दिखाई नहीं दे रही है? विजिलेंस के पास अगर लोकायुक्त जैसे अधिकार होते तो माना जा सकता था कि वह राज्य के मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचारमुक्त शासन को पंख लगा देगी लेकिन उसके अधिकार ऐसे हैं जहां उन्हें बडे भ्रष्ट अफसरों तक पहुंचने के लिए शायद रास्ता ही न मिल पाये?

LEAVE A REPLY