प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता ने राज्य के चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में कुछ भ्रष्टाचारी और अहंकारी अफसरों को काफी नजदीक से देखा जो अपने पूर्व आका के राज में अपने आपको सरकार समझते थे और उन्होंने राज्य की काफी जनता को अपना गुलाम समझ रखा था क्योंकि जब उनके दफ्तर में कोई फरियादी फरियाद लेकर जाता था कि उसके साथ अन्याय हो रहा है तो चंद भ्रष्टाचारी और अहंकारी अफसर उन्हें अपने पद का अहंकार दिखाते हुये उन्हें अपने कार्यालय से बेइज्जत कर भगा देते थे जिसके चलते राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों के कारण ही अपनी गद्दी गवां गये थे? उत्तराखण्ड की जनता बाईस सालों से इसीलिए हर पांच साल बाद सत्ता में परिवर्तन करने के लिए आगे आती थी कि अपने आपको कुछ पूर्व मुख्यमंत्री ईमानदारी का खुद तो ढोल पीटते रहे लेकिन उन्होंने सिस्टम चलाने के लिए कुछ जनपदों में जिस तरह से भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों को तैनात कर वहां की जनता को दर्द दिया उससे उनकी सत्ता में वापसी नहीं होती थी? उत्तराखण्ड में मात्र छह माह के लिए विधानसभा चुनाव से पूर्व युवा चेहरे को जब मुख्यमंत्री बनाया गया तो उन्होंने अपनी जो ईमानदार अफसरों की टीम गठित की उससे राज्य की जनता के मन में यह अलख जग गई थी कि अब उत्तराखण्ड में भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों के राज पर ग्रहण लगेगा और जब युवा मुख्यमंत्री ने आवाम के सामने अपना विजन रखा तो राज्य की जनता ने बाईस सालों से सत्ता परिवर्तन को लेकर चले आ रहे मिथक को तोड दिया और युवा मुख्यमंत्री को फिर सत्ता में लाकर उन पर एक बडा भरोसा दिखा दिया था। मुख्यमंत्री ने जिस तरह से सत्ता चलाने के लिए अपने विजन को साफ किया उसी का परिणाम है कि राज्य के अन्दर सरकार पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ चल रही है लेकिन वो चंद भ्रष्ट और अहंकारी अफसर पुष्कर राज में सरकार की गोद में बैठने के लिए काफी फडफडा रहे हैं जिन्होंने कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और अहंकार के समुद्र में गोते लगाते हुए राज्य के कुछ चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों की कुर्सी ही उनसे छिनवा दी थी?
उत्तराखण्ड में राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक बडे संकल्प के साथ काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं और उन्होंने राज्य को स्वच्छता के साथ चलाने का संकल्प ले रखा है क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म है कि राज्य के चंद पूर्व मुख्यमंत्री अपनी और राज्य के कुछ अफसरों की कार्यशैली के चलते उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में दागदार हुये थे उसी के चलते उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक चली गई थी? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सत्ता संभालने के बाद जिस तरह से अपनी टीम में ईमानदार अफसरों को शामिल कर राज्य की जनता के सामने अपने विजन को साफ कर दिया था उससे राज्यवासियों को आशा की किरण जाग गई थी कि अब पुष्कर राज में उन्हें चंद भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों के कोप का भाजन नहीं होना पडेगा जैसा चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उन्हें ऐसे अफसरों के सामने बेइज्जत होना पडता था? उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ जिस तरह से एक बडी सोच के तहत ऑपरेशन चला रखा है उसी का परिणाम है कि आज राज्य से लेकर दिल्ली तक में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पारदर्शिता से चल रही सरकार को लेकर उनकी पीठ थपथपाई जा रही है। मुख्यमंत्री की टीम में शामिल अफसरों में एक बडा विजन देखने को मिल रहा है और वह भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा अपना आक्रामक रूख अपनाते रहते हैं जिसका परिणाम है कि राज्य के किसी भी जिले में ऐसा शोर अभी तक नहीं मचा है कि अफसर किसी फरियादी को अपने दफ्तर में उन्हें अपने पॉवरफुल होने का इकबाल दिखा रहे हों? मुख्यमंत्री की सबसे बडी जीत सत्ता चलाने के दौरान इसलिए भी मानी जा रही है कि उन्होंने कुछ भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों को यह आभास करा रखा है कि उनके शासनकाल में सिफारिश और चापलूसी से पद पाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है और यही कारण है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में अपने आपको सरकार समझने वाले कुछ भ्रष्ट और अहंकारी अफसर सरकार की गोद में बैठने के लिए काफी फडफडाते हुए नजर आ रहे हैं? हालांकि सरकार के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी इस बात का आभास है कि अगर उन्होंने उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाना है तो उन्हें ऐसे भ्रष्ट और अहंकारी अफसरों से दूर रहना पडेगा जो कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जनता को अपना गुलाम समझकर उन्हें अपने से दूर करने का खेल खेला करते थे?