प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ ऑपरेशन चला रखा है और उन्होंने संकल्प ले रखा है कि वह भ्रष्टाचार की इस लडाई को अंजाम तक पहुंचायेंगे क्योंकि उन्हें भी इस बात का इल्म हो चुका है कि भ्रष्टाचार राज्य के अन्दर किस कदर अपनी जडें जमा चुका है और इन जडों को चंद समय में उखाड फेंकना सीएम के लिए एक बहुत बडी चुनौती है? नौकरियों में भ्रष्टाचार का तांडव पूर्व सरकार में तो हुआ ही लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में लोकसेवा आयोग द्वारा पटवारी भर्ती में पेपर लीक ने यह साबित कर दिया कि राज्य के अन्दर कुछ सफेदपोशों और नकल माफियाओं का कितना बडा गठजोड है जिन्हें सरकार का अभी तक कोई भय नजर नहीं आ रहा है क्योंकि अगर उनमें भय होता तो लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई पटवारी भर्ती का पेपर लीक नहीं हो पाता? उत्तराखण्ड में काफी सफेदपोश और चंद अफसरों की ऐसी फौज मौजूद है जिन्होंने भ्रष्टचार से अकूत दौलत का खेल खेला और इस खेल को खेलने में उन्होंने अपने रिश्तेदारों को आगे करके उनके नामों पर भी काफी कीमती जमीनें खरीद रखी हैं लेकिन ऐसे भ्रष्ट अफसरों को बेनकाब करने के लिए विजिलेंस ने कोई बडी पहल की हो ऐसा अभी तक देखने को नहीं मिल पाया है? ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि कुछ ईमानदार अफसर बनने का ढोंग रचने वालों ने जिस तरह से भ्रष्टाचार से अकूत दौलत का किला खडा कर रखा है उनके चेहरे बेनकाब करने के लिए सरकार कब कोई बडा कदम उठायेगी यह आज भी एक बडा सवाल खडा हो रखा है? इसलिए आज भी यह बात राज्य के अन्दर ऊफान पर है कि सीएम को भ्रष्टाचार से एक बडी लडाई लडऩी है क्योंकि चंद भ्रष्टों को जेल भेजकर और कुछ नकल माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाकर उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारमुक्त नहीं हो पायेगा?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में बाइस सालों से बडे-बडे भ्रष्टाचार और घोटालों का दानवी रूप राज्य की जनता देखती आ रही है लेकिन कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जहां सरकार के काफी भ्रष्ट अफसरों ने भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला वहीं काफी सफेदपोशों ने भी भ्रष्टाचार के समुद्र में खूब गोते लगाकर अकूत दौलत कमाई थी? उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भ्रष्टाचार से लडने के बडे-बडे ढोल तो पीटे लेकिन उनके कार्यकाल में उनके कुछ करीबियों और उनके कुछ मुंह लगे अफसरों ने जिस तरह से भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलते हुए जमीनों से लेकर कई मामलों में अकूत दौलत कमाने का जो तांडव मचाया था वह किसी से छिपा नहीं था? चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके भ्रष्ट अफसरों के चेहरे से नकाब उतारने के लिए जब भी किसी ने एक कदम भी आगे बढाने का साहस दिखाया तो उस पर सिस्टम ने अपना तांडव दिखाकर उसे यह अहसास करा दिया कि अगर उनके खिलाफ किसी ने भी आवाज बुलंद करने की कोशिश की तो उसे फर्जी मुकदमों के जाल में फंसाकर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे लम्बे समय तक डाल दिया जायेगा? पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के राज में जिस तरह से कुछ पत्रकारों पर फर्जी राजद्रोह का मुकदमा कायम कर उन्हें भयभीत करने का खेल खेला गया था उसकी गूंज उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में भी सुनाई दी थी और उच्च न्यायालय में यह फर्जी राजद्रोह खारिज हो गया था जिससे साफ दिखाई दे गया था कि अगर सरकार को आईना दिखाने वाला कोई व्यक्ति या मीडियाकर्मी आगे आने की कोशिश करेगा तो उसे सिस्टम के कोप का भाजन होना पडेगा? उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छ और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने का साहस शुरू कर रखा है और उन्होंने भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों को अल्टीमेटम दे रखा है कि जिन्होंने ऐसे कृत्य किये हुये हैं उन्हें सरकार बेनकाब करेगी। कुछ भ्रष्ट अफसरों को सरकार ने जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर सबक सिखाया तो वहीं राज्य में कई सरकारी नौकरियों में फर्जी तरीके से हुई भर्तियों पर बडा प्रहार करते हुए उन्हें निरस्त किया और इन नौकरियों को बेचने वालों और नकल माफियाओं के सिंडिकेट को एक के बाद एक बेनकाब करने का बडा मिशन चला रखा है लेकिन उसके बावजूद भी मुख्यमंत्री के पास कुछ और भर्तियों में हुये खेल की शिकायतें पहुंचनी शुरू हो गई जिसके बाद उन भर्तियों की भी जांच का खुला आदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देकर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लडाई लडने का विजन साफ कर दिया है। हालांकि आज भी राज्य के अन्दर यह बहस चल रही है कि राज्य के काफी सफेदपोशों और चंद भ्रष्ट अफसरों ने कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उनका सिपहेसलार बनकर भ्रष्टाचार से खूब दौलत कमाई और ईमानदार बनने का राज्य में जमकर ढोंग किया हुआ है? ऐसे में उत्तराखण्ड के अन्दर अभी भी यह आवाज बुलंद हो रही है कि भले ही राज्य के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जंग लडने का साहस दिखा रहे हैं लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक लम्बी लडाई लडनी पडेगी तभी वह उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बना पायेंगे? अभी भी विजिलेंस उन भ्रष्ट अफसरों को बेनकाब नहीं कर पाई है जिन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार से अपने और अपने परिवारों के साथ मिलकर दौलत का काफी बडा किला खडा कर रखा है?