प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड मंे अंकिता हत्याकांड की आग आज भी सर्द हवाओं में एक बडी तपिश बनाये हुये है। अंकिता हत्याकांड में सभी गुनाहगार जेल की सलाखों के पीछे हैं लेकिन आज भी राज्य के अन्दर यही शोर मचता आ रहा है आखिर अंकिता हत्याकांड में रिजॉट के अन्दर वो कौन वीआईपी ठहरा था जिसे पुलिस बेनकाब करने के लिए आगे ही नहीं आना चाहती? इस वीआईपी के नाम पर राज्य के अन्दर खूब राजनीति हो रही है और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भी वीआईपी के नाम को उजागर करने के लिए मौन व्रत तक करने के लिए आगे आये थे। अब हत्या के मुख्य आरोपी का नार्को टेस्ट होने में मात्र कुछ दिन शेष बचे हैं जिसको लेकर राज्य के अन्दर यह बहस भी चल गई है कि क्या नार्को टेस्ट के बाद वीआईपी का जिन्न बोतल से बाहर आ पायेगा जिसको लेकर उत्तराखण्ड में एक बडा भूचाल मचा हुआ था?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में बीते वर्ष जब पौडी के एक इलाके में स्थित वंतरा रिजॉट में काम करने वाली अंकिता भण्डारी की हत्या का खुलासा हुआ था तो उसके बाद पहाड के कई जिले इस हत्याकांड को लेकर सुलग गये थे और उसके बाद एकाएक इस रिजॉट को पुलिस ने बुल्डोजर से ढाह दिया था तो उसके बाद यह आशंकायें उठी थी कि हत्यारोपियों को बचाने के लिए रिजॉट पर बुल्डोजर चलाया गया है। रिजॉट पर बुल्डोजर चलाने और वहां से साक्ष्य मिटाने को लेकर जो हल्ला मचा उससे सरकार भी असहज दिखाई दी थी और राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया था कि घटना स्थल से कोई सा़क्ष्य नहीं मिटाये गये और हत्यारोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच हवाले की थी और एसआईटी ने इस मामले में अपनी लम्बीचौडी जांच पडताल कर काफी संख्या में गवाह और साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। हत्याकांड में पुलकित आर्य और उसके चंद साथियों पर शिकंजा कसने के लिए एसआईटी ने उनका नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी जिसको लेकर यह सवाल तैर रहे थे कि क्या हत्यारोपियों का नार्को टेस्ट होगा? अंकिता भण्डारी के पिता एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं हुये तो उन्होंने उच्च न्यायालय में इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए याचिका दायर की थी जिस पर उच्च न्यायालय में लम्बी सुनवाई के बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए इंकार कर दिया गया था। सीबीआई जांच न होने की बात सामने आने के बाद एक बार फिर राज्य के अन्दर यह सवाल खडे होनेे लगे कि आखिरकार वो वीआईपी कौन है जो वंतरा रिजॉट में ठहरा हुआ था? विधानसभा में वीआईपी के नाम को लेकर जब हल्ला मचा तो सरकार ने पक्ष रखा कि वहां के कुछ कमरों को वीआईपी सूट माना जाता है और वहां ठहरने वालों को ही वीआईपी कहा जाता है और यह भी कहा था कि वहां कोई वीआईपी नहीं ठहरा था। अब न्यायालय ने पुलकित आर्य का नार्को टेस्ट कराने की अनुमति दे दी है और एक फरवरी से उसका नार्को टेस्ट होने की बात सामने आ रही है जिसको लेकर राज्य के अन्दर अब यह सवाल तैरने लगे हैं कि क्या पुलकित आर्य के नार्को टेस्ट के बाद उस कथित वीआईपी के नाम से भी पर्दे उठ सकता है जिसको लेकर उत्तराखण्ड की राजनीति में लम्बे समय से भूचाल मचा हुआ था? एक ओर जहां पुलकित आर्य के नार्को टेस्ट में चंद दिन का समय शेष रह गया है वहीं यह आशंकायें भी जन्म ले रही हैं कि अगर नार्को टेस्ट में पुलकित आर्य ने उस वीआईपी के नाम का खुलासा कर दिया जिसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर उत्तराखण्ड की वादियों में लम्बे समय से भूचाल मचा हुआ है तो फिर एक बार फिर यह मामला गर्मा सकता है?