प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पुष्कर सरकार में दायित्वों का इंतजार करने वालों को उस समय और झटका लगा जब चमोली के जोशीमठ में दैवीय आपदा आई तो सरकार के मुखिया और सारा सिस्टम वहां के निवासियों को मनाने और उन्हें दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कराने के मिशन में जुट गया जिसके चलते दायित्वों का बटवारा करने के लिए सरकार को अपने कदम पीछे खिंचने पडे। 2०24 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को उम्मीद जगी थी कि मकर सक्रांति पर सरकार उन्हें दायित्व का तोहफा देगी लेकिन जब जोशीमठ में हालात बेकाबू हुये और देश के प्रधानमंत्री तक को जोशीमठ के लिए चिंता में डूबना पडा तो उससे राज्य के भाजपाईयों को दायित्व बांटने का मिशन रोकना पडा और अब ऐसी सम्भावनायें जताई जा रही है कि शायद दायित्वों के लिए भाजपाईयों को मार्च तक का इंतजार करना पडेगा।
उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को जो धामी सरकार में समाहित होने का सपना संजोए बैठे हैं उनका मार्च तक इंतजार करना पड़ेगा। दरसल सरकार बनने के बाद जो कार्यकर्ता टिकट पाने में रह जाते हैं या जो पार्टी के संगठन में वरिष्ठ पदाधिकारी होते हैं उनको राजनीतिक दल सरकार में निगमों एवं आयोगों में दायित्व से नवाज कर उनको प्रोत्साहित करते है। ऐसे में उत्तराखंड की धामी सरकार में लंबे समय से समाहित होने की आस लगाए बैठे हैं सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता अभी मार्च तक कतार में खड़े रहेंगे। उत्तराखंड सरकार ने जब से मंत्रिमंडल विस्तार एवं कार्यकर्ताओं को दायित्व बांटने की सूची तैयार की है तभी से पूरे राज्य के अंदर विभिन्न प्रकार के घटनाक्रम हो रहे हैं जिस कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दायित्व को बांटने से रोक रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि दायित्व मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में तो जोश वा उत्साह आएगा लेकिन सड़कों पर जश्न के माहौल के कारण उत्तराखंड की आपदाओं से ग्रसित जनता के बीच में गलत संदेश जाएगा। अभी 2०23 में नगर निकाय एवं नगर पंचायत चुनाव होने हैं तथा 2०24 में लोकसभा का चुनाव, वही अभी संगठन के अंदर जिलाध्यक्ष एवं मंडल अध्यक्ष के साथ-साथ मौर्चों के जिला व मंडलों की घोषणाएं चल रही हैं। इनके जश्न की थाप तो इतनी नहीं है जितनी मंत्रियों एवं दायित्वधारियों के नगाड़ों की थाप से उत्तराखंड के घटनाक्रमों पर जख्म को कुरेद ने जैसा माहौल हो जाएगा। वर्तमान में चल रही जोशीमठ भू धंसाव राज्य सरकार के लिए बड़ा नुकसान लेकर आई है। ऐसा माना जा रहा है जोशीमठ का भू धंसाव उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालने वाला है दरसल जोशीमठ से ही बद्रीनाथ एवं केदारनाथ की यात्रा पर श्रद्धालु जातें है। ऐसे में पूरे देश में माहोल यह बना हुआ है की पूरे उत्तराखंड में माहोल खराब है और जगह जगह भू धंसाव हो रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार यूं तो उत्तराखंड के छे हजार से ज्यादा छोटे – बड़े भू धंसाव हो रहे है। लेकिन जोशीमठ की घटना बड़ी घटना है जिसके कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी चिंतित है इस कर वो भी अभी दायित्व बांटने के पक्ष में नहीं है। माना जा रहा है की यात्रा पर इसका प्रभाव न पड़े इसलिए मार्च तक स्तिथियां सामान्य होने के बाद ही कुछ और सोचा जायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार केंद्र को भी इस घटनाक्रम की जानकारी साझा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री यह नही चाहते की अतिउत्साह में ऐसा कोई भी कार्य न हो जिसके कारण जनता भी भाजपा का ग्राफ गिरे। मुख्यमंत्री इस आपदा को जल्द निपटा कर यात्रा सुचारू करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे है। वो जानते है यहां देशभर से श्रद्धालु आते है उन्ही के माध्यम से सरकार के सही कार्यों का संदेश जाएगा। इसलिए धामी सरकार ने कार्यकर्ताओं की खुशियों को दरकिनार का राज्य हित पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया जिसके कारण मुख्यमंत्री की वाहवाही भी हो रही है।