राजधानी पुलिस का ‘सट्टेबाजी प्रेम बेनकाबÓ

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी में क्रिकेट और मटका सट्टेबाजों ने जिस तरह से कुछ व्यापारियों और युवा पीढी को सट्टे के चस्के की चाश्नी में डूबोकर उन्हें रातो-रात अमीर बनाने का जो ख्वाब दिखाया है वह सट्टा खेलने वालों के लिए अब नासूर बनता जा रहा है। राजधानी पुलिस का सट्टेबाजों पर खामोश रहना उस पर सवालिया निशान लगा रहा है लेकिन एसटीएफ ने जिस तरह से क्रिकेट के एक बडे सट्टेबाज को दबोचा तो खुलासा हुआ कि वह कपडा व्यापारी है। सट्टेबाज व्यापारी के मोबाइल फोन में लाखों रूपये का हिसाब सामने आने पर यह साफ दिखाई दे रहा है कि अब ‘याईम स्टोरीÓ की सट्टेबाजों के खिलाफ शुरू हुई मुहिम रंग लाने लगी है और इस व्यापारी की गिरफ्तारी से राजधानी पुलिस का सट्टाबाजी प्रेम भी बेनकाब हो गया है? हैरानी वाली बात है कि सट्टेबाजी में मौके पर ही जमानत देना कई सवालों को जन्म दे गया? क्योंकि अगर उससे पूछताछ का दौर चलता तो उन सभी क्रिकेट सट्टेबाजों के चेहरे सामने आ जाते जो राजधानी पुलिस के कुछ दरोगाओं व पुलिसकर्मियों से गठबंधन कर अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं?
राजधानी पुलिस के पास सट्टेबाजों का काफी लेखाजोखा होने के बाद भी उनकी सट्टेबाजों के खिलाफ कार्यवाही न किया जाना कहीं न कहीं राज्य पुलिस मुखिया के सपनों पर ग्रहण लगाने जैसा नजर आ रहा है? राजधानी पुलिस तो क्रिकेट व मटका सट्टेबाजों पर इस तरह से खामोश हो गई है कि मानो राजधानी में सट्टेबाजी कोई अपराध नहीं है? ‘याईम स्टोरीÓ ने सट्टेबाजों के नेटवर्क को भेदने के लिए अपना मिशन चला रखा है और इस बात का भी खुलासा किया है कि इस धंधे में सफेदपोश भी किस तरह से आगे आ रखे हैं। राजधानी पुलिस ने भले ही सट्टेबाजों पर चुप्पी साध रखी हो लेकिन एसटीएफ ने सट्टेबाज पंकज कुकरेजा जो कि कपडा व्यापारी है को मोबाइल समेत गिरफ्तार किया तो उसके मोबाइल में लोगों को लाखों रूपये भेजने का हिसाब सामने आने पर यह बात स्पष्ट हो गई कि राजधानी पुलिस सट्टेबाजों से कितना मोह बनाये हुये है।

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