बेशर्म सट्टेबाजों ने अब महिलाओं को बनाया ढाल!

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पैसे का लेनदेन दो महिलाओं के ‘जिम्मे’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी में पुलिस का इकबाल सट्टेबाजों के सामने तो धडाम हो चुका है और तो और जो खाकीधारी और सट्टेबाज गुप्त गठबंधन करके हाथ मिलाये हुये हैं उन पर भी अगर पुलिस के चंद अफसर कार्यवाही करने का साहस नहीं दिखा पा रहे तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि या तो सट्टेबाजांे का भौकाल इतना विशाल है कि उनके आगे पुलिस के चंद अफसर खामोशी साधे हुये हैं या फिर उनके साथ पर्दे के पीछे से गठबंधन करने वाले कुछ दरोगाओं और पुलिसकर्मियांे का रूतबा इतना बडा हो चुका है कि उन्हें महत्वपूर्ण स्थानों से हटाने का पुलिस के साहब हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं? सट्टेबाजों का साम्राज्य इतना बडा बन गया है कि वह आये दिन क्रिकेट, मटके के सट्टे से अकूत दौलत कमाने का खेल खेल रहे हैं और कुछ बडे सट्टाकिंग इतने बेशर्म हो गये कि उन्होंने अपने आपको सेफ जोन मंे रखने के लिए अब महिलाओं को अपनी ढाल बना लिया है और चर्चा है कि दो महिलाओं को सट्टे के लेनदेन का सारा जिम्मा सौंप दिया है जो अपने ठिकानों पर बैठती हैं और सट्टेबाज के इशारे पर सट्टा खेलने वाले इन महिलाओं के ठिकानों पर जाकर सट्टा खेलने और जीत के बाद पैसे का लेनदेन महिलाओं के साथ कर रहे हैं? राजधानी के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब सट्टेबाजों ने अपने धंधे के पैसों को सुरक्षित रखने के लिए उनका हिसाब-किताब दो महिलाओं को अलग-अलग इलाकों में सौंपा है जिसके बारे में किसी खाकीधारी को भनक नहीं लग सकती क्योंकि सट्टेबाजों का फोन जब ढाल बनी महिलाओं के पास जाता है तभी सट्टा खेलने और जीतने वाले के साथ पैसे का लेनदेन हो रहा है जो किसी अजूबे जैसा ही नजर आ रहा है? पुलिस के कुछ दरोगा भले ही क्रिकेट और मटके के सट्टेबाजों पर नकेल लगाने के लिए आगे आना नहीं चाहते वह सडक पर ठेली लगाने वालों को जरूर अपनी वर्दी का रूतबा दिखाते हुए नजर आते हैं जिनके सामने गरीब ठेली वाला हाथ जोडकर अपनी ठेली छुडवाने की दुहाई देता है लेकिन पुलिस के कुछ दरोगा नियमों की रटी-रटाई भाषा से ठेली वाले को गेट आउट करने का हुकम दे रहे हैं?
उल्लेखनीय है कि ‘क्राईम स्टोरी’ ने कैंसर की तरह फेल रहे सट्टे के काले कारोबार को नेस्तनाबूत कराने का संकल्प ले रखा है क्योंकि राजधानी में जिस तरह से क्रिकेट और मटका सट्टा खेलकर जल्द दौलतमंद बनने की चाहत रखने वाले कुछ व्यापारियों और युवा पीढी के अन्दर एक बडा चस्का लगा हुआ है उसे देखकर साफ नजर आ रहा है कि सट्टे के धंधेबाजों ने कुछ व्यापारियों और युवा पीढी को किस तरह से सट्टा खिलाने के मकडजाल मंे फंसा रखा है और तो और इन सट्टेबाजों पर पुलिस की रहस्यमय चुप्पी कई सवालों को जन्म देने लगी है? राजधानी के अन्दर दर्जनों सफेदपोश, एक पत्रकार और सट्टेबाजों का बडा सिंडिकेट आये दिन क्रिकेट का सट्टा अज्ञात स्थानों से खिलाकर खूब दौलत कमा रहा है और एक बडा सट्टाकिंग मटके सट्टे का भी बादशाह बना हुआ है जिसके बारे में पुलिस के कुछ अफसरों और कुछ दरोगाओं को सब इल्म है लेकिन उन पर शिकंजा कसने के लिए वह अपने कदम आगे नहीं बढाते? सट्टेबाजों को पुलिस के ऑपरेशन की जानकारी पहले से ही लीक करने के मामले में कुछ दरोगा व पुलिसकमियों के चेहरे जगजाहिर हैं लेकिन इन चेहरों से कुछ दरोगाओं और पुलिसकर्मियांे को इतना स्नेह है कि वह उनके साथ खुलकर अपनी दरियादिली दिखाकर उन्हें पुलिस के भय से बचाने का खेल खेल रहे हैं? चर्चा है कि शहर के कुछ बडे सट्टेबाजों को इस बात का आभास है कि राजधानी के पुलिस कप्तान दलीप कुंवर गुनाहगारों पर नकेल लगाने के लिए रणनीति बनाये हुये हैं और उनकी इस रणनीति से उनके सट्टे के कारोबार पर भी बडा प्रहार हो सकता है यही कारण है कि एक दो दरोगाओं ने पुलिस कप्तान के रूख को भांपते हुए कुछ सट्टेबाजों को क्रिकेट का सट्टा बाहरी राज्यों में खिलाने का पाठ पढाया था और इसी पाठ को पढते हुए एक बार सट्टेबाजों का सिंडिकेट कलकत्ता से क्रिकेट मैंचों पर सट्टा खिलाता रहा और कुछ समय पूर्व उन्होंने मुम्बई के कुछ होटलों में पनाह लेकर वहां से क्रिकेट का सट्टा खिलाया? चर्चा है कि अब इन सट्टेबाजों को कुछ पुलिसकर्मियों ने ज्ञान दिया है कि वह सट्टे का लेनदेन खुद नहीं करें बल्कि कुछ महिलाओं को ही लेनदेन का जिम्मा सौंपे और वह जब अपनी इन महिलाओं को किसी से पैसे लेने और किसी को पैसे देने के लिए कहें तभी उस व्यक्ति को महिलाओं के ठिकाने पर भेजा जाये जहां वह चुपचाप आकर अपने पैसे के लेनेदने का सारा खेल खेल सकें? बेशर्म हो चुके सट्टाकिंगों ने जिस तरह से कुछ महिलाओं को पैसे के लेनदेन के लिए अपनी ढाल बनाया है उनका नेटवर्क कैसे पुलिस, एसओजी, एसटीएफ तोडेगी यह देखने वाली बात है?

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