सट्टेबाजों का करोडो न देने पर व्यापारी ने चुनी थी ‘मौत’

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सट्टेबाजों ने व्यापारी से पैसे मांगने का बना रखा था दबाव
कब तक सट्टेबाजों के आतंक से मरते रहेंगे लोग?
कप्तान को धोखा दे रहे चंद कोतवाल-थानेदार!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी के पुलिस कप्तान अपराधियों और क्रिकेट सट्टेबाजांे के खिलाफ एक बडी जंग लडने का लम्बे समय से मन बनाते आ रहे हैं लेकिन चंद कोतवाल और थानेदारों की सट्टेबाजों के सिंडिकेट से चल रहे गठबंधन के चलते पुलिस कप्तान का ऑपरेशन सट्टेबाज परवान नहीं चढ़ पा रहा है जिसको लेकर कहीं न कहीं पुलिस कप्तान भी अपने कुछ वर्दीधारियों से नाराज दिखाई दे रहे हैं। चंद दिन पूर्व एक व्यापारी ने खुद को गोली मारकर मौत चुन ली थी जिसके बाद यह कहानी बयां की गई कि व्यापारी पर करोडो का कर्ज था जिसके चलते उसने आत्महत्या की लेकिन दूसरी ओर काफी लोगों का कहना था कि भारत के हाल ही में हुये मैच में व्यापारी लगभग दो ढाई करोड रूपये सट्टा बुकियों से हार गया था? चर्चा है कि सट्टा बुकी व्यापारी से पैसा मांगने के लिए उस पर दबाव बनाये हुये थे और जब वह सट्टेबाजों का कर्ज नहीं चुका पाया तो उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली? अब सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार राजधानी में कब तक सट्टेबाजों के आतंक से लोग इसी तरह मरते रहेंगे? कुछ वर्ष पूर्व प्रेमनगर में भी दो व्यापारी क्रिकेट का सट्टा खेलते हुए अपने ऊपर कई करोड का कर्ज कर बैठे थे जिसके बाद उनसे सट्टा किंगों ने पैसा वसूलने के लिए जब दबाव बनाया तो एक व्यापारी ने तो अपना नया मकान बेचकर सट्टे का कर्ज चुकाया वहीं एक व्यापारी सट्टेबाजों के डर से लगभग ढाई तीन साल किसी राज्य में एक आश्रम में गुमनाम तरीके से रहता रहा ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस सिर्फ छुटभैयों को ही पकडकर इतराती रहेगी या फिर पुलिस कप्तान के विजन को धरातल पर उतारने के लिए वह सट्टेबाजों के खिलाफ एक बडा ऑपरेशन करने का साहस दिखायेगी?
उल्लेखनीय है कि राजधानी में लगभग दो दर्जन से अधिक क्रिकेट सट्टेबाजों का गैंग सक्रिय है और यह गैंग पुलिस के कुछ लोगों के साथ एक बडा गठबंधन किये हुये है जिसके चलते वह अपने इस गोरखधंधे को बिना डर के अंजाम देने के मिशन में लगेे हुये हैं। हैरानी वाली बात है कि अगर कोई कोतवाल सट्टेबाजों की चौपाल लगाकर उनके निजी मामलों को सुलझाने में दिलचस्पी लेता हो तो उससे समझा जा सकता है कि वह सट्टेबाजों को कितना बडा संरक्षण दे रहा होगा? बतादें कि चंद दिन पूर्व कैंट ईदगाह निवासी प्रवीण गिरोटी ने तीन दिन पूर्व अपने घर में अपनी लाईसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। व्यापारी की मौत के बाद यह कहा गया कि उस पर लगभग दो ढाई करोड रूपये का कर्ज था जिसके चलते उसने आत्महत्या की है। वहीं शहर में इस बात को लेकर खुली चर्चा है कि व्यापारी जो कि शहर में हार्डवेयर की दुकान चलाता था वह चंद दिन पूर्व भारत के मैच में लगभग दो ढाई करोड रूपये सट्टा खेलते हुए हार गया था? चर्चाएं हैं कि सट्टेबाजों का सिंडिकेट व्यापारी से सट्टे के पैसे मांगने के लिए उस पर दबाव बनाये हुये थे जिसके चलते वह उनका कर्ज नहीं लौटा पा रहा था और इन्हीं सट्टेबाजों के आतंक के चलते उसने मौत को गले लगा लिया? अब सवाल यह है कि राजधानी के पुलिस कप्तान मृतक व्यापारी के मोबाइल नम्बर की सीडीआर निकाले तो उन्हें इस बात का इल्म हो जायेगा कि उसमें कौन-कौन से वो नम्बर बार-बार आये थे जिन पर व्यापारी से बात हुई थी? व्यापारी की मौत को कोई भी कर्ज की मौत नहीं मान रहा बल्कि सट्टेबाजों के आतंक से हुई उसकी मौत ने राजधानी में एक बार फिर सवाल खडा कर दिया है कि आखिकार कब तक सट्टेबाजों के कर्ज के बोझ तले लोग आत्महत्या और घर से लम्बे समय तक भागने के लिए मजबूर होते रहेंगे? बतादें कि कुछ वर्ष पूर्व प्रेमनगर में दो व्यापारियों को भी क्रिकेट का सट्टा खेलने का चस्का लगा था जिनमें से एक व्यापारी के पुुत्र पर अम्बाला के क्रिकेट सटोरियों का लगभग तीन से चार करोड रूपये कर्ज हुआ था और उन्हांेने जब व्यापारी के पुत्र को अपने बाहुबली होने का आतंक दिखाया था तो व्यापारी ने अपना नया मकान बेचकर क्रिकेट सट्टेबाजों को पैसा लौटाया था। वहीं कमेटियों के काम करने वाले एक व्यापारी को भी क्रिकेट खेलने का इतना बडा चस्का लगा था कि उस पर भी लगभग दो तीन करोड रूपये का कर्ज हो गया था और उससे जब क्रिकेट सटोरियों ने पैसा मंागने के लिए दबाव बनाया था तो वह शिरडी में साई बाबा के दर्शन करने के लिए घर से निकला और वह वर्षों तक नेपाल से लेकर दूसरे राज्य मंे गुमनाम जीवन जीता रहा। ऐसे में अब पुलिस कप्तान को ऐसे क्रिकेट सट्टेबाजों का नेटवर्क नेस्तानबूत करने के लिए आगे आना चाहिए जिनकी वजह से कोई व्यापारी मौत चुन रहा है तो कोई वर्षों तक अपने परिवार को छोडकर दूसरे राज्यों मंे शरण लेता रहा है?

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