आलाकमान के पास पहुंचा धामी के खिलाफ साजिश का संदेश?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने प्रदेश से भ्रष्टाचार, घोटालेबाजों और माफियाओं को खदेडने का जबसे ऑपरेशन चला रखा है उससे भाजपा के ही कुछ नेता बेचैन नजर आ रहे हैं और उनमें इस बात को लेकर कहीं न कहीं डर बना हुआ है कि कहीं इस ऑपरेशन की आंच उनके गिरेबां तक न पहुंच जाये? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पदभार संभालने के बाद से ही संगठन को साथ लेकर चल रहे हैं और वह राज्य को एक नई दिशा में ले जाने के लिए जिस तरह से आगे बढे हुये हैं उससे राज्य के मुख्यमंत्री आवाम की नजरों में भले ही महानायक बन चुके हों लेकिन पिछले कुछ दिनों से सरकार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपनी ही सरकार को जिस तरह से अपनी बयानबाजी से कटघरे में खडा करने का काम किया है उससे राज्य के अन्दर एकाएक नई हलचल मच गई है और यह बहस शुरू हो गई है कि जहां भाजपा हाईकमान को गुजरात व दिल्ली में होने वाले एमसीडी चुनाव में भाजपा को प्रथम स्थान पर लाने की जिम्मेदारी है वहीं उत्तराखण्ड में आखिर वो कौन सा साजिशकर्ता है जो सरकार को कहीं न कहीं अस्थिर करने के लिए पर्दे के पीछे से गेम प्लान कर रहा है? अब चर्चा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्ली का रूख किया और उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी से भेटकर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बयानों से उपजे सियासी हालातों से रूबरू कराया।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ लगातार अपने ही बयान बाजी कर रहे हैं कभी त्रिवेंद्र सिंह रावत तो कभी तीरथ सिंह रावत आखिरकार यह दोनों बड़े नेता इस तरह के बयान क्यों दे रहे हैं इसको लेकर राज्य में तरह-तरह के सवाल हवा में घूम रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का तो यह तक कहना है कि यह बयान बाजी धामी सरकार को अस्थिर करने के लिए की जा रही है और हो सकता है इस सब के पीछे कोई और ही काम कर रहा हो? अगर ऐसा नहीं है तो भला कौन राजनेता और वह भी पूर्व मुख्यमंत्री रहे हो वह इस तरह से सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएं ऐसा हो ही नहीं सकता? सवाल तो यह भी खड़े हो रहे हैं कि क्या आलाकमान इन सब बयानों से अनभिज्ञ है या फिर वह भी सब कुछ जानता है उत्तराखंड प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट इन सभी चर्चाओं को करने के लिए दिल्ली रवाना हुए हैं? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब त्रिवेन्द्र रावत के बाद सत्ता सौंपी गई थी तो उसी के बाद से ही भाजपा के ही कुछ नेताओं के निशाने पर वह रहे थे भले ही मुख्यमंत्री पर किसी राजनेता ने सामने से राजनीतिक प्रहार न किया हो लेकिन उन्हें वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन देखने में विश्वास नहीं रख रहे थे? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी विधानसभा चुनाव में उसी तरह से भीतरघात हुआ था जैसे पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चद्र खण्डूरी के कार्यकाल में विधानसभा चुनाव में उनके साथ हुआ था क्योंकि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा को सत्ता के द्वार के नजदीक तो पहुंचा दिया था लेकिन वह कोटद्वार से चुनाव हार गये थे। अब राज्य में जब विधानसभा चुनाव हुये और राज्य के अन्दर भाजपा सरकार को लेकर आवाम में चाहे चार साल से कितनी बडी नाराजगी क्यों न रही हो लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री ने आवाम का दिल जीतकर भाजपा की सरकार बनवा दी लेकिन भाजपा के ही कुछ अपनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा विधानसभा चुनाव में हरवाकर यह सपना संजोया था कि अब भाजपा हाईकमान राज्य में किसी और विधायक को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप देंगे लेकिन ऐसा सपना देखने वालों को भाजपा हाईकमान ने उस समय बडा झटका दिया जब उन्होंने राज्य में बनी भाजपा सरकार का सेहरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सिर पर बांधकर उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री बनाया और उसके बाद उन्होंने चम्पावत में हुये उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सबको हैरान कर दिया था। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जबसे भ्रष्टाचार और माफियागिरी के खिलाफ अपना विजन साफ किया है तबसे भाजपा के ही कुछ राजनेताओं में एक बडी हलचल और बेचैनी देखने को मिल रही है क्योंकि उन्होंने साफ संदेश दे रखा है कि वह राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त राज्य बनाने के लिए एक बडे संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। अचम्भे वाली बात है कि भाजपा हाईकमान जहां राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अभेद विश्वास कर उन्हें देश में हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रचार-प्रसार का जिम्मा सौंप रहे हैं वहीं भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों तीरथ सिंह रावत और त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जिस तरह से गुजरात और दिल्ली में होने वाले चुनाव से पहले अपनी ही सरकार को कटघरे में खडे करने का जो काम किया है वह भाजपा हाईकमान के लिए भी एक चिंता का विषय होना चाहिए? उत्तराखण्ड सरकार और संगठन एक नाव में सवार होकर राज्य को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में आगे बढ रहे हैं वहीं कहीं न कहीं सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा के ही चंद नेता जिस तरह से बयानबाजी करने को आगे आये उसका संदेश लेकर चर्चा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम से मिले जहां उन्होंने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा दिये गये बयानों को लेकर अपनी बात रखी और चर्चा है कि उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों के बजाये पार्टी फोरम पर अपनी बात रखनी चाहिए। अब देखने वाली बात होगी कि भाजपा के दिग्गज नेता के पास पहुंची इस शिकायत पर बयानवीर बने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों पर अब भाजपा हाईकमान क्या रूख अपनायेगी?

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