प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया था कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में हर बीमारी का बेहतर ईलाज किया जायेगा लेकिन हैरानी वाली बात है कि राजधानी में पिछले लम्बे समय से चिकन गुनिया और डेंगू का प्रकोप चप्पे-चप्पे पर बना हुआ है और इस घातक बीमारी से आवाम को खुद ही लडना पड रहा है जबकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इन दोनों बीमारियों से आवाम को निजात दिलाने के लिए क्यों आगे नहीं आ रहे हैं यह हैरान करने वाली बात है? प्राईवेट अस्पतालों में इन दोनो घातक बीमारियों का ईलाज कराने में आवाम को महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड रहा है उससे राज्य का स्वास्थ्य महकमा और स्वास्थ्य मंत्री आवाम के निशाने पर आ रखे हैं लेकिन उसके बावजूद भी इन दोनो घातक बीमारियों का आवाम को मुफ्त इलाज कराने की दिशा में स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है?
उल्लेखनीय है कि हर साल राजधानी के अन्दर डेंगू का प्रकोप देखा जाता है और इस प्रकोप का सामना आवाम को करना पडता है लेकिन इसका बेहतर ईलाज करने की दिशा में राज्य के स्वास्थ्य महकमें ने कोई बडा प्लान आज तक तैयार किया हो ऐसा देखने में नहीं आया? अब राजधानी में पिछले कुछ समय से चप्पे-चप्पे पर चिकन गुनिया और डेंगू का प्रकोप त्राहिमाम मचाये हुये है और चिकन गुनिया की चपेट में राज्य के कृषि मंत्री गणेश जोशी भी आये थे जिन्हें कई दिनों तक इस बीमारी से ठीक होने के लिए ईलाज कराना पडा था। राजधानी के अगर सभी प्राईवेट अस्पतालों का दृश्य देखा जाये तो उससे साफ झलक जायेगा कि किस तरह से जनपद में चिकन गुनिया और डेंगू का प्रकोप विकराल रूप लिये हुये है। आवाम को सरकार के सरकारी अस्पतालों पर आज भी क्यों विश्वास नहीं हो रहा कि वह अपना ईलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल के बजाए प्राईवेट अस्पतालों में अपना महंगा ईलाज कराने को मजबूर हो रखे हैं? एक गरीब इंसान को जिस तरह से प्राईवेट अस्पतालों में चंद दिनों के ईलाज के लिए साठ से सत्तर हजार रूपये खर्च करने पड रहे हैं वह स्वास्थ्य मंत्री को शायद दिखाई नहीं दे रहे हैं? ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर राज्य का स्वास्थ्य महकमा कब चिकन गुनिया और डेंगू जैसी घातक बीमारी से आवाम को निजात दिलाने के लिए आगे आयेगा?