प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक निर्दलीय विधायक ने न तो सत्ता का दामन थामा और न ही विपक्ष का। खानपुर से निर्दलीय विधायक ने अपने अब तक के कार्यकाल में जिस अंदाज के साथ सरकार को अपने तेवर दिखाये हैं उससे उनके विपक्षियों की नींद उडी हुई है तो वहीं अपने दम पर विधायक राज्य से भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के खिलाफ बडी दहाड़ लगा रहे हैं। स्थापना दिवस पर भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ राजद्रोही रहे खानपुर विधायक ने नारसन बार्डर से लंढौरा तक रैली निकाली उस रैली मंे जिस तरह से आवाम का जनसैलाब उमडा उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि यह रैली है या जलजला। खानपुर विधायक ने चंद समय पूर्व सरकार को ललकारा था कि अगर उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार की पत्नी की कम्पनी पर मनी लॉडरिंग की जांच सीबीआई या ईडी को न दी तो वह सदन से लेकर सडक तक आंदोलन का बिगुल बजायेंगे और उच्च न्यायालय में भी जांच को लेकर याचिका दाखिल करेंगे। दो बार राजद्रोही का दंश झेलने वाले खानपुर विधायक ने निर्दलीय होकर जिस तरह से भ्रष्टाचार को लेकर आपार भीड से सरकार को ललकारा है उससे सरकार को यह सोचने पर जरूर मजबूर होना पडेगा कि भ्रष्टाचार से लडाई लडने का पैमाना एक ही होगा और अगर इस लडाई में दो पैमाने रहे तो यह सरकार के लिए सिरदर्द बन जायेगा?
उल्लेखनीय है कि खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने कुछ समय पूर्व ऐलान किया था कि उत्तराखण्ड स्थापना दिवस पर वह राज्य में भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ जनसमर्थन रैली निकालेंगे। उमेश कुमार की जनसमर्थन रैली को लेकर विपक्ष भी असमंजस में दिखाई दे रहा था कि विधायक की रैली में क्या भीड उमडेगी या फिर यह रैली टॉय-टॉय फिस्स हो जायेगी? दो बार राजद्रोह का दंश झेलने वाले उमेश कुमार ने अपनी रैली को लेकर बडी तैयारी कर रखी थी। आज राज्य स्थापना दिवस पर खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने सुबह अपनी रैली का आगाज नारसन बॉर्डर से शुरू किया तो उसमें सैकडों ट्रैक्टर, कार, मोटर साइकिल और काफी वाहनों के साथ लोग उमड पडे। नारसन बॉर्डर से शुरू हुई भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ रैली में एक बडा जलजला देखने को मिला जिससे विपक्षी नेताओं में जरूर खलबली मच गई होगी। विधायक उमेश कुमार ने कहा कि वह निर्दलीय विधायक हैं और निर्दलीय विधायक ही रहेंगे क्योंकि उन्होंने खानपुर की जनता से वायदा किया था कि वह विकास की राजनीति करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लडाई हमेशा पहले की तरह ही रहेगी। उमेश कुमार ने रैली में दहाडते हुए कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने का दावा कर रही है लेकिन जीरो गायब हो गई है और सिर्फ टोल ही दिखाई दे रहा है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उत्तराखण्ड में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक निर्दलीय विधायक ने किसी भी राजनीतिक दल की ओर अपने कदम आगे नहीं बढाये और अपने दम पर ही उन्हांेने भ्रष्टाचार के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा रखा है इससे उन राजनेताओं में जरूर खलबली मचेगी जो अपने आपको राजनीतिक दल में रखकर भ्रष्टाचार और घोटाले करने का भी खेल खेलते रहे हैं? राजद्रोही की आज की भ्रष्टाचार के खिलाफ यह रैली उन राजनेताओं में खलबली मचा गई जो अपनी पॉवर के बल पर कुछ भी कर गुजरने का दम रखते हैं?