वाह हुजूर वाहः गाडी का गुनाह और कोतवाल को सजा
कोतवाल की गाडी की लाईटें बंद होना सीएम की फ्लीट में चूक कैसे?
चौराहे पर लाईट न होने पर किसी अफसर पर गिरेगी ‘गाज’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के पुलिस महकमें का आधुनिकीकरण करने के लिए पुलिस मुख्यालय में बैठे चंद अफसर बडे-बडे दावे तो करते आ रहे हैं लेकिन हैरानी वाली बात है कि जिन कोतवालों,थानेदारों को अपराधियों पर नकेल लगाने का जिम्मा दिया हुआ है क्या उनमें से सभी प्रभारियों की गाडियां उन बडे अफसरों जैसी हैं जो सडकों पर सरपट दौडती हैं? राजधानी में ही कुछ कोतवालों और थानेदारों के पास अगर खटारा गाडियां मौजूद हैं तो उनसेेे वह अपराधियों से कैसे लोहा ले रहे होंगे यह तो उन्हें ही पता होगा लेकिन नेहरू कालोनी कोतवाल का दो दिन पूर्व सिर्फ इतना कसूर जरूर था कि वह जब राज्य के मुख्यमंत्री को फ्लीट करके ले जा रहे थे तो अचानक उनकी गाडी की दोनो लाईटें बंद हो गई और वहां अंधेरा होने के कारण फ्लीट सही दिशा में नहीं जा पाई जिसके चलते गाडी का गुनाह और कोतवाल को निलम्बन की सजा देने पर पुलिस के काफी दरोगाओं में पुलिस कप्तान के इस आदेश को लेकर अन्दरखाने नाराजगी पनप रही है लेकिन अनुशासित पुलिस फोर्स होने के कारण वह अपने गुस्से का इजहार भी नहीं कर सकते? ऐसे में मुख्यमंत्री को बडा दिल करके राजधानी में दबंग और स्वच्छ छवि के माने जाने वाले कोतवाल को फिर बहाल कराने का आदेश देना चाहिए था क्योंकि कोतवाल की गाडी की लाईटें बंद होना मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक नहीं माना जा सकता? अगर लाईटें बंद होने से फ्लीट गलत दिशा में जाने की सजा अगर कोतवाल को मिल सकती है तो फिर बिजली विभाग के उस बडे अफसर को भी सजा मिलनी चाहिए जहां बिजली न होने के कारण अंधकार में सीएम की फ्लीट गलत दिशा में चली गई थी?
उत्तराखण्ड की राजधानी में इगास पर्व पर जहां समूचे राज्य में खुशियां मनाई जा रही थी और सरकार के मुखिया ने अपने आवास से लेकर कई कार्यक्रमों में इगास पर्व को धूमधाम से मनाकर राज्यवासियों को इसकी बधाई दी वहीं गाडी का गुनाह नेहरू कालोनी कोतवाल को सजा का सेहरा पहना गया और राजधानी के बडे साहब ने कोतवाल को सीएम की फ्लीट में चूक का गुनाहगार मानकर उन्हें निलम्बित कर दिया। कोतवाल को निलम्बित किये जाने का सच जब ‘क्राईम स्टोरी’ ने पता किया तो यह बात सामने आई कि जब नेहरू कालोनी कोतवाल मुकेश त्यागी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फ्लीट कर रहे थे तो यूनिवर्सिटी से कुछ दूरी पहले अचानक कोतवाल की गाडी की दोनो लाईटें बंद हो गई और यह लाईंटे वहां बंद हुई जहां बिजली विभाग ने उजाले का कोई पैमाना ही नहीं बना रखा था। कोतवाल की गाडी की लाईंटे बंद होने के कारण मुख्यमंत्री की फ्लीट गलत दिशा में पहुंच गई और राजधानी के बडे साहब ने कोतवाल को मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक का आनन-फानन में ही गुनाहगार मानकर उन्हें निलम्बित कर दिया। बडे साहब की इस कार्यवाही को लेकर काफी दरोगाओं और उन लोगों में एक बडी नाराजगी देखने को मिली जो मुकेश त्यागी को बहुत नजदीक से पहचानते हैं। व्यवहार कुशल और अपनी पुलिसिंग में नम्बर वन अंक पाने वाले मुकेश त्यागी को जिस तरह से निलम्बित किया गया वह सीधेतौर पर पुलिस के मनोबल को तोडने जैसा ही नजर आ रहा है? आवाम के मन में एक बडा गुस्सा है कि बडे साहब ने तो कोतवाल को मुख्यमंत्री की फ्लीट में हुई चूक का गुनाहगार मानकर उन्हें निलम्बित कर दिया लेकिन क्या राज्य के मुखिया बिजली विभाग के उस बडे अफसर को भी सजा देंगे जिसके कारण चौराहे पर अंधकार मचा था और उसी से मुख्यमंत्री की फ्लीट की दिशा गलत राह पर निकल आई थी? मुकेश त्यागी की पुलिसिंग राजधानी मंे दबंग और स्वच्छता के रूप में जानी जाती है और उन पर आज तक कोई दाग लगा हो ऐसा दिखाई भी नहीं दिया ऐसे में गाडी के गुनाह की सजा एक कोतवाल को देना सिस्टम पर भी सवालिया निशान लगा रहा है और यह बात अब उफान पर है कि अगर कोतवाल की गाडी खटारा टाईप की न होती तो न उसकी लाईटें बंद होती और न ही मुख्यमंत्री की फ्लीट को गलत दिशा में जाना पडता? राजधानी में ही अगर कुछ थानेदारों व कोतवालों के पास खटारा टाईप की गाडियां मौजूद हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपराधियों का ऐसी खटारा गाडियों से कैसे पीछा करते होंगे?