आवाम के सामने सच न आये इसलिए फर्जी मुकदमें करवाते थे त्रिवेन्द्र?

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भ्रष्टाचार उजागर होने पर कराया था ‘फर्जी राजद्रोह’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास मंे पहली बार ऐसा देखने को मिला जब भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सत्ता चलाने का ढोल पीटने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के करीबियों पर जब भ्रष्टाचार और घोटालों के खुलकर आरोप लगने लगे और उनके चेहरे स्टिंग में भी कैद हुये तो आवाम के सामने सच बाहर न आ पाये इसलिए त्रिवेन्द्र सिंह रावत पत्रकारों और सोशल मीडिया पर लिखने वाले कुछ लोगों पर सत्ता की हनक दिखाते हुए फर्जी मुकदमें कायम कराते थे? उत्तराखण्ड के बाइस सालों में पहला ऐसा मुख्यमंत्री देखने को मिला था जिसने अपने भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर कुछ पत्रकारांे के खिलाफ फर्जी राजद्रोह का मुकदमा कायम कराया था और अब जिस तरह से डबल इंजन की सरकार मंे भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों पर शिकंजा कसा जा रहा है तो उसमें कई भ्रष्टाचारी ऐसे निकल कर सामने आ रहे हैं जिनका पूर्व मुख्यमंत्री से नजदीकी थी? त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पूर्व औद्योगिक सलाहकार की पत्नी की कम्पनी पर दो सौ करोड रूपये की मनी लॉडरिंग को लेकर अपराध शाखा को शासन ने जिस तरह से जांच के आदेश दिये हैं उससे पूर्व मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सत्ता चलाने का सच राज्य की जनता के सामने अब आना शुरू हो गया है?
उत्तराखण्ड में चार साल तक सत्ता चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ंिसह रावत ने सत्ता संभालने के बाद मंच से ऐलान किया था कि वह भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलायेंगे लेकिन उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले कुछ मीडियाकर्मियों पर जिस तरह से त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने फर्जी मुकदमें कायम कराये थे उसकेा लेकर राज्य के अन्दर खूब भूचाल मचा था? जैसा कि डबल इंजन सरकार में देखने में आ रहा है कि अभी तक जितने भी पूर्व सरकारों के भ्रष्टाचार का खुलासा हो रहा है उसमें से अधिकतर जीरो टॉलरेंस का ढोल पीटने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यकाल का ही नजर आ रहा है? पूर्व मुख्यमंत्री के नजदीकी लोगों का जिस तरह से भ्रष्टाचार व मनी लॉडरिंग में नाम सामने आया है उससे अब राज्य के अन्दर एक बहस छिडनी शुरू हो गई है कि क्या आवाम के सामने भ्रष्टाचार का सच सामने न आ सके इसलिए त्रिवेन्द्र सिंह रावत कुछ पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा कायम कराने के लिए आगे आये थे? देखा जाये तो त्रिवेन्द्र ंिसह रावत का भ्रष्टाचार से चोली दामन का साथ रहा है? कृषि मंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल में हुआ ढैंचा बीज का मामला हो या यूकेएसएसएससी का मामला रहा उनमें त्रिवेन्द्र रावत के नजदीकी आरबीएस रावत और हाकम सिंह का नाम सामने आने से यह बात शीशे की तरह साफ हो रही है कि त्रिवेन्द्र रावत के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का खेल कितनी चालाकी के साथ खेला जाता था कि किसी को इसकी भनक भी न लगे? त्रिवेन्द्र शासनकाल में धर्मनगरी मंे स्लाटर हाउस को हरी झंडी देना हो या फिर देवप्रयाग में शराब फैक्ट्री लगाने का मामला हो सभी मामलों में त्रिवेन्द्र सिंह रावत आवाम के निशाने पर रहे थे? अब वर्तमान में त्रिवेन्द्र सिंह रावत के औद्योगिक सलाहकार रहे केएस पंवार की पत्नी की कम्पनी में दो सौ करोड रूपये की मनी लॉडरिंग का मामला सामने आने पर एक बार फिर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत कटघरे में खडे हुये दिखाई दे रहे हैं क्योंिक यह मनी लॉडरिंग 2017 से 2020 के बीच के मध्य होना पाया गया है जब त्रिवेन्द्र रावत का शासनकाल था? उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला था जब केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों ने त्रिवेन्द्र सिह रावत को बाबा केदारानाथ के दर्शन करने से रोक दिया था और उन्हे वहां से उल्टे पांव लौटना पडा था। वर्तमान में पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत को लेकर उनके काफी समर्थक राज्य मंे यह शोर मचाते रहे कि राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें राज्यसभा में भेजेगा लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व ने न तो उन्हें राज्यसभा भेजा और न ही राष्ट्रीय संगठन में कोई दायित्व दिया गया? कुछ समय पूर्व ही अपनी ही सरकार के खिलाफ जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मीडिया में बयानबाजी कर सरकार को कमजोर करने की कोशिश की गई वह भी किसी से छिपी नहीं है? उत्तराखण्ड में पहली बार डबल इंजन सरकार भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों के खिलाफ सख्त रूख अपनाये हुये हैं और कई भ्रष्टाचार के मामलों में जिस तरह से त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नजदीकी लोगों का नाम सामने आ रहा है उससे उनके भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने के दावों का ढोल फट गया है? त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपने जनता दरबार में उतरा बहुगुणा को अपनी सत्ता की हनक दिखाते हुए उनके साथ खुलकर अभद्रता की थी और मंच से ही उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश तक दे दिया था जिससे पूरे देशभर में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की काफी किरकिरी हुई थी। त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पूर्व मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट और पूर्व ओएसडी धीरेन्द्र पंवार द्वारा सिंधवाल गांव में खरीदे गये टापू तक पहुंचने के लिए करोडो रूपये की लागत से बनाये गये पुल मामले में भी एक जनहित याचिका दायर हुई थी और उसको लेकर भी त्रिवेन्द्र सिंह रावत का भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने का दावा हवा-हवाई हुआ था?

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