भू-माफिया के खिलाफ धाकड पुष्कर धामी का एतिहासिक हंटर

0
130

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक रिटायर्ड सेना अफसर की जमीन पर हुये कब्जे को लेकर उसकी गूंज राज्य के मुख्यमंत्री के कानो में गूंजी तो उन्होंने एतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य की जनता को उस समय चौका दिया जब उन्होंने राजधानी के एक बडे भू-माफिया द्वारा किये जा रहे जमीनों पर कब्जों को लेकर उसकी जांच सीबीआई से कराने को लेकर केन्द्र सरकार को पत्र लिख दिया। भू-माफिया के खिलाफ धाकड धामी का ऐतिहासिक हंटर सभी भू-माफियाओं के मन में एक बडा डर पैदा कर गया क्योंकि बडे-बडे मामलों में सीबीआई जांच के लिए सरकार ने कदम आगे नहीं बढाये लेकिन एक रिटायर्ड सेना अफसर की जमीन पर हुये कब्जे से राज्य के मुख्यमंत्री इतने चिंतित हुये कि उन्होंने भू-माफिया की नाक में नकेल डालने के लिए सीबीआई जांच कराने का बडा जज्बा दिखा दिया। मुख्यमंत्री धामी के इस ऐतिहासिक फैसले से यह संदेश चला गया कि पुष्कर राज में अब एक भी भू-माफिया अपनी माफियागिरी दिखाकर किसी की जमीन पर कब्जा नहीं कर पायेगा। मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक फैसले का रिटायर्ड सेना अधिकारी ने स्वागत किया है और यह बात साफ हो गई है कि अब सुधीर विंडलास को अब तक बचाने वाले भी जरूर बेनकाब हो जायेंगे।
गौरतलब है कि बसंत विहार निवासी एक व्यक्ति ने एक बिल्डर के खिलाफ शिकायत दी कि उसने सरकार के साथ जमीन को लेकर छल किया है इसलिए राजस्व विभाग से विस्तृत जांच कराकर निर्धारित सीमा से अधिक की भूमि को राज्य सरकार में दर्ज करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और राजधानी के एक बडे हासिंग प्रोजेक्ट से जुडी भूमि के विवाद में शासन ने जांच तो बिठा दी थी। वहीं बसंत विहार निवासी संजय सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि सुधीर कुमार विंडलास, प्रदीप कुमार विंडलास, अशोक कुमार विंडलास निवासी राजपुर रोड, देहरादून एवं राहुल विंडलास, श्रीमती बीना विंडलास राजपुर रोड, देहरादून ने एक भागीदार फार्म आठ अगस्त 2०12 को निर्मित की तथा उक्त भागीदारी फर्म का नाम उनके द्वारा विंडलास कंस्ट्रक्शन रखा गया। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया गया कि उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा भागीदारी फर्म के उपरोक्त नाम से फर्म निबंधक उत्तराखण्ड के कार्यालय में 29 अगस्त 2०12 को पंजीकृत कराया गया अथवा उक्त भागीदारी फर्म का निर्माण उत्तर प्रदेश जमीदारी अधिनियम वर्ष 195० में उत्तराखण्ड द्वारा किये गये वर्ष 2००3 एवं 2००7 में संशोधन के उपरांत हुआ। मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में कहा गया है कि सुधीर कुमार विंडलास एक शातिर अपराधी एवं षडयंत्रकारी है इसी कारण उसके विरूद्व थाना राजपुर देहरादून में एफआईआर ००31/2०22 अंतर्गत धारा 42०, 467,468,471,12०-बी आईपीसी दर्ज व अंकित है जिस पर जांच चल रही है तथा एक अन्य रिपोर्ट थाना राजपुर में एफआईआर नम्बर 13/2०18 अंतर्गत धारा 42०,467,468,471,12०-बी, 5०6 आईपीसी दर्ज व अंकित है जिस पर जांच चल रही है तथा एक अन्य रिपोर्ट थाना राजपुर में एफआईआर नम्बर 15/2०22 अंतर्गत धारा 42० आईपीसी दर्ज व अंकित है जिस पर जांच चल रही है तथा अन्य रिपोर्ट थाना राजपुर में एफआईआर नम्बर 13/2०22 अंतर्गत धारा 42०,467,471,12०-बी, 5०6 दर्ज व अंकित है जिस पर जांच चल रही है। शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया था कि सुधीर कुमार विंडलास एवं उनके परिवार द्वारा करोडो भूमि का स्थानान्तरण बिना स्टाम्प शुल्क दिये किया गया है और इसके अतिरिक्त करोडो रूपये की आयकर चोरी भी की गई है तथा उक्त अवैधानिक लाभ को अपने अवैधानिक प्रोजेक्टों एवं भूमि पर खर्च किया गया है जिस कारण उनका कृत्य प्रवतन निर्देशालय के अनुसार भी दण्डनीय अपराध है। वहीं सेना के एक रिटायर्ड अफसर ने भी सुधीर विंडलास के खिलाफ आवाज उठाई थी कि उसकी जमीन पर एक साजिश के तहत कब्जा किया गया है और वह इंसाफ पाने के लिए इधर से उधर भटकता रहा लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी लेकिन सैनिक पुत्र पुष्कर सिंह धामी ने रिटायर्ड सेना अधिकारी को न्याय दिलाने के लिए ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सुधीर विंडलास द्वारा कब्जाई जा रही जमीनों को लेकर उसकी जांच सीबीआई से कराने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर एक इतिहास रच दिया।

LEAVE A REPLY