फुस्स थी एसटीएफ की वाहवाही!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूकेएसएसएससी के द्वारा कराई गई स्नातक स्तर की भर्ती की जांच एसटीएफ को सौंपी और उन्होंने राज्यवासियों को विश्वास दिलाया था कि इस भर्ती घोटाले में जो-जो गुनाहगार हैं उन्हें किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा और उनके खिलाफ इतनी बडी कार्यवाही अमल में लाई जायेगी कि भर्ती घोटाले के गुनाहगारों को पछतावा होगा कि उन्होंने उत्तराखण्ड की युवा पीढी के साथ कितना बडा धोखा किया था। एसटीएफ ने इस मामले में जांच पडताल शुरू कर एक के बाद एक कई गिरफ्तारियां की थी लेकिन उनकी भूमिका पर उस समय सवाल उठा था जब सफेदपोश व उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह को पकडने के लिए एसटीएफ आगे ही नहीं आ रही थी जिसके चलते राज्य के अन्दर इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर खूब शोर मचा और उच्च न्यायालय में भी घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई। एसटीएफ भले ही इस मामले में एक के बाद एक गिरफ्तारी कर मीडिया और सरकार से वाहवाही लूटती रही लेकिन राज्य के अन्दर एक ही सवाल आज भी पनप रहा है कि आखिर हाकम का हाकिम कौन है? एसटीएफ ने यूकेएसएसएससी मामले में गिरफ्तारियां करके वाहवाही तो लूटी लेकिन राज्य के अन्दर यह आशंका उठने लगी कि यह मामला इतना बडा है कि इसका हर राज सिर्फ और सिर्फ सीबीआई ही खोल सकती है। यूकेएसएसएससी मामले में एसटीएफ ने वाहवाही तो लूटी लेकिन घोटाले में गिरफ्तार चार आरोपियों की जमानत से एसटीएफ सवालों के घेरे में है और यह बात उठ रही है कि एसटीएफ की वाहवाही क्या फुस्स थी? अब यह सवाल भी खडा हो रहा है कि हाल ही में जिन तीन बडे लोगों की एसटीएफ ने गिरफ्तारी की है क्या उनके खिलाफ भी एसटीएफ गैंगेस्टर एक्ट लगाने का साहस दिखायेगी?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने जब यूकेएसएसएससी से कराई गई स्नातक स्तर की परीक्षा पर घोटाले का आरोप लगा तो उन्होंने इस मामले की जांच एसटीएफ के हवाले कर दी और कहा था कि इस मामले में चाहे कितना बडा भी गुनाहगार क्यों न हो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी। एसटीएफ ने जैसे ही इस मामले में गिरफ्तारियां शुरू की तो उत्तराखण्ड से लेकर देश की मीडिया में एसटीएफ ने वाहवाही लूटनी शुरू की लेकिन सोशल मीडिया पर एसटीएफ की कार्यवाही को लेकर लोग संतुष्ट नहीं थे और उनका एक ही कहना था कि यह मामला इतना बडा है कि जब तक उसकी जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जायेगी तब तक इस घोटाले का सारा राज बाहर नहीं आ पायेगा? सोशल मीडिया पर सीबीआई जांच को लेकर जब आवाज उठने लगी तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी साफ किया था कि अगर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की आवश्यकता पडी तो सरकार उससे पीछे नहीं हटेगी। यूकेएसएसएससी मामले में एसटीएफ की जांच पर उस समय भी सवाल उठा था जब हाकम सिंह रावत को पकडने के लिए एसटीएफ ने काफी समय तक कोई रूचि नहीं दिखाई थी? हाकम सिंह रावत की गिरफ्तारी जिस नाटकीय ढंग से हुई और उसके बाद उसे जेल भेजा गया तो राज्य के अन्दर आज तक एक ही सवाल खडा हो रहा है कि आखिर हाकम का हाकिम कौन है जिसे पकडने में एसटीएफ आज तक साहस नहीं कर पाई और न ही यह पता लगा पाई कि क्या हाकम सिंह रावत ने सरकारी नौकरियां बेचने के दौरान किसी सफेदपोश या किसी अफसर का सहारा लिया था? आवाम यह मानने को तैयार ही नहीं कि हाकम सिंह रावत अकेला नौकरियां बेचने का बादशाह अपने दम पर ही बना रहा और जब तक हाकम के हाकिम का पता नहीं चल पाता तब तक एसटीएफ की यह जांच सिर्फ एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं मानी जा रही? अब जिस तरह से श्चड्डठ्ठ रोज द्ब2र्शं यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले में श्चद्मद्भ लोगों की जमानत हुई है उससे एसटीएफ पर सवालिया निशान लग रहे हैं कि क्या उसके पास ऐसे पुख्ता सबूत नहीं थे कि वह घोटाले में शामिल इन आरोपियों की जमानत खारिज कराने को लेकर न्यायालय के सामने सबूतों का इतना बडा लेखा-जोखा रख पाती जिससे उनकी जांच का पैमाना बेहतर माना जाता? उत्तराखण्ड में अब यह आवाज उठ रही है कि यूकेएसएसएससी मामले में अगर सोशल मीडिया पर सीबीआई जांच को लेकर जो आवाज उठ रही थी वह सम्भवत: सही थी क्योंकि एसटीएफ ने इस मामले में सिर्फ गिरफ्तारियां करके ही मीडिया में वाहवाही लूटने का खेल खेला था? अब सरकार के मुखिया को भी यह आंकलन करना होगा कि क्या एसटीएफ ने घोटाले में जिन आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था क्या उनके खिलाफ इतने पुख्ता सबूत जुटा लिये गये हैं जिनके सहारे उन्हें एसटीएफ बडी सजा दिलाने में सफल हो जाये? अब बहस चल रही है कि भले ही एसटीएफ ने भर्ती घोटाले में तीन और बडे चेहरों को घोटाले में जेल भेजा है क्या उन्हें रिमांड पर लेकर एसटीएफ यह पता लगाने का साहस दिखायेगी कि क्या उन्हें भ्रष्टाचार करने के लिए किसी राजनीतिक आका ने मौखिक आदेश तो नहीं दिये थे?

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