आखिर प्रेमचंद की विदाई कब?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल इन दिनों आवाम के निशाने पर हैं और विधानसभा में उनके द्वारा बैकडोर से की गई भर्तियों के निरस्त होने के बाद आवाम अब राज्य सरकार के मुखिया से एक ही सवाल पूछ रहा है कि आखिरकार प्रेमचंद अग्रवाल की मंत्रिमण्डल से विदाई कब होगी? भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुई जंग में जिस तरह से अब सरकार के ही मंत्री दागदार हो गये हैं तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर राज्य की नजरें टिकी हुई हैं कि आखिरकार जिस मंत्री पर सरकार की जमीन खुर्दबुर्द करने और बैकडोर से विधानसभा में भर्तियां करने का उन पर दाग लग चुका है तो क्या वह जर्मनी से लौटकर नैतिकता के आधार पर खुद इस्तीफा देंगे या फिर मुख्यमंत्री खुद आगे आकर उन्हें अपने मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखायेंगे?
उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल आवाम के निशाने पर आ रखे हैं जहां कुछ समय पूर्व उनके पुत्र पर आरोप लगा कि उन्होंने सरकार की जमीन को खुर्दबुर्द कर उसे अपने नाम कराया है तो वहीं विधानसभा में लगभग 72 भर्तियां विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बैकडोर से की थी। आज तक इसका सच सामने लाने के लिए कोई पहल नहीं हुई लेकिन राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में आज तक हुई सभी भर्तियों की जांच के लिए जब विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा तो विधानसभा अध्यक्ष रितु खण्डूरी ने इस मामले में तीन सदस्यीय कमेटी को एक माह में जांच का जिम्मा सौंपा और यह जांच बीस दिन में पूरी हो गई और यह बात साफ हो गई कि प्रेमचंद अग्रवाल ने नियमों की धज्जियां उडाते हुए बैकडोर से भर्तियां की थी। भर्तियां तो रद्द हो गई लेकिन मुख्यमंत्री के मंत्रिमण्डल से प्रेमचंद अग्रवाल की विदाई कब होगी यह सवाल अब राज्य के चप्पे-चप्पे में गूंज रहा है?

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