भाजपा में पल रहे संपोले!

0
112

धामी सरकार को अस्थिर करने की रच रहे साजिश?
कुछ पदाधिकारियों को नहीं दिख रही गुड गवर्नेंस
सोशल मीडिया को हथियार बना रहे ‘घर के भेदी‘
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। यदि कोई अपनी अस्तीनों में सांपों को पालना शुरू कर दे तो सांप ही नहीं उसके संपोले भी अस्तीन के भीतर घुसकर डसने से पीछे नहीं छूटते। बड़ी मशहूर नजम है कि ‘‘बर्बाद गुलिस्तां करने को एक ही उल्लू काफी था, हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजामें गुलिस्तां क्या होगा…..’’ इस नजम के अभिप्राय को दूसरे नजरिए से यदि समझा जाए तो वह कुछ इस प्रकार से हो सकता है कि यदि किसी वृक्ष एक या दो टहनियां दूषित हो जाती है तो उन टहनियों को काटकर वृक्ष को बचाया जा सकता है लेकिन वहीं टहनियां यदि पूरे वृक्ष को ही दूषित करने पर आ जाए तो क्या होगा? एक ऐसा ही विशाल राजनीतिक वृक्ष उत्तराखण्ड राज्य में भी है, जिसका व्यास प्रसिद्धि के साथ लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि इस विशाल राजनीतिक वृक्ष की कुछ सूक्षम दूषित टहनियां इसी कोशिश में लगी हुई है कि आखिर वह कैसे इस विशाल राजनीतिक वृक्ष को दूषित करें। यह विशाल राजनीतिक वृक्ष और कोई नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी है, जिसने अपने कद्दावर व लोकप्रिय नेताओं के दम पर लगातार दूसरी बार उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाते हुए इतिहास रचा है। अंकगणित से नापा जाए तो मौजूदा सरकार को प्रचंड बहुमत दिलाने में संबसे ज्यादा प्रतिशत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का है और इस बात का लोहा भाजपा हाईकमान तक मानती है। उत्तराखण्ड में फैले भ्रष्टाचार पर लगातार जबरदस्त प्रहार करने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता से पार्टी के अंदर को लोग मुंह फुलाए बैठे है। आलम यह है कि भाजपा के इन लोगों में से कुछ पदाधिकारी ऐसे भी है जिन्हें धामी शासन में गुड गवर्नेंस नजर तक नहंी आ रही। ऐसे लोगों को संपोलों की संज्ञा देना गलत नहीं होगा जोकि जिसकी अस्तीन में रहते बाद में उसी को डसने का काम करते हैं? भाजपा मंे पल रहे ऐसे संपोलों को पार्टी के उच्च पदाधिकारियों ने जल्द बाहर का रास्ता नहीं दिखाया तो आने वाले समय में इस लोकप्रिय राजनीतिक दल को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है?
सोशल मीडिया का आविष्कार करने वालों ने कभी यह नहीं सोचा होगा कि जैसे जैसे समय बीतता जाएगा, यह सोशल मीडिया कई लोगों के लिए एक हथियार बन जाएगा। किसी को बदनाम करना हो या किसी पर अनर्गल आरोप लगाना हो, सोशल मीडिया सबसे मुफीद माध्यम है। वहीं अब तो कुछ लोग, अपनों को ही निशाना बनाने के लिए इस खूब इस्तेमाल कर रहे है। उत्तराखण्ड में भी इसकी बानगी देखी जा सकती है। एक पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्ता चालते हुए एक बात कही थी कि वह भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति से काम करेंगे, हालांकि उनके कार्यकाल के टीले के ढहते-ढहते भी भ्रष्टाचार पर वह जीरों टॉलरेंस दूर दूर तक देखने को नहीं मिली। वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार की गेंद को पीटने के लिए मिशन छेड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार पर प्रहार करने वाली एजेंसियों मेें तैनात बल्लेबाजों को यह साफ कह रखा है कि चाहे कुछ भी हो जाए भ्रष्टाचारी गेंदों को शॉट मारकर स्टेडियम से बाहर कर दिया जाए अर्थात् भ्रष्टाचार में लिप्त प्रत्येक व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेज दिया जाए। उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी सरकार गुड गवर्नेंस की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है लेकिन देखने में आ रहा है कि भाजपा के कुछ पदाधिकारियों को उनकी यह गुड गवर्नेंस नजर ही नहीं आ रही है जबकि सबको नजर आ रहा है कि सीएम धामी ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ किस प्रकार से रौद्र रूप धारण किया हुआ है। फिर चाहे उत्तराखण्ड अधिनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परिक्षाओं में हुई अनियमित्ताओं की जांच हो या फिर दरोगा भर्ती घोटाले की जांच, उन्होंने विजिलेंस, एसटीएफ, सहित कईयांे को भ्रष्टाचारियों को दबोचने के लिए मैदान में उतार रखा है। सीएम धामी के इस रवैये को देखकर उत्तराखण्ड की जनता को राम राज की अनुभूति हो रही है? पुष्कर सिंह धामी की सरकार भ्रष्टाचार पर प्रहार कर रही है, राज्यहित में नित नए-नए कदम उठा रही जिससे प्रदेश विकास की नई उंचाईयों को छूने के पथ पर अग्रसर है। बावजूद इसके भाजपा के ही कुछ भीतरघाती धामी सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने की चेष्टा में जुटे हुए है? चर्चा है कि इन घर के भेदियों ने सोशल मीडिया को हथियार बना रखा हैं और सरकार में पक्ष में यदि कोई व्यक्ति कुछ साकारात्मक पोस्ट डालते है तो वह उसी पोस्ट पर सरकार के खिलाफ टिप्पणियांे करने तक से नहीं पीछे हटते? ऐसे घर के भेदियों पर भाजपा हाईकमान कब नजरें डालेगी, अब तो बस इसी बात का इंतजार है…
इन्हें तो अपनों ने लूटा ……..
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते है कि भारतीय जनता पार्टी ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ के नारे के साथ आगे बढ़ रही है। उत्तराखण्ड मंे भी इस नारे के साथ अधिकांश भाजपा कार्यकर्ता आगे बढ़ रहे है और अपने राजनीतिक दल का विस्तार कर रहे है। हालांकि उत्तराखण्ड में कुछ ऐसे तत्व भी दिखाई दे रहे है जोकि सोशल मीडिया पर घर के भेदी का काम कर रहे है। ऐसे में वह बूथ कैसे मजबूत हो सकते है जिनके पदाधिकारी अपनी ही मजबूत सरकार के लिए एक मिशन छेड़े हुए हैं? उत्तराखण्ड की मौजूदा सरकार ऐसी मजबूती से काम कर रही है कि विपक्ष के दिग्गज नेताओं को भी उसे घेरने के लिए अपनी राह से जुदा होना पड़ रहा है। वहीं भाजपा के ही कुछ भीतरघाती अपने चहेते नेताओं की चाहत में अपनी सरकार के खिलाफ ही यदि मिशन छेड़गें तो विपक्ष भी यह कहने से नहीं चूकेगा कि ‘‘इन्हें तो अपनों लूटा, अब हमारी क्या जरूरत …..’’

LEAVE A REPLY