मास्टरस्ट्रोक की तैयारी में पुष्कर!

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भू-कानून में संशोधन का होगा रोडमैप तैयार?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता का पिछले कुछ वर्षों में जिस शब्द से सबसे ज्यादा विश्वास उठा चुका है, वह शब्द है, आश्वासन। राज्य में पिछले समय रही सरकारों ने लोगों को अधिकांश मुद्दों पर सिर्फ आश्वासन ही दिए और उनमें से अधिकांश का आज तक समाधान नहीं हो पाया। हालांकि जबसे सूबे की कमान प्रतिभाशाली युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाली है, तबसे उनके द्वारा किए जा रहे जनहित कार्यों को देखकर जनता का उनमें विश्वास बढ़ता ही जा रहा है। अपनी पिछली सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिन कार्यों को लेकर जनता को आश्वासन दिए थे, उन्हें वे अपनी सरकार के इस कार्यकाल में पूरा करने के लिए अग्रसर दिखाई दे रहे है। यनिफार्म सिविल कोड पर उनका स्पष्ट रूख इसका एक बड़ा उदाहरण है। यहीं कारण नजर आ रहा है कि लंबे अर्से के बाद अब उत्तराखण्ड की जनता को आश्वासन शब्द पर फिर भरोसा होने लगा है। राज्य में भू-कानून में संशोधन को लेकर एक बहस पिछले लंबे समय से चल रही है। इसमें बदलाव करने को लेकर आंदोलन तक हुए लेकिन पिछली किसी सरकार ने इस पर अपना रूख स्पष्ट नहीं किया। वहीं धामी सरकार ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए बीते वर्ष इसके लिए समिति का गठन किया था और समिति को यह साफ संदेश दिया था कि वह इस मुद्दे पर यथाशीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री के तल्ख तेवरों का ही प्रताप है कि सोमवार को समिति ने प्रदेश हित में निवेश की संभावनाओं और भूमि के अनियंत्रित क्रय-विक्रय के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपनी 23 संस्तुतियां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी। समिति से रिपोर्ट लेने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार शीघ्र ही समिति की रिपोर्ट का गहन अध्ययन कर व्यापक जनहित व प्रदेश हित में समिति की संस्तुतियों पर विचार करेगी और भू-कानून में संशोधन करेगी। यह तो सभी जानते है सीएम धामी की कथनी और करनी में कभी फर्क देखने को नहीं मिला और उनके इसी रवैये को देखते हुए इस बात का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे जल्द ही भू-कानून में संशोधन को लेकर एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल सकते है?
उत्तराखण्ड को स्वर्णीम राज्य बनाने का जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जो सुनहरा सपना है वह प्रदेश की जनता के सपनों को एक नई उड़ान देता रहा है। एक लंबे समय बाद उत्तराखण्ड की अधिकांश जनता के चेहरे पर सरकार को लेकर सुनहरी मुस्कान देखने को मिल रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लगातार दूसरी बार सत्ता संभाल इतिहास तो रचा ही, साथ ही वह इस मिशन में भी जुट गए कि कैसे उत्तराखण्ड भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य की सूची में पहले पायदान पर पंहुचाया जाए। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। उत्तराखण्ड अधिनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परिक्षाओं में हुई अनियमित्ताओं को लेकर मुख्यमंत्री फुल एक्शन में दिखाई दे रहे है। इन अनियमित्ताओं को लेकर एसटीएफ की टीमें लगातार छापेमारी की कार्रवाई करते हुए अरोपियों की गिरफ्तारी की उन पर गैंगस्टर एक्ट तक की कार्रवाई कर रही है। इन परीक्षाओं को देने वाले युवा परीक्षार्थियों को भी अपनी प्रिय सीएम से बहुत आस है। उत्तराखण्ड की सियासी पिच पर फ्रंट फुट पर बैटिंग करने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बहुत ही जल्द एक और मास्टरस्ट्रोक मार सकते है? जानकारों का मानना है कि यह मास्टरस्ट्रोक भू-कानून में संशोधन को लेकर आ सकता है, वहीं भू-कानून जिसमें संशोधन की मांग पिछले लंबे समय उठती आई है। इसको लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक समिति का गठन किया था। बीते सोमवार राज्य में भू – कानून के अध्ययन व परीक्षण के लिए गठित समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति ने प्रदेश हित में निवेश की संभावनाओं और भूमि के अनियंत्रित क्रय-विक्रय के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपनी 23 संस्तुतियां सरकार को दी थी। बता दें कि समिति ने राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार-विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

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