पर्दे के पीछे से ‘खेलÓ

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में सीएम के खिलाफ चल रही साजिश बेनकाब होने के बाद हिन्दी सिनेमा में 1968 में फिल्मी पर्दे में आई शिखर फिल्म का आज वो गीत याद आ गया कि पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा…। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ जिस अंदाज में साजिश का चक्रव्यूह रचा गया वह आवाम के सामने आ गया क्योंकि कुछ मीडियाकर्मी जिस तरह से विधानसभा में मात्र एक साल के लिए हुई अस्थाई नियुक्ति पर मुख्यमंत्री की सरकार को कटघरे में खडा करने का जो बंद कमरे में बैठकर चक्रव्यूह रच चुके थे उनके नाम और चेहरे सामने आने के बाद यही गीत गुनगुनाया जा रहा है कि पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा…।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं उससे पुष्कर सिंह धामी का इकबाल उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में दिखाई दे रहा है और मुख्यमंत्री ने जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने का जो संकल्प अपनी किचन टीम के साथ ले रखा है उससे वो चेहरे घबराये हुये हैं जिनका मिशन कुछ सरकारों में अपना खौफ दिखाकर उनसे अपने बडे-बडे काम निकालने का हुआ करता था? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के दौरान जिस तरह से कहा था कि वह ईष्या और द्वेषभावना से दूर रहकर सत्ता चलायेंगे। यही कारण है कि उनके खिलाफ कुछ सफेदपोशों और मीडिया के लोगों ने विधानसभा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कराई गई नियुक्तियों को कटघरे में खडा कर सरकार को निशाने पर लिया है उसके बाद यह काला सच भी बाहर आ गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जबरदस्ती उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रचा गया था और उसी के चलते अब यह गीत गुनगुनाया जा रहा है कि पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा…।

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