देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के युवाओं को रोजगार देने का विधानसभा चुनाव से पूर्व बडा वायदा किया था और इसी वायदे को धरातल पर उतारने के लिए उन्होंने जब बीते वर्ष अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुये पेपर लीक की शिकायत सुनी तो उन्होंने इस मामले की जांच एसटीएफ के हवाले कर दी और युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनके रोजगार पर ग्रहण लगाने वाले किसी भी गुनाहगार को बक्शा नहीं जायेगा और यही कारण है कि एसटीएफ पेपर लीक प्रकरण में कार्यवाही तो कर रही है लेकिन बहस यह शुरू हो गई है कि सिर्फ इस पेपर लीक पर ही एसटीएफ की जांच अटक कर न रह जाये क्योंकि राज्य में अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के द्वारा राज्य में आधा दर्जन से अधिक भर्तियां कराई गई थी। अब हाकम सिंह की गिरफ्तारी के बाद राज्य में पूर्व में हुई भर्तियों पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं और मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए राज्यभर में शोर मचना शुरू हो गया है। एक अदने से हाकम सिंह रावत का उत्तराखण्ड के अन्दर कौन हाकिम है जिसके बल पर वह मात्र कुछ वर्षों में ही अकूत दौलत का किला खडा करता चला गया? उत्तराखण्ड के अन्दर अब शंकाओं का दौर शुरू हो रखा है कि हाकम के वशीकरण में आखिर कैसे काफी दिग्गज फंसते चले गये जिसके चलते वह जीरो से उठकर हीरो बन गया? सोशल मीडिया में सफेदपोशों-अफसरों को जमीन के तोहफे दिलाने का भी ‘शकÓ भी अब गहराने लगा है? आशंकायें व्यक्त की जा रही हैं कि जिस तरह से पिछले सालों के अन्दर उत्तराखण्ड में हुई भर्तियों में हाकम का जादू चलता रहा उसके चलते कहीं ऐसा तो नहीं उसने उत्तराखण्ड के कुछ अफसरों और सफेदपोशों को अपने जनपद में कोडियों के भाव जमीनें खरीदवाई या फिर उन्हें उपहार के रूप में जमीनें दिलाने का खेल खेला? हाकम सिंह का जो रूप सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है उससे यह बहस भी शुरू हो गई है कि कहीं हाकम सिंह ने काले जादू के सहारे राज्य के काफी सफेदपोश और कुछ अफसरों पर सम्मोहन तो नहीं कर रखा था जिसके चलते वह इन दिग्गजों में अपनी बडी पहुंच बनाता चला गया और उसी के चलते कहीं उसने राज्य में होती आ रही परीक्षाओं में पेपर लीक का बडा खेल खेलकर अकूत दौलत का साम्राज्य तो नहीं खडा कर दिया?
हैरानी वाली बात यह है कि इस जांच में जहां हाकम सिंह का नाम सबसे पहले था उस हाकम सिंह को गिरफ्तार करने में जिस तरह से एसटीएफ ने काफी समय खामोशी साधकर रखी उसी के चलते यह आशंकायें उठ रही हैं कि इस पेपर लीक जांच का खुलासा सिर्फ सीबीआई और सिर्फ सीबीआई ही कर सकती है क्योंकि उसके पास ऐसे मामलों को हल करने के लिए सभी संसाधन हैं जबकि एसटीएफ के पास वो सारा तंत्र नहीं है जिसके चलते वह लम्बे अर्से से चली आ रही परीक्षाओं को खंगालने का कोई पैमाना तय कर सके?
