जेलों में अपराधियों के मोबाइलों पर सीएम की नजर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में कभी भी किसी पूर्व मुख्यमंत्री ने जेलों से चला रहे गैगों की नाक में नकेल डालने के लिए कोई ऑपरेशन नहीं चलाया और न ही कुछ जेलों में अपराधियों द्वारा चलाये जा रहे मोबाइल फोनों पर शिकंजा कसने की दिशा में कोई पहल हुई जिसके चलते कुख्यात अपराधी अकसर उद्यमियों को फोन पर फिरौती के लिए धमकियां देते रहे लेकिन जबसे मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने कमान अपने हाथों में ली है तो उन्होंने कुछ जेलों में चलाये जा रहे मोबाइल फोनों को लेकर अपनी कडी नाराजगी दिखा रखी है और उसी का परिणाम है कि जेल प्रशासन ने मोबाइल फोन चलाने वाले कुछ कुख्यातों पर अपनी नजर बना रखी है और यही के चलते सितारगंज जेल में डीआईजी जेल ने छापा मारकर वहां से जिस तरह कैदियों के पास से तीन मोबाइल फोन और कुछ नगदी बरामद की उससे साफ हो गया कि पुष्कर सिंह धामी के राज में अब उत्तराखण्ड की जेलों में अपने आपको सुरक्षित महसूस करने वाले कुख्यात अपराधियों के मनसूबे सफल नहीं हो पायेंगे और यही कारण है कि एसटीएफ भी पूर्व में कुछ जेलों के अन्दर छापेमारी कर मोबाइल फोन बरामद कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढते जा रहे हैं और कुछ राज्यों के कुछ बदमाश जो राज्य की जेलों में अपने आपको सुरक्षित रखने का खेल खेलकर अपना गैंग चला रहे थे अब उन पर पुष्कर सिंह धामी की पैनी नजर लगी हुई है और उद्यमियों को राज्य में सुरक्षाभाव देने के लिए उन्होंने जिस तरह से कुछ जेलों में बंद कुख्यात बदमाशों द्वारा चलाये जा रहे मोबाइल फोनों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया है उससे अपराधियों में खलबली मची हुई है और अब जिस तरह से सितारगंज की सेंटर जेल में कुछ कैदियों के पास से जिस तरह तीन मोबाइल फोन मिले हैं उससे साफ नजर आ गया है कि अब जेलों से गैंग चला रहे कुख्यातों का साम्राज्य ध्वस्त होने का समय आ गया है।

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