ये कैसा स्मार्ट सिटी बना दिया ‘सरकारÓ

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी के शहर को स्मार्ट बनाने की दिशा में केन्द्र सरकार ने एक बडी पहल की थी और उसके बाद ऐसी आशा बंधी थी कि शहर एक अलग पहचान बनायेगा लेकिन शहर को स्मार्ट बनाने का जो काम किया गया उसे देखकर तो हर कोई हैरान है कि आखिरकार यह कैसा स्मार्ट सिटी बना दिया जिसमें आज भी शहर जरा सी बारिश में पानी-पानी हो जाता है और वहां का नजारा ऐसा दिखाई देता है मानो सडक पर कोई नदी बहने लगी हो? सोशल मीडिया पर भी शहर में सडकों पर पानी ही पानी नजर आने पर सिस्टम को कटघरे में खडा किया जा रहा है और इस स्मार्ट सिटी को लेकर शहरी विकास मंत्री ने भी जिस तरह से अफसरों के सामने अपनी नाराजगी प्रकट की थी उससे सवाल उठा था कि आखिरकार ऐसी स्मार्ट सिटी बनाने के वो कौन जिम्मेदार अफसर हैं जिन्हें अभी तक सिस्टम चिन्हित नहीं कर पाया? शहर के पल्टन बाजार का नाम देश प्रसिद्ध है और उस बाजार में चलने के दौरान एक अलग अनुभूति का आनंद मिलता था लेकिन स्मार्ट सिटी के तहत सडक पर जिस तरह से टाइलो का जाल बिछा दिया गया उससे पल्टन बाजार की रौनक पर भी सवालिया निशान लग गये कि आखिरकार क्या सडक पर ऐसे ही टाइलें बिछाकर उसे सुन्दर बनाया जाता है जैसा पल्टन बाजार में टाइलें बिछाकर उसे बदरंग बना दिया गया?
उल्लेखनीय है कि अस्थाई राजधानी के शहर को केन्द्र सरकार ने स्मार्ट बनाने के लिए चुना और उसके लिए काफी पैसा आवंटित किया गया लेकिन जब यह स्मार्ट सिटी बनकर सामने आई तो उसे देखकर हर दूसरा व्यक्ति यह कहने से नहीं चूक रहा कि क्या ऐसा स्मार्ट शहर होता है जहां आज भी जरा सी बारिश में सडकें जलमग्न हो जाती हैं? ऐसे में उन अफसरों पर सवालिया निशान लग रहा है जिन्हें शहर को स्मार्ट बनाने का जिम्मा दिया गया था लेकिन इन अफसरों ने कैसा स्मार्ट शहर बना दिया इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

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