कांवड में दिखा पुष्कर का जलवा

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड का इतिहास रहा कि जब भी राज्य में कांवड यात्रा शुरू होने वाली होती थी तो उससे एक माह पूर्व पुलिस के कुछ बडे अफसर बैठकें कर संदेश देते थे कि अगर राज्य के अन्दर कोई भी कांवडिया हुडदंग करता हुआ पाया गया या उसने डीजे बजाया तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी लेकिन राज्य में सरकार की कमान संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी ने कावंड यात्रा को आस्था की यात्रा मानते हुए शिव भक्तों का देवभूमि में सत्कार करने और उन पर फूलों की वर्षा करने का संदेश दिया तो इस संदेश को सुनकर करोडो कांवडियों का मन मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी को लेकर शुरूआती दौर में ही बोल पडा था कि धामी जी आप ग्रेेट हैं। पुष्कर सिंह धामी ने भी देशभर में यह संदेश दे दिया कि वह जो संकल्प लेते हैं उसे पूरा करते हैं और यही कारण है कि राज्य में जब कांवडियों का हुजूम उमडने लगा तो शिव भक्तो के मन में पहली बार ऐसी उमंग और प्रसन्नता देखने को मिली जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता क्योंकि देवभूमि में शिवभक्तों के सत्कार के लिए जहां जगह-जगह भण्डारे लगे हुये थे वहीं पुलिस अफसरों ने भी उनके सम्मान में पलकें बिछाई हुई थी और तो और करोडो कांवडिये उस समय भाव विभोर हो गये थे जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद आगे आकर हरि के द्वार में गंगातट पर शिवभक्तों के पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया और उन पर हैलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा कराई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह आशंका हुई कि कांवडियों पर खतरा हो सकता है तो उन्होंने अपने विशेष अपर मुख्य सचिव अभिनव कुमार के साथ मंथन कर खुफिया और पुलिस विभाग के लोगों को हरि के द्वार में कांवडियों के भेष में शिवभक्तों के बीच तैनात किया जिससे किसी भी शिव भक्त को खतरे से बचाया जा सके। हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड यात्रा में ही देश को कुंभ जैसा दृश्य दिखाकर हरि के द्वार को अलौकिक बना दिया था।
उत्तराखण्ड में अगर भाजपा को दुबारा सत्ता का सुख मिला है तो इसका सम्पूर्ण श्रेय राज्य के मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी को ही जाता है जिन्होंने मात्र छह माह के भीतर भाजपा को लेकर आवाम के मन में चली आ रही नाराजगी को दूर किया और उन्हें अपना मानते हुए संदेश दिया कि वह मुख्यमंत्री नहीं बलिक उनके सेवक हैं और सेवक बनकर ही उनकी रक्षा करेंगे। पुष्कर सिंह धामी एक युवा मुख्यमंत्री हैं तो उनसे राज्यवासियों को एक नई आशा भी दिखाई दी थी कि वह राज्य को विकास की राह पर तेजी के साथ ले जायेंगे और इक्कीस सालों से जो विकास का पहिया जाम हो रखा था उसे वह तेजी के साथ दौडायेंगे। उत्तराखण्ड के अन्दर चारधाम यात्रा को एतिहासिक बनाने का श्रेय राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को गया और इसका सीधा संदेश देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास भी पहुंचा कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के अन्दर राज्य को चलाने के लिए एक बडी ऊर्जा है और इस ऊर्जा को वह लम्बे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं और यही कारण है कि भ्रष्ट अफसरों की नींद उडी हुई है कि अगर उन्होंने पुष्कर सरकार में कोई भ्रष्टाचार किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा। दो साल से राज्य में बंद पडी कांवड यात्रा को पुष्कर सिंह धामी ने एक जज्बे के साथ कुंभ जैसी बनाने के लिए खाका खींचा और उन्होंने साफ संदेश दिया कि कोई भी पुलिसकर्मी एक भी शिवभक्त के साथ अभद्रता नहीं करेगा और राज्य में आने वाले हर शिवभक्त का पुलिस आदर और सत्कार करेगी। उत्तराखण्ड के अन्दर वह कहावत सच हो गई कि जैसा राजा वैसा शासन। हैरानी वाली बात है कि जो पुलिस कई सालों से कांवडियों को सही नजर से नहीं देखती थी वह पुलिस पुष्कर सिंह धामी के राज में उन्हें शिव भक्त मानकर उनका सत्कार करने के लिए आगे खडी हुई दिखाई दी और यही कारण था कि सरकार के मुखिया की सोच को करोडो कावंडियों ने देवभूमि में आकर सैल्यूट किया और उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब एक भी कांवडिये का आस्था के पथ पर किसी पुलिसकर्मी से कोई विवाद नहीं हुआ। हरि के द्वार में शिव भक्तों का सैलाब साफ संदेश दे गया कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड यात्रा में ही देश के लोगों को कुंभ का मनमोहक एहसास करा दिया।

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