शहर के हृदय स्थल पर कूड़ा ही कूड़ा

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शहर को स्वच्छ और हरियाली भरा बनाने के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन सीएम के स्वच्छ दून पर एक बडा ग्रहण लगाता हुआ दिखाई दे रहा है और शहर के हृदय स्थल राजपुर रोड पर तीन कालोनियों की ओर जाने वाले रास्ते पर जिस तरह से सडक के किनारे कूडेदान सजा दिये गये उसे देखकर वहां से गुजरने वाला हर इंसान एक ही सवाल खडे कर रहा है कि क्या ऐसा होता है स्मार्ट सिटी जहां सडक पर ही कूडेदान लगाकर वहां लोगों को कूडेदान और सडक पर कूडा फेंकने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है जिसके चलते वहां से गुजरने वाले लोगों को जहां सडकों पर बिखरी गंदगी से रूबरू होना पड रहा है वहीं जानवर उसे खाने के लिए वहां उमड रहे हैं जिससे कई बार हादसे हो चुके हैं और इन कूडेदानों को हटाने के लिए इलाके के लोगों ने नगर निगम के मेयर तक से अपील की लेकिन उनकी अपील को हवा में उडा दिया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में नगर निगम कितना गंभीर हो रखा है?
उल्लेखनीय है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केन्द्र ने एक बडी पहल की थी और शहर में स्मार्ट सिटी का काम शुरू हुआ लेकिन शहर स्मार्ट होने के बजाए बदरंग होता चला गया और शहर के दर्जनों इलाकों में जिस तरह से जरा सी बारिश में भी सडकें जलमग्न नजर आती हैं उससे स्मार्ट सिटी पर एक बडा सवाल खडा होता है कि अगर ऐसी स्मार्ट सिटी होती है तो फिर शहर का तो भगवान ही मालिक है? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए संकल्प लिया और कहा कि शहर को ऐसे स्वच्छ बनाया जायेगा जिससे कि बाहर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को नजर आये कि उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी दून का शहर कितना स्वच्छ है। हालांकि मुख्यमंत्री के स्वच्छ दून को नगर निगम ही पलीता लगाने में लगा हुआ है। सवाल यह है कि जब घर-घर से कूडा उठाने का काम नगर निगम द्वारा किया जा रहा है तो फिर शहर के हृदय स्थल राजपुर रोड के गंगोत्री विहार, सौंधोवाली और अमन विहार को जाने वाले रास्ते के मुहाने पर आखिर नगर निगम प्रशासन द्वारा कूडेदान क्यों सजा दिये गये? सवाल यह उठ रहा है कि एक ओर तो गंदगी से महामारी फैलने की हमेशा आशंका बनी रहती है लेकिन इस मार्ग पर कूडेदान से फैली गंदगी के कारण जहां आवाम को बीमारियों का खतरा बना हुआ है वहीं सडक से निकलने वाले लोगों के सामने भी एक बडा संकट आकर खडा हुआ है क्योंकि जब यह कूडादान भर जाता है तो लोग शाम के समय सडकों पर ही कूडा फेंककर चले जाते हैं जिस कारण वहां कूडे का अम्बार तो लगता ही है साथ में जानवर भी वहां उसमें रखे खाने को खोजने के लिए कूडे को इधर-उधर बिखेर रहे हैं जिस कारण वहां सुबह-शाम आने-जाने वाले लोगों को गंदगी का सामना करना पड रहा है वहीं सडक पर बिखरे कूडे के कारण दुर्घटनायें भी होना एक आम बात हो गई है। इन कूडेदानों को वहां से हटाने के लिए इलाके के कुछ लोग मेयर से भी अपील कर चुके हैं लेकिन उसके बावजूद भी सडक पर रखे यह कूडेदान आखिर क्यों नहीं हटाये जा रहे यह इलाके के लोगों को समझ नहीं आ रहा है।
हैरानी वाली बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत का सपना देख रखा है लेकिन उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में शहर के अन्दर जिस तरह से उनके सपने पर नगर निगम द्वारा ग्रहण लगाया जा रहा है वह हैरान करने जैसा है। ऐसे में अब इलाके के लोगों को उत्तराखण्ड के महानायक पुष्कर सिंह धामी से एक उम्मीद है कि वह इन कूडेदानों को हटवाकर स्वच्छ शहर के संकल्प को पूरा करें।

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