देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड की राजधानी में वर्षों से मीडिया की आड में मीडिया का एक खतरनाक दलाल कुछ अफसरों के बल पर खतरनाक दलाली का खेल खेलता आ रहा है और इस दलाल के कारनामें राजधानी में आम होते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी आज तक विजिलेंस ने यह खंगालने की कोशिश नहीं की कि जिसने अपना मकान खरीदकर उसमें एक ईंट भी नहीं लगाई वह आखिर एमडीडीए में आखिर कौन सी पोस्ट पर तैनात है जिसके चलते वह वहां अकसर डेरा डाले रहता है? एमडीडीए के कुछ अफसर इस खतरनाक दलाल को गुप्त जानकारी देते हैं कि कहां अवैध रूप से निर्माण कार्य हो रहा है उसके बाद यह दलाल अपने गैंग के एक-दो सदस्यों के साथ वहां पहुंचकर निर्माण कार्य की फोटो खींचकर निर्माण करा रहे व्यक्ति को ब्लैकमेल करने का खुला खेल खेलता है और अभी शहर में एक अवैध निर्माण कराने के लिए इस खतरनाक दलाल ने कॉम्पलैक्स संचालक से लाखों रूपये लिये थे और उसका निर्माण कार्य बडे पैमाने पर करा दिया था लेकिन जैसे ही एमडीडीए के वीसी को इस अवैध निर्माण का पता चला तो उन्होंने उस पर अपना चाबुक चला दिया। सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिरकार एमडीडीए के कुछ अधिकारियों ने कैसे इस दलाल से गोपनीय गठबंधन कर रखा है जिसके चलते वह उसे उस स्थानों पर भेजते हैं जहां अवैध निर्माण हो रहा होता है उसके बाद कथित मीडियाकर्मी निर्माण कर रहे व्यक्तियों को डराकर उनसे वसूली का बडा खेल खेलता है और इस खेल में एमडीडीए के कुछ छोटे अधिकारी उसके हमराज बने हुये हैं अब देखने वाली बात है कि क्या एमडीडीए के अन्दर पल रहा यह खतरनाक दलाल कभी विजिलेंस की रडार पर आयेगा जो दावा कर रही है कि राज्य में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा।
उल्लेखनीय है कि राजधानी में एमडीडीए में लम्बे अर्से से एक कथित मीडियाकर्मी दलाली का खुला खेल खेलता आ रहा है और यह दलाल इतना शातिर है कि वह कुछ अफसरों को पूर्व में भी अपने मायाजाल में फंसाकर उनके सहारे दलाली का खेल खेलने में सफल रहा है इतना ही नहीं यहां तक चर्चा रही कि यह दलाल एमडीडीए के चंद पूर्व अफसरों के घरों में भी उसकी खुली एंट्री थी और वह एक योजनाबद्ध तरीके से उन व्यक्तियों को अपना शिकार बनाता था जो अवैध निर्माण करने के लिए आगे आते थे। इस दलाल ने एमडीडीए के कुछ छोटे अफसरों को अपना राजदार बना रखा है और चर्चा है कि वही उसे बताते हैं कि कहां अवैध निर्माण चल रहा है। कथित मीडिया का यह खतरनाक दलाल इतना चालाक है कि उसने कुछ मीडियाकर्मियों को अपने पाले में बिठा रखा है और उनकी वह खूब खातिरदारी करता है तथा एक मीडियाकर्मी इस कथित दलाल के साथ एमडीडीए में भी कभी-कभी अपना भौकाल कुछ छोटे अधिकारियों को दिखाने के लिए पहुंच जाता है? शहर में एक निर्माण कार्य करा रहे दो व्यापारी एक स्थान पर अपने दो साथियों को बता रहे थे कि एमडीडीए का इन दिनों बुरा हाल हो रखा है और जब वह अपना निर्माण करा रहे हैं तो एक व्यक्ति ने उनके निर्माण की फोटो खिंचकर एमडीडीए में शिकायत दर्ज करा दी और उन्हें जब इस शिकायत के बारे में पता चला तो वह एमडीडीए पहुंचे तो वहां मौजूद दो छोटे अधिकारियों ने कहा कि उस मीडियाकर्मी से मिलकर उसे मैनेज कर लें। निर्माण करा रहे व्यक्तियों ने कहा कि उन्हें शिकायतकर्ता का नम्बर भी एमडीडीए के एक छोटे अधिकारी ने दिया और उसके बाद जब उनकी दलाल मीडियाकर्मी से बातचीत हुई तो उसने उन्हें अपने दफ्तर में बुला लिया और शेखी बखारते हुए कहा कि वह बीस साल से एमडीडीए का काम देख रहा है तो उक्त व्यक्ति हैरान हो गये और उन्होंने पूछा कि क्या आप एमडीडीए में आरके टैक्ट हो तो दलाल मीडियाकर्मी ने कहा कि वह मीडिया में है और आवाम की आवाज उठाना उसकी आदत है। दलाल मीडियाकर्मी ने उनसे जो मांग की उसे सुनकर वह दंग रह गये क्योंकि वह दलाल को देने के लिए लिफाफे में बीस हजार रूपये का पैकेट ले गये थे। वहीं शहर में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति अपने होटल की ऊपरी मंजिल पर नक्शा पास कराकर निर्माण कार्य करा रहे हैं लेकिन इसी बीच दो-तीन बार एमडीडीए के कुछ लोग वहां पहुंचे तो होटल स्वामी ने उन्हें पूछा कि जब वह नक्शा पास कराकर सही तरीके से निर्माण करा रहे हैं तो वह फिर बार-बार क्यों यहां आ रहे हैं तो एमडीडीए के एक छोटे अधिकारी ने बताया कि मीडिया के एक व्यक्ति द्वारा इस निर्माण की शिकायत की जा रही है कि यह अवैध निर्माण है जबकि वह निर्माण शत-प्रतिशत सही हो रहा है। ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि जब राज्य के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने के लिए आगे आ रखे है तो फिर एमडीडीए के चंद छोटे अफसरों की छत्र छाया में मीडिया का यह दलाल कैसे वहां दलाली का खेल खेल रहा है? चर्चा यहां तक है कि यह दलाल बडे निर्माणों की शिकायत शुरूआती दौर में ही कराकर उनसे वहां खुद निर्माण कार्य कराने का पूरा ठेका लेता है और उसके बाद वह अवैध निर्माण को अमलीजामा पहनाकर धन कमाता है और कुछ धन वह एमडीडीए के चंद छोटे अफसरों को भी उपहार स्वरूप देता है? ऐसे में विजिलेंस की नजर कब इस दलाल पर पडेगी यह देखने वाली बात है?
