देहरादून(संवाददाता)। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे विश्वासपात्र मुख्यमंत्री बन चुके पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार को खत्म करने की जो सौगंध खाई है उस पर उन्होंने अपने कदम आगे बढाने शुरू कर दिये हैं और इक्कीस साल में पहली बार राज्य का कोई आईएएस अफसर आय से अधिक सम्पत्ति रखने के मामले में अगर सलाखों के पीछे पहुंचा है तो यह मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी का ही इकबाल था कि उन्होंने आईएएस अफसरों की लॉबी को देखते हुए भी भ्रष्टाचार पर सख्त रूख अपनाते हुए आईएएस अफसर को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आईएएस अफसर रामविलास यादव को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के बाद राज्य की जनता की उम्मीदें मुख्यमंत्री से बंध चुकी हैं अब उनके शासनकाल में बाकी ‘रामविलासोंÓ खैर नहीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस जिंदादिली से उनका वैलकम करते हुए उन्हें राज्य के पथ पर तेजी के साथ आगे बढने का आशीर्वाद दिया है उसने राज्य के भाजपा नेताओं और अफसरशाही को भी संदेश दिया है कि पुष्कर के बताये रास्ते पर जो आगे नहीं बढेगा वह पुष्कर की टीम का हिस्सा नहीं रहेगा क्योंकि उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पुष्कर सिंह धामी ने एकसाथ आगे आकर प्रतिज्ञा ली है कि नये दौर में मिलकर लिखेंगे नई कहानी।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत में जिस तरह से एतिहासिक जीत दर्ज करी और उसके बाद वह देश के प्रधानमंत्री से राज्य को विकास की ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए उनसे आशीर्वाद मांगने के लिए दिल्ली गये तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुष्कर सिंह धामी का जिस भव्य अंदाज में उनका वैलकम किया उससे उत्तराखण्ड के अधिकांश भाजपा नेताओं और इक्कीस साल से भ्रष्टाचार का तांडव करने वाले भ्रष्ट अफसरों को इस बात का इल्म हो गया कि पुष्कर राज में अब भ्रष्टाचार पर विराम लगना तय है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दस माह के भीतर जिस तरह से विश्वास जीता है उसी का परिणाम है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब-जब उत्तराखण्ड आये तो उन्होंने पुष्कर सिंह धामी को कभी उनके कंधे थपथपाते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और कभी उनका हाथ थामकर उन्हें साफ संदेश दिया कि वह दोनो मिलकर उत्तराखण्ड में विकास की एक नई कहानी लिखेंगे। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर हमेशा पुष्कर सिंह धामी में एक नई ऊर्जा का संचार होते हुए दिखाई दिया और यही कारण है कि जब भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली से लौटकर उत्तराखण्ड आये तो उन्हें प्रधानमंत्री ने फ्रीहैंड होकर काम करने का आशीर्वाद दिया। इसी आशीर्वाद का परिणाम है कि उत्तराखण्ड के इक्कीस साल के इतिहास में पहली बार ऐसा मुख्यमंत्री राज्य में दिखाई दिया जिसने भ्रष्टाचार के दलदल से बेनामी सम्मपत्ति का साम्राज्य खडा करने वाले आईएएस रामविलास यादव को गिरफ्तार कराकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। उत्तराखण्ड के इक्कीस साल के इतिहास में बडे से बडे भ्रष्टाचार व घोटाले हुये और इन घोटालों की जांच भी हुई और जांच में कुछ अफसर दोषी भी पाये गये लेकिन उन्हें बाद में कुछ सरकारों के कार्यकाल में क्लीनचिट भी मिलती रही जिससे राज्य में भ्रष्टाचारमुक्त सरकार के दावे हमेशा टॉय-टॉय फिस्स होते रहे। उत्तराखण्ड में काफी नेताओं, अफसरों और दलालों का एक त्रिकोणीय गठजोड़ बना रहा जिन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार का खेल खेलकर अकूत सम्पत्ति अर्जित की लेकिन इन पर आज तक न तो सरकार की नजर गई और न ही विजिलेंस ने इनकी बेनामी सम्पत्तियों को खंगालने का साहस दिखाया। मीडिया के कुछ दलालों जिन्हें एक सीमित वेतन मिलता है उन्होंने चंद समय में ही कुछ भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के साथ मिलकर दलाली का खूब खेल खेला और वह चंद वर्षों में ही अकूत सम्पत्ति के मालिक बन बैठे? ऐसे त्रिकोणीय गठजोड को खंगालने के लिए आज तक किसी सरकार ने साहस नहीं दिखाया लेकिन पुष्कर सरकार में तय माना जा रहा है कि अभी एक ‘रामविलासÓ सलाखों के पीछे पहुंचा है लेकिन अब उन और ‘रामविलासोंÓ की खैर नहीं है जिन्होने इक्कीस साल से भ्रष्टाचार और दलाली का खेल खेलते हुए दौलत का बडा खजाना खडा कर रखा है?
