भ्रष्टाचार से आजादी दिलायेंगे धामी

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। इक्कीस सालों से राज्यवासी अधिकांश सरकारों में हुये भ्रष्टाचार के जहर को पीते-पीते इतनी तंग आ गई कि उसे यह शर्मिंदगी महसूस होने लगी थी कि क्या उत्तर प्रदेश से नये उत्तराखण्ड के लिए सिर्फ इस बात के लिए लडाई लडी गई थी कि राज्य में उन्हें फिर से भ्रष्टाचार और घोटालों का जहरीला घूट पीना पडेगा? उत्तराखण्ड में पनप रहे भ्रष्टाचार की जडे इस कदर फैल गई कि उसका इलाज किसी को भी सम्भव नजर नहीं आया और राज्य एक बार फिर भ्रष्टाचार का गुलाम बन गया और इस गुलामी ने आवाम के मन में एक निराशा पैदा कर दी थी कि अब शायद भविष्य में कभी भी उन्हें भ्रष्टाचारी रूपी रावण से निजात नहीं मिल पायेगी लेकिन जैसे ही उत्तराखण्ड में चंद माह के लिए पुष्कर सिंह धामी को सत्ता मिली तो उन्होंने सबसे पहले आवाम के लिए नासूर बन चुके भ्रष्टाचार का अंत करने का संकल्प लिया और उसी के चलते विजिलेंस को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने की खुली आजादी दी जिसके चलते अब उत्तराखण्डवासियों को एक उम्मीद जगने लगी है कि उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार से आजादी दिलाने के लिए पुष्कर सिंह धामी आगे आ गये हैं और उनका यही मानना है कि विजिलेंस का तंत्र बहुत छोटा है जो सम्भवत: भ्रष्टाचार के बडे-बडे मगरमच्छों को अपने जाल में नहीं फंसा पायेगी इसलिए विजिलेंस का दायरा बडा करना पडेगा और विजिलेंस को बडे भ्रष्ट अफसरों पर कार्यवाही करने के लिए उन्हें पहले सचिवालय से अनुमति लेने की कोई जरूरत न हो तभी राज्य में फैले बडे-बडे भ्रष्टाचारियों के चेहरे बेनकाब हो पायेंगे?
उत्तराखण्ड में हर दल की सरकार के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने दम भरा था कि राज्य में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत कार्यवाही की जायेगी लेकिन उनके यह आदेश सिर्फ हवाबाजी तक ही सीमित होकर रह गये और अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार व घोटालों का काला खेल इस कदर उफान पर रहा कि राज्य की जनता भ्रष्टाचार को मजबूरी में सहन करती रही क्योंकि कुछ पूर्व मुख्यमंत्री अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को हिटलर की तरह दबाने के लिए खाकी का इस्तमाल खुलकर करते रहे और चंद बडे राजनेताओं के इशारे पर सच की आवाज उठाने वालों पर फर्जी मुकदमें लिखवाने का भी तांडव देखने केा मिलता रहा जिससे हमेशा यह बहस शुरू हुई कि क्या चंद राजनेताओं और खाकी की शपथ लेने वाले कुछ अफसर अपनी कुर्सी बचाने के लिए वर्दी को ही नीलाम करने से पीछे नहीं हट रहे हैं? इक्कीस सालों में तो किसी भी सरकार में भ्रष्टाचार का अध्याय बंद नहीं हुआ लेकिन राज्य में दस माह से सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त देश के सपने को पूरा करने के लिए उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार का अंत करने का संकल्प लिया हुआ है। हालांकि उत्तराखण्ड में आज भी दर्जनों सफेदपोश व काफी संख्या में अफसरशाही ऐसी है जिन्होंने उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार के समुद्र में गोते लगाकर अकूत सम्पत्ति का साम्राज्य खडा कर रखा है और इस साम्राज्य को भेद पाना आज तक विजिलेंस के बस में दिखाई नहीं दिया। विजिलेंस की रडार सिर्फ उन छोटे कर्मचारियों पर रही जिनके खिलाफ किसी ने रिश्वत मांगने की शिकायत कर दी। उत्तराखण्ड के अन्दर विजिलेंस का ढांचा पॉवरफुल नजर नहीं आता क्योंकि अगर किसी बडे भ्रष्ट अफसर पर उसे आनन-फानन में कार्यवाही करने के लिए आगे आना हो तो यह सम्भव ही नहीं हो पायेगा क्योंकि जब तक बडे भ्रष्ट अफसर के खिलाफ कार्यवाही करने की सचिवालय से अनुमति नहीं मिल जायेगी तब तक विजिलेंस उस भ्रष्ट अफसर को अपने शिकंजे में नहीं कर पायेगी? हालांकि अब जिस तरह से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस तरह से अपनी आवाज बुलंद की है उससे भ्रष्टाचारियों के मन में एक डर जरूर देखा जा रहा है और उनका साफ मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडी जाने वाली जंग में किसी का चेहरा देखकर कार्यवाही नहीं की जायेगी और जो भी राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार करता हुआ पाया गया उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। अब उत्तराखण्डवासियों को एक उम्मीद जग गई है कि पुष्कर सिंह धामी उन्हें आने वाले कुछ ही समय में भ्रष्टाचार से आजादी दिला देंगे।

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