बाल आयोग, जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को लिखा पत्र

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देहरादून(संवाददाता)। स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस लागू करने को लेकर एनएपीएसआर ने बाल आयोग का दरवाजा खटखटाया है। यहां विकासनगर मे हुई बस दुर्घटना को लेकर नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (एनएपीएसआर) ने राज्य बाल आयोग समेत जिलाधिकारी देहरादून, मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून व उप जिलाधिकारी विकासनगर को पत्र लिख कर स्कूल बसों के लिए जारी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराने हेतु मांग की है ।
इस अवसर पर देहरादून मे जहाँ एक ओर एनएपीएसआर के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट सुदेश उनियाल ने पत्र लिखे तो वही दूसरी ओर नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (एनएपीएसआर) की पछवादून शाखा के अध्यक्ष अरविंद शर्मा, महासचिव रमन ढींगरा, कोषाध्यक्ष कमलेश शर्मा के साथ अन्य साथियों ने उपजिलाधिकारी विकासनगर को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स (एनएपीएसआर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूलों मे बस संचालन के लिए गाइडलाइंस जारी की हुई हैं । उन्होंने कहा कि जिसके लिए सभी राज्यों मे मोनिटरिंग कमेटी बनी हुई हैं जिसमे शिक्षा विभाग से भी सदस्य होते हैं । किन्तु आज दिनांक तक शिक्षा विभाग द्वारा कभी भी इन स्कूल बसों का संज्ञान नहीं लिया जाता है ।
उन्होंने कहा कि और साथ ही परिवहन विभाग व पुलिस विभाग द्वारा भी इस ओर कोई खास तवज्जो नही दी जाती ये बात और है कि जब कभी कोई इस प्रकार की घटना घटती है तो सम्बंधित व पुलिस विभाग द्वारा दो चार दिन जांच की जाती है शासन स्तर पर इन स्कूलों पर निगरानी मोनिटरिंग कमेटी बनाने की घोषणा होती है और फिर समय के साथ सब ठंडे बस्ते मे डाल दिया जाता है । उन्होंने कहा कि हालांकि इस घटना मे गाड़ी चालक व स्कूल के विरुद्ध आईपीसी की धारा 279,3०4 के तहत मुकदमा पंजीकृत हो चुका है किंतु यहां दोषी सिर्फ चालक नहीं है चालक तो सिर्फ एक कर्मचारी है असली दोषी तो स्कूल संचालक है जो कि स्कूल के अंदर अनफिट गाडिय़ों को खरीद कर उन्हे संचालित करते हैं (जैसा कि इस दुर्घटना मे शामिल बस मे भी देखने को मिला है) और कम क्षमता वाली गाडिय़ों मे संख्या से अधिक छात्रों को भेड़-बकरियों की भांति बच्चों को भरकर सड़क पर सरपट दौड़ाने भेज देते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसा कि इस दुर्घटना मे भी देखने को मिला है और 42 सीट क्षमता वाली बस मे 7० मासूम बच्चों को ढोया जा रहा था, जबकि कोरोना गाइडलाइंस का पालन करने का आश्वासन देकर ही इस समय स्कूल संचालित किए जा रहे हैं 42 सीटर बस मे 7० बच्चों को भरकर न सिर्फ मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा था (एक बाइक पर सवार तीन लोगों का चालान काटने वाले विभागों को 42 सीटर बस मे 7० मासूम बच्चों के जीवन से होता खिलवाड़ आज तक नजर ही नही आया है। उन्होंंने कहा कि बल्कि उत्तराखंड शासनादेशों की भी धज्जियाँ उड़ाते हुए आपदा अधिनियम का भी उलंघन किया है । अत: स्कूल संचालक के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना, उत्तराखंड शासन व शिक्षा विभाग के आदेशों की अवहेलना व कोरोना गाइडलाइंस की अवहेलना करने पर सम्बंधित धाराओं मे मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्योंकि शासनादेश के अनुसार कक्षा एक से कक्षा ०5 को भौतिक रूप से स्कूल आने को बाध्य नही कर सकते स्कूल संचालक और कोरोना गाइडलाइंस के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी अनिवार्य है। किन्तु इस दुर्घटना के शिकार सभी बच्चे बहुत छोटे थे । उन्होंने कहा कि भविष्य मे ऐसी दुर्घटना की पुन:वर्ती दुबारा न हो इसके लिए सम्बंधित विभागों को बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उचित जांच करने व स्कूलों की मनमानियों पर अंकुश लगाने के आदेश जारी करने करने की जरूरत है और साथ ही सम्बंधित विभागों को भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को लागू करवाने के लिए शीघ्र ही मोनेटरिंग कमेटी बनाने को निर्देशित किया जाए जिसमे अभिभावकों को भी उस कमेटी का सदस्य नामित किया जाए ताकि सभी स्कूलों मे रेगुलर जांच हो सके ।

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