दिव्यांग हरिओम की न्याय के लिए जंग

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35 लाख के चेक बाउंस का आरोप
हरक सिंह रावत से जुडे़ विवाद की खुलेंगी परतें
दिव्यांग की फरियाद पर पुलिस जांच तेज
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से जुड़े एक संपत्ति विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। लाखों रुपये के कथित चेक बाउंस, संपत्ति के दस्तावेजों में अनियमितताओं, जमीन पर कब्जे और जान से मारने की धमकियों जैसे गंभीर आरोपों की जांच अब एसपी सिटी के हाथों में पहुंच गई है। दोनों हाथों से दिव्यांग हरिओम सहगल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून से न्याय की गुहार लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एसपी सिटी स्वयं अपनी टीम के साथ मामले की जांच कर रहे हैं और आरोपों में सत्यता मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिकायतकर्ता हरिओम सहगल पिछले कई वर्षों से संपत्ति विवाद को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मकान के सौदे के बाद भुगतान को लेकर विवाद खड़ा हुआ और लाखों रुपये का चेक बाउंस हो गया। इसके बाद मामला अदालतों तक पहुंचा, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका। शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 जून 2021 को देहरादून के खुड़बुड़ा क्षेत्र स्थित एक संपत्ति को लेकर दो विक्रय पत्र निष्पादित किए गए थे। इस लेनदेन में 35 लाख 20 हजार रुपये का चेक पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण वापस लौटने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में जसबीर कौर आनंद, सोनिया आनंद रावत और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत से संबंधित विभिन्न आरोपों की जांच की मांग की गई है। हरिओम सहगल ने अपने शिकायती पत्र में संपत्ति के स्वामित्व, बैंक खातों, अलग-अलग नामों और कथित मेडिकल प्रमाणपत्र की सत्यता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित दस्तावेजों में ऐसी विसंगतियां हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है।
शिकायत में 30 जनवरी 2022 को जबरन बेदखल करने का प्रयास और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी उल्लेख है। इसके अतिरिक्त भवन से लगी भूमि पर कथित कब्जे तथा रास्ता बनाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। प्रकरण में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की भूमिका भी जांच की मांग के दायरे में है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में एमडीडीए द्वारा सील किए गए भवन की सील बाद में कथित रूप से तोड़ दी गई। सवाल यह है कि यदि सील तोड़ी गई थी तो क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी? शिकायतकर्ता ने संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है। मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, थाना प्रेमनगर क्षेत्र के कंडोली से जुड़े इस प्रकरण में हरिओम सहगल ने मकान के लेनदेन, चेक बाउंस और कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायत दी है। शिकायत में जसबीर कौर, आनंद और सोनिया आनंद के नामों का उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी को संपूर्ण जांच के लिए नामित किया है। एसपी सिटी अपनी टीम के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में तथ्य सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू हरिओम सहगल की शारीरिक स्थिति है। दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद वह पिछले कई दिनों से न्याय की मांग को लेकर प्रयासरत हैं। पुलिस अधिकारी ने भी उनकी स्थिति का उल्लेख करते हुए आश्वासन दिया है कि आरोपों में सत्यता पाए जाने पर देहरादून पुलिस उनकी पूरी मदद करेगी। संपत्ति के सौदे से लेकर बैंकिंग लेनदेन, चेक बाउंस, कथित फर्जी दस्तावेज, धमकियों और एमडीडीए की सील तक शिकायत में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन आरोपों की पुष्टि होती है और किनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं।
इस मामले में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत सहित शिकायत में नामित अन्य व्यक्तियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। सवाल यह है कि वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे एक दिव्यांग शिकायतकर्ता के आरोपों की वास्तविकता क्या है? क्या बैंकिंग लेनदेन और संपत्ति के दस्तावेजों की जांच से विवाद की पूरी तस्वीर सामने आएगी? और यदि किसी स्तर पर धोखाधड़ी, धमकी या दस्तावेजों में हेराफेरी के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी? अब एसपी सिटी की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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