रेखा और साहू के संग्राम में कांग्रेस का दंगल

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कैबिनेट मंत्री पर दो सौ दस करोड़ के भ्रष्टाचार के दाग से गर्माई राजनीति
आखिर सैकडों करोड़ के कथित भ्रष्टाचार की कौन करेगा जांच?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में जहां अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी दुष्यंत गौतम को सिक्कम का राज्यपाल बनाये जाने को लेकर कांग्रेस ने सड़कों पर अपना आक्रामक रूख दिखा रखा है तो वहीं सरकार की महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ जहां घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कराया वहीं उनके खिलाफ एससीएसटी एक्ट की धारा भी एफआईआर में अंकित है और अब सरकार ने इस मामले को लेकर एक बडी एसआईटी बनाई है लेकिन सवाल खडा हो रहा है कि एसआईटी का गठन तो ब्लाइंड केस की श्रेणी में आता है और पति-पत्नी के विवाद में एसआईटी का गठन होने से एक नई बहस छिड गई है। उत्तराखण्ड के अन्दर एक बहस चल उठी है कि एसआईटी एक मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की क्या जांच करेगी क्योंकि वह तो सरकार के अधीन है इसलिए रेखा आर्य के पति ने जो अपनी पत्नी पर दो सौ दस करोड का अम्पायर खडा करने का आरोप लगाया है वह संगीन आरोप है और इसका सच सामने लाने के लिए किसी निष्पक्ष एजेंसी से उसकी जांच होगी तो साहू के आरोप का सारा सच सामने आयेगा कि उन्होंने अपनी पत्नी पर भ्रष्टाचार का जो दाग लगाया है वह सही था या झूठ का पुलिंदा। वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने हुंकार भरी कि रेखा आर्य द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सरकार की नाक के नीचे हुआ है और सरकार मौन रही है।
उत्तराखण्ड की राजनीति में इन दिनों दो बड़े विवादों ने सरकार को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। एक ओर अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का कांग्रेस विरोध कर रही है, तो दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच छिड़े विवाद ने सत्ता के गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा सहित गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर में एससी-एसटी अधिनियम की धाराएं शामिल होने की भी बात सामने आई है। इस प्रकरण में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए जाने की खबर के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जांच केवल मंत्री के पति के खिलाफ लगे आरोपों तक सीमित रहेगी या फिर मंत्री पर लगाए गए 210 करोड़ रुपये के आर्थिक साम्राज्य संबंधी आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होगी?
गिरधारी लाल साहू ने अपनी पत्नी पर कथित तौर पर 210 करोड़ रुपये का आर्थिक साम्राज्य खड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह आरोप कितना सही है और कितना गलत, इसका फैसला किसी राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही संभव है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि पति-पत्नी के बीच शुरू हुए इस विवाद में एसआईटी के गठन की चर्चा ने नई बहस को जन्म दे दिया है। हालांकि एसआईटी का गठन केवल ब्लाइंड केस में ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जटिल मामलों में भी किया जा सकता है। इसके बावजूद सवाल अपनी जगह कायम है कि जब एक पक्ष के आरोपों की जांच के लिए विशेष टीम बनाई जा सकती है तो दूसरे पक्ष द्वारा लगाए गए करोड़ों रुपये के आर्थिक आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए? सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मामला किसी सामान्य परिवार का नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की एक जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री से जुड़ा है। ऐसे में सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ जाती है। यदि मंत्री पर लगाए गए आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच से उनकी स्थिति स्पष्ट होगी और यदि आरोपों में कोई सच्चाई है तो वह भी जनता के सामने आनी चाहिए।
उधर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस और विभिन्न संगठनों की नाराजगी भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में कथित वीआईपी की पहचान और जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। उत्तराखण्ड में अब बहस केवल मुकदमे और एसआईटी तक सीमित नहीं रह गई है। सवाल सत्ता की पारदर्शिता और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता का भी है। जब एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ उनका अपना पति 210 करोड़ रुपये के आर्थिक साम्राज्य का आरोप लगा रहा हो, तो क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि इन आरोपों का सच भी जनता के सामने लाया जाए? क्योंकि यदि आरोप झूठे हैं तो उनका पर्दाफाश होना चाहिए और यदि आरोपों में दम है तो कानून के सामने पद और प्रभाव कोई मायने नहीं रखने चाहिए। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार केवल घरेलू विवाद की जांच कराएगी या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों की तह तक जाने का भी साहस दिखाएगी।

रेखा आर्य की अवैध सम्पत्ति की हो जांच
देहरादून(नगर संवाददाता)। प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े उनके पति गिरधारी लाल साहू द्वारा लगाए गए 21० करोड़ रुपये की संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित करने के कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में अधिवक्ता एवं कानूनराज के संस्थापक पंकज सिंह क्षेत्री ने सतर्कता अधिष्ठान, उत्तराखंड में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच एवं नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने शिकायत के अनुसार कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू ने बीते रोज जारी एक वीडियो में रेखा आर्या के पास लगभग 21० करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति होने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि इस सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोप की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने संबंधित जांच एजेंसी से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि जब किसी सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति से संबंधित इतनी बड़ी राशि की कथित संपत्ति का मामला सार्वजनिक होता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जनहित में आवश्यक है। हालांकि, केवल किसी वीडियो में आरोप लगाए जाने से आरोपों की सत्यता सिद्ध नहीं होती। इसलिए संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए। उन्होंने शिकायत में मांग की गई है कि संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों, आय के ज्ञात एवं वैध स्रोतों, निवेश, बैंक खातों, एफडी, शेयरों, कंपनियों तथा अन्य वित्तीय हितों से संबंधित अभिलेखों का नियमानुसार परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि साथ ही, यह भी जांच की जाए कि संबंधित संपत्तियां वैध आय के स्रोतों से अर्जित की गई हैं अथवा नहीं और उनके संबंध में आवश्यक वैधानिक घोषणाएं एवं विवरण प्रस्तुत किए गए हैं या नहीं किए गए है। शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1) (इ) एवं 13(2) का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि जांच में संबंधित कानूनी प्रावधानों के आवश्यक तत्व और अपराध के पर्याप्त आधार सामने आते हैं, तो नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
पंकज सिंह क्षेत्री ने यह भी मांग की है कि जांच ऐसे सक्षम अधिकारी से कराई जाए, जिस पर किसी प्रकार के अनुचित दबाव या पक्षपात की आशंका न हो। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए तथा निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर निकाले जाएं। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति की राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। यदि आरोप निराधार हैं, तो निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिएय और यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने सतर्कता अधिष्ठान से शिकायत पर विधिवत संज्ञान लेकर प्रारंभिक जांच करने, उपलब्ध वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। इस दौरान उनके साथ एडवोकेट अल्का शर्मा, अजय धीमान भी मौजूद रहे।

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