हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ पर संग्राम

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राहुल पर मुकदमें से कांग्रेस आगबबूला
सात सितम्बर को सड़क और अदालत दोनो में हलचल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। हल्द्वानी में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद वहां का शुद्धिकरण को किये जाने को लेकर भाजपा व कांग्रेस आमने-सामने आ रखे हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष इस बात को लेकर बेहद नाराज हैं कि सांसद व कैबिनेट मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में कहा था कि वह इस मामले की जांच करायेंगे और इस घटना पर उन्होंने दुख भी प्रकट किया था लेकिन अभी तक इस मामले में दोषियों के खिलाफ मुकदमा तक कायम नहीं किया गया। मल्लिकार्जुन खरगे का साफ कहना है कि यह मामला शुद्धिकरण का नहीं बल्कि छुआछुत का है और उन्होंने जेपी नड्डा को पाती भी लिखी है। वहीं संसद में कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में एससीएसटी का मुकदमा दर्ज होने पर कांग्रेस उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस आग बबूला है और यही कारण है कि सात सितम्बर को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास कूच का खुला ऐलान कर रखा है जिसमें कांग्रेस प्रभारी भी शामिल होंगी और उसी दिन उच्च न्यायालय में भी शुद्धिकरण को लेकर दायर की गई पीआईएल पर सुनवाई होनी है जिससे उत्तराखण्ड की सियासत में एक बडी तपिश देखने को मिल रही है।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। मामला अब हल्द्वानी से निकलकर देहरादून और दिल्ली तक पहुंच गया है। कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को महज शुद्धिकरण नहीं, बल्कि छुआछूत से जोड़ते हुए सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस मामले को लेकर खासे नाराज बताए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संसद में इस प्रकरण की जांच कराने और घटना पर दुख जताने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। खरगे ने इस मामले को गंभीर सामाजिक मुद्दा बताते हुए जेपी नड्डा को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है कि यह केवल किसी स्थान के शुद्धिकरण का मामला नहीं, बल्कि छुआछूत की मानसिकता से जुड़ा सवाल है। कांग्रेस का आरोप है कि संविधान और सामाजिक समानता की बात करने वाली सरकार के सामने इस मामले में कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
इधर हल्द्वानी में कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस का गुस्सा और बढ़ गया है। उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। दोनों मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने अब सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 7 सितंबर को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास कूच का ऐलान किया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के साथ कांग्रेस प्रभारी के भी इस आंदोलन में शामिल होने की बात कही जा रही है। ऐसे में राजधानी देहरादून में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के साथ सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि 7 सितंबर को ही हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धिकरण को लेकर दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई प्रस्तावित है। एक तरफ अदालत में मामले की कानूनी तस्वीर साफ होगी, तो दूसरी तरफ कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास तक मार्च कर सरकार को राजनीतिक रूप से घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सात सितंबर उत्तराखंड की सियासत के लिए बेहद अहम दिन माना जा रहा है। हल्द्वानी का शुद्धिकरण, खरगे की नाराजगी, राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा और कांग्रेस का मुख्यमंत्री आवास कूचकृइन तमाम घटनाक्रमों ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव का जवाब किस तरह देती है और अदालत में मामले की सुनवाई से क्या दिशा निकलती है।

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