रुद्रपुर में सियासी संग्राम

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कांग्रेसी-भाजपा आमने-सामने
उदय भानु चिब की हुंकार से गरमाया शहर
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर की सियासत में आज एक बार फिर जबरदस्त उबाल देखने को मिला। पिछले कई दिनों से चल रही भाजपा-कांग्रेस की सियासी खींचतान ने आज उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण, राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफ आई आर और देश-प्रदेश में सांप्रदायिकता एवं जातिगत भेदभाव के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पहले से ही सरकार पर हमलावर थी। शुक्रवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता, किच्छा विधायक एवं पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ के आवास पर हुई बैठक में भी कार्यकर्ताओं को रुद्रपुर पहुंचने का आह्वान किया गया था। सुबह से ही रुद्रपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाजाही शुरू हो गई। कुमाऊं के अलग-अलग क्षेत्रों में भी युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया था। नैनीताल और रामनगर में शुक्रवार को बाकायदा ‘कॉल फॉर प्रोटेस्ट’ अभियान चलाकर युवाओं से रुद्रपुर पहुंचने की अपील की गई थी। इसके बाद कलेक्ट्रेट में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन दिखाई दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब की मौजूदगी ने स्थानीय प्रदर्शन को प्रदेश स्तर का राजनीतिक रंग दे दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने मुद्दों को लेकर प्रशासन के सामने विरोध दर्ज कराया। पूरे विवाद की सबसे बड़ी चिंगारी हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण को बताया जा रहा है। कांग्रेस ने इस घटना को केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि सामाजिक और जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए भाजपा पर हमला बोला है। युवा कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में किसी नेता की राजनीतिक विचारधारा से असहमति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थान को लेकर इस तरह की कार्रवाई सामाजिक सौहार्द के लिए सवाल खड़े करती है। यही मुद्दा अब रुद्रपुर के कलेक्ट्रेट तक पहुंच चुका है।
कांग्रेस के विरोध की दूसरी बड़ी वजह राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफ आई आर है। युवा कांग्रेस ने अलग-अलग जिलों में इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया था। नैनीताल में शुक्रवार को गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ एफ आई आर की निंदा की और शनिवार को रुद्रपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया। यानी रुद्रपुर का प्रदर्शन महज स्थानीय मुद्दा नहीं रहाकृइसके पीछे कांग्रेस ने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के मुद्दों का पूरा एजेंडा खड़ा कर दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, कुछ दिन पहले एस आई आर की बैठक में भिड़े थे ठुकराल और शिव अरोड़ा रुद्रपुर की मौजूदा सियासी गर्मी को समझने के लिए पिछले दिनों का घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण है। एस आई आर से जुड़ी बैठक के दौरान भाजपा विधायक शिव अरोड़ा और पूर्व कांग्रेस विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच तीखी नोकझोंक और विवाद सामने आया था। इसके बाद मामला धरने-प्रदर्शन और मुकदमे तक पहुंच गया। कांग्रेस ने ठुकराल के खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया तो भाजपा की ओर से भी कांग्रेस पर पलटवार किया गया। यही वजह है कि आज का कलेक्ट्रेट प्रदर्शन रुद्रपुर में चल रहे उस भाजपा-कांग्रेस सियासी टकराव की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

ठुकराल की तबीयत बिगड़ने की खबर ने बढ़ाई हलचल
प्रदर्शन के बीच पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की तबीयत बिगड़ने की खबर ने भी कार्यकर्ताओं के बीच हलचल पैदा कर दी। ठुकराल पिछले कई दिनों से रुद्रपुर के राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में बने हुए हैं। एस आई आर विवाद के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर कांग्रेस लगातार मुखर रही है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान उनकी तबीयत खराब होने की सूचना ने मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी। हालांकि ठुकराल की तबीयत बिगड़ने की स्थिति और उनके उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
रुद्रपुर में पिछले कुछ दिनों की राजनीति पर नजर डालें तो तस्वीर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं।पहले बैठक में टकराव, फिर मुकदमे की राजनीति, फिर धरना-प्रदर्शन,और अब राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट घेराव। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई बता रही है, जबकि भाजपा की ओर से कांग्रेस पर राजनीतिक माहौल गरमाने के आरोप लग सकते हैं।यानी रुद्रपुर में अब मुकाबला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। दोनों दल सड़क पर अपनी ताकत दिखाने की होड़ में नजर आ रहे हैं। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को रुद्रपुर लाकर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहती। नैनीताल, रामनगर समेत कुमाऊं के अन्य क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं को जोड़ने की कोशिश बताती है कि कांग्रेस इसे बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर भाजपा के सामने चुनौती है कि वह कांग्रेस के इस आक्रामक आंदोलन का राजनीतिक जवाब किस तरीके से देती है। रुद्रपुर बना उत्तराखंड की सियासत का नया ‘हॉटस्पॉट’ ऊधम सिंह नगर की राजनीति हमेशा से प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण रही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में रुद्रपुर जिस तरह लगातार सुर्खियों में है, उसने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। एक तरफ विधायक शिव अरोड़ा से जुड़ा विवाद, दूसरी तरफ पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को लेकर कांग्रेस का आक्रामक रुख और अब युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का रुद्रपुर पहुंचनाकृसियासी समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के माहौल में भी ठुकराल का कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ शोभायात्रा का स्वागत करना राजनीतिक चर्चा का विषय बना था।
रुद्रपुर में शनिवार का प्रदर्शन कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन जरूर रहा, लेकिन असली राजनीतिक परीक्षा अब इसके बाद शुरू होगी। क्या भाजपा इस प्रदर्शन का जवाब सड़क पर उतरकर देगी? क्या कांग्रेस आंदोलन को जिले के दूसरे हिस्सों तक ले जाएगी? क्या ठुकराल प्रकरण आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा? और सबसे बड़ा सवाल , क्या रुद्रपुर का यह सियासी टकराव आने वाले दिनों में पूरे उत्तराखंड की राजनीति को प्रभावित करेगा? फिलहाल इतना साफ है कि रुद्रपुर की राजनीति में चिंगारी सुलग चुकी है और दोनों तरफ से तेवर तल्ख हैं।कलेक्ट्रेट में आज उठी नारों की गूंज शायद यहीं खत्म होने वाली नहीं हैकृअब नजर भाजपा के अगले कदम और कांग्रेस की अगली रणनीति पर है।

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