धामी बोलेः युवाओं की मेहनत को मिला हक

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पांच साल में हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी का मिला तोहफा
सिफारिश नहीं, मेहनत के दम पर मिल रही नौकरी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के अन्दर युवाओं को रोजगार देने की दिशा में जो नई उडान भर रखी है उसने युवा पीढ़ी के मन में पांच साल से एक नई उम्मीद जगा रखी है कि अब राज्य के अन्दर उनकी मेहनत का उन्हें फल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में हजारों युवाओं को नौकरियों का जो तोहफा दिया है वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज इसी कडी में एक बार फिर मुख्यमंत्री ने एक सौ एक युवाओं को सरकारी नियुक्तियों का जो तोहफा दिया है उससे उनके चेहरे खिलखिला गये। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यह नियुक्ति पत्र युवाओं की मेहनत को मिला है। उत्तराखण्ड के अन्दर अब यह बात तो शीशे की तरह साफ हो गई है कि युवाओं को मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी मिल रही है और नौकरी में सिफारिश का कोई खेल नहीं चल रहा है जिससे युवाओं को भरोसा है कि अब राज्य के अन्दर वही सरकारी नौकरियों में एंट्री कर पायेंगे जो इसके हकदार होंगे क्योंकि अब नकल माफियाओं का सारा साम्राज्य ध्वस्त हो चुका है और इसी के चलते मेहनत करने वाले हजारों युवाओं को धामी सरकार में सरकारी नियुक्तियों का तोहफा मिल चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में पशुपालन विभाग तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के 101 नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी और 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवा सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सेवा की जिम्मेदारी है। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ काम करने तथा किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। उन्होंने दावा किया कि अब सरकारी नौकरी सिफारिश या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही है। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने का दावा भी मुख्यमंत्री ने किया।
धामी ने कहा कि पशुपालन और गन्ना विकास विभाग सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। पशुपालन को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत आधार बनाने के लिए मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन संचालित किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को विभिन्न पशुपालन इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और पशु चिकित्सा सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों के हित में उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गन्ना सर्वेक्षण व्यवस्था को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को उन्नत गन्ना प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में पांच रुपये प्रति कुंतल अधिक गन्ना मूल्य दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। उन्होंने शासकीय कामकाज में ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ को मूल मंत्र बनाकर काम करने की नसीहत दी।

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