सड़क से सुरंग, पर्यटन से निवेश तक

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धामी ने बदली विकास की तस्वीर
अब गांव-गांव रोजगार देने का विजन
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड के विकास की कहानी लंबे समय तक सड़कों, पलायन और पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच उलझी रही। लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों में सरकार ने विकास की दिशा को केवल मैदानी शहरों तक सीमित रखने के बजाय कनेक्टिविटी, पर्यटन, निवेश, रोजगार और सीमांत क्षेत्रों को विकास के केंद्र में लाने की कोशिश की है। धामी सरकार के कार्यकाल में सड़क और सुरंग परियोजनाओं से लेकर रोपवे, रेल और हवाई कनेक्टिविटी तक बुनियादी ढांचे पर जोर दिखाई दिया है। चारधाम यात्रा को सुविधाजनक बनाने के साथ धार्मिक पर्यटन के दायरे को बढ़ाने, शीतकालीन पर्यटन को नई पहचान देने और होमस्टे जैसी योजनाओं के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी सरकार का फोकस रहा है।
सरकार की दूसरी बड़ी कोशिश निवेश को रोजगार से जोड़ने की रही है। उत्तराखंड में निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में किए गए प्रयासों का असली लाभ तभी माना जाएगा, जब इसका सीधा असर स्थानीय युवाओं की जेब और गांव की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे। यही वह बिंदु है जहां धामी सरकार के पांच साल का सबसे महत्वपूर्ण मूल्यांकन होना चाहिए। पहाड़ की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ पलायन नहीं, अवसरों का अभाव रहा है। युवा इसलिए गांव नहीं छोड़ता कि उसे पहाड़ से प्रेम नहीं, बल्कि इसलिए कि उसे शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर अपने घर के आसपास नहीं मिलते। ऐसे में सड़क पहुंचने के बाद अगला सवाल रोजगार का है, पर्यटन बढ़ने के बाद अगला सवाल स्थानीय हिस्सेदारी का है और निवेश आने के बाद अगला सवाल स्थानीय युवाओं की भागीदारी का है।
धामी सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों, पर्यटन, होमस्टे और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर गांव की अर्थव्यवस्था को नीचे से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सीमांत क्षेत्रों के विकास को भी महज सड़क निर्माण नहीं, बल्कि वहां आबादी और आर्थिक गतिविधियां बनाए रखने से जोड़ना जरूरी है। इसी के साथ मुख्यमंत्री की सरकार ने नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता जैसे फैसलों के जरिए उत्तराखंड को नीतिगत स्तर पर भी अलग पहचान देने की कोशिश की है। नशामुक्त उत्तराखंड का अभियान भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें विकास के साथ युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने का लक्ष्य जुड़ा है। अब धामी सरकार के सामने अगली चुनौती और बड़ी है। विकास की इन परियोजनाओं को पहाड़ के आखिरी गांव तक पहुंचाना और वहां के युवा को यह भरोसा देना कि बेहतर भविष्य के लिए उसे अपना गांव छोड़ना जरूरी नहीं। अगर सड़क गांव तक पहुंची है तो रोजगार भी पहुंचे, अगर पर्यटक पहाड़ तक आया है तो उसकी कमाई का हिस्सा स्थानीय परिवार तक पहुंचे, अगर निवेश आया है तो नौकरी में स्थानीय युवा की हिस्सेदारी होकृयही वह अगला पड़ाव है, जहां धामी सरकार के पांच साल के विकास मॉडल की असली सफलता तय होगी। क्योंकि उत्तराखंड का विकास केवल बड़े प्रोजेक्टों से नहीं मापा जाएगा। उसकी सबसे बड़ी तस्वीर तब बनेगी, जब पहाड़ का युवा पहाड़ में रहकर अपने भविष्य की कहानी लिख सके।

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