बदलेगा ऋषिकेश का चेहरा

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धामी ने महायोजना पर तेज की कवायद
धर्मनगरी के विकास को सचिव राजेश ने संभाला मोर्चा
देहरादून। ऋषिकेश का चेहरा बदलने के लिए मुख्यमंत्री ने महायोजना पर अपनी कवायद तेज कर दी है और ऋषिकेश के विकास का नया खाका उनके सचिव ने खिंचना शुरू कर दिया है। भवनों की ऊंचाई से ट्रैफिक पार्किंग के मानक तय करने के लिए महामंथन हुआ और महायोजना को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री ने अपनी हरी झंडी दे दी है। पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच ऋषिकेश के विकास के लिए बड़ा प्लान तैयार किया गया है और इस प्लान में पर्यावरण को भी बडी प्राथमिकता देने के लिए सचिव ने एक बडी रूपरेखा तैयार की है।
देश-दुनिया में अपनी आध्यात्मिक पहचान रखने वाले ऋषिकेश के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को अब नियोजित दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। बढ़ते पर्यटन, लगातार बढ़ते यातायात और तेजी से फैलती आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियों के बीच धामी सरकार ने ऋषिकेश महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार की कोशिश है कि शहर का विस्तार जरूरत के मुताबिक हो, लेकिन विकास की दौड़ में ऋषिकेश की प्राकृतिक और पर्यावरणीय पहचान प्रभावित न हो। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में महायोजना से जुड़े लंबित मामलों, भवनों की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, यातायात व्यवस्था तथा आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से मंथन किया गया।
ऋषिकेश महायोजना का क्षेत्र तीन जिलों तक फैला होने के कारण इसके नियोजन की जिम्मेदारी भी चुनौतीपूर्ण है। शासन ने तीनों विकास प्राधिकरणों से उनके क्षेत्र से संबंधित प्रस्ताव मांगे थे। टिहरी और पौड़ी प्राधिकरणों की ओर से प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा दिए गए हैं। बैठक में इन प्रस्तावों के साथ संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियों और तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा की गई। महायोजना में भवनों की ऊंचाई को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय की तैयारी है। अधिकारियों ने क्षेत्र की जरूरत, सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए भवन ऊंचाई निर्धारित करने के प्रस्तावों पर चर्चा की। टिहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की मौजूदगी और विकास की संभावनाओं को देखते हुए भवन ऊंचाई को मैदानी क्षेत्रों के मानकों के अनुरूप रखने का अनुरोध किया गया है। वहीं पौड़ी क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा होने के कारण यहां परिस्थितियां अलग हैं। इस क्षेत्र में पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवनों की ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया है। ऋषिकेश में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ वाहनों का दबाव, पार्किंग की समस्या और सड़कों पर बढ़ती भीड़ भी शहर के लिए चुनौती बन रही है। महायोजना में अब इन समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के निर्धारण के साथ सड़क नेटवर्क, पार्किंग, यातायात व्यवस्था और आधारभूत ढांचे को भी महायोजना का हिस्सा बनाया जाएगा। उद्देश्य साफ है कि आने वाले वर्षों में शहर पर बढ़ने वाले दबाव का सामना करने के लिए व्यवस्था पहले से तैयार रहे। ऋषिकेश की पहचान केवल धार्मिक पर्यटन से नहीं है। गंगा, जंगल और आसपास का प्राकृतिक परिवेश इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। इसलिए सरकार के सामने चुनौती विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की है।
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महायोजना तैयार करते समय स्थानीय जरूरतों के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखा जाए। विशेष रूप से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों में निर्माण और विकास गतिविधियों के नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। महायोजना से जुड़े लंबित मामलों को लेकर शासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। सचिव आवास ने संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तकनीकी या विभागीय स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने को कहा गया है। सरकार की मंशा ऋषिकेश को ऐसा आधुनिक और सुव्यवस्थित पर्यटन केंद्र बनाने की है जहां धार्मिक आस्था के साथ सुविधाएं हों, पर्यटन के साथ रोजगार बढ़े, लेकिन प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहे। दरअसल, ऋषिकेश अब उस मोड़ पर खड़ा है जहां अनियोजित विस्तार भविष्य में बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए महायोजना केवल जमीन के इस्तेमाल का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के ऋषिकेश की तस्वीर और तकदीर तय करने वाला महत्वपूर्ण खाका होगी। अब देखना यह होगा कि कागज पर तैयार होने वाली यह योजना कितनी मजबूती से जमीन पर उतरती है। क्योंकि ऋषिकेश को सिर्फ खूबसूरत नहीं, सुव्यवस्थित, सुरक्षित, सुविधायुक्त और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ शहर बनाना ही असली चुनौती है।

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