एक्शन के विरोध में इस्तीफों का खेल न हो जाये शुरू?
देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखंड क्रांति दल में इन दिनों सियासत उबाल पर है। आक्रामक तेवरों के साथ पहाड़ के सवालों को सड़क से सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने वाले युवा नेता आशुतोष नेगी के छह साल के निष्कासन ने दल के भीतर नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। सवाल सिर्फ एक नेता को पार्टी से बाहर किए जाने का नहीं है, बल्कि सवाल यह भी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिस नेता को कभी उक्रांद की आक्रामक आवाज माना जा रहा था, वही अब पार्टी नेतृत्व के निशाने पर आ गया? बताया जा रहा है कि नेगी को निष्कासित करने से पहले उन्हें पार्टी के दायित्व से मुक्त किया गया था। इसके बाद अब केंद्रीय अध्यक्ष की ओर से छह साल के निष्कासन की कार्रवाई ने उक्रांद के भीतर चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर कई नेता इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं।
आशुतोष नेगी लंबे समय से पहाड़ के मुद्दों को लेकर आंदोलन की राजनीति करते रहे हैं। करीब एक दशक से उनकी सक्रियता ने उन्हें उक्रांद के जमीनी चेहरों में स्थापित किया। ऐसे में अचानक पार्टी से बाहर किए जाने का फैसला स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह सिर्फ संगठनात्मक अनुशासन का मामला है या फिर इसके पीछे दल के भीतर चल रही किसी बड़ी राजनीतिक खींचतान की भूमिका है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी नेता की राजनीतिक सक्रियता और आक्रामकता पार्टी को मजबूत कर रही थी, तो वही सक्रियता आखिर कब और क्यों नेतृत्व के लिए असहज हो गई? उक्रांद की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी पहले ही अपने राजनीतिक अस्तित्व और जनाधार को मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे समय में संगठन के एक सक्रिय चेहरे को छह साल के लिए बाहर करने का फैसला पार्टी के भीतर एकता को कितना प्रभावित करेगा, यह आने वाला समय बताएगा। इस बीच युवा नेता अनूप पंवार का केंद्रीय अध्यक्ष को इस्तीफा भेजना इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना रहा है। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आशुतोष नेगी के निष्कासन को लेकर संगठन के भीतर असंतोष केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या अनूप पंवार का इस्तीफा एक शुरुआत है? क्या आने वाले दिनों में उक्रांद के भीतर और इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं?
अगर ऐसा होता है तो पार्टी के लिए यह सिर्फ संगठनात्मक संकट नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक संकट भी बन सकता है। क्योंकि पहाड़ की राजनीति में उक्रांद की पहचान ही संघर्ष, आंदोलन और सत्ता से सवाल करने वाली ताकत के रूप में रही है। ऐसे में यदि पार्टी का आंतरिक संघर्ष ही सार्वजनिक हो गया तो इसका असर उसके जमीनी विस्तार पर पड़ना स्वाभाविक है। आशुतोष नेगी के निष्कासन के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व असंतोष को किस तरह संभालता है। क्या बातचीत के रास्ते बंद होंगे या फिर संगठन के भीतर उठ रही आवाजों को सुना जाएगा? उक्रांद के सामने अब सिर्फ आशुतोष नेगी का सवाल नहीं है। असली परीक्षा यह है कि पार्टी अपने भीतर उठे इस राजनीतिक तूफान को संभाल पाती है या फिर यह तूफान इस्तीफों की ऐसी आंधी में बदल जाएगा, जो संगठन की नींव तक को हिला दे।
आशुतोष नेगी को निष्कासित पर अनुप का इस्तीफा
देहरादून(नगर संवाददाता)। उत्तराखंड क्रांति दल में आशुतोष नेगी को छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद दल में इस्तीफे दिए जाने का दौर शुरू हो गया है। यहां आज दल के युवा नेता अनूप पंवार ने केंद्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड क्रांति दल को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
उन्होंने केंद्रीय अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वह प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे है। पंवार ने कहा कि दल के लिए पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य किया। संगठन के विस्तार, आईटी प्रबंधन, प्रचार-प्रसार तथा जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का निरंतर प्रयास किया।
पंवार ने कहा कि अत्यंत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि संगठन में लंबे समय से समर्पित एवं संघर्षशील कार्यकर्ताओं की अपेक्षा उपेक्षा, निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव, संगठनात्मक अनुशासन की अनदेखी तथा योग्यता और योगदान के स्थान पर अन्य आधारों पर पदों एवं जिम्मेदारियों का वितरण जैसी परिस्थितियाँ लगातार निराशाजनक रही हैं।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर संगठन को मजबूत करने हेतु दिए गए सुझावों एवं रचनात्मक विचारों पर भी अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया। पंवार ने कहा कि इन परिस्थितियों में उन्हें यह महसूस हुआ कि वर्तमान व्यवस्था में दल के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप प्रभावी ढंग से कार्य करना संभव नहीं रह गया है।
उनका कहना है कि इन्हीं संगठनात्मक कारणों एवं अपने आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड क्रांति दल की प्राथमिक सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे रहे है और त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर दल की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त किया जाए।