राज्यसभा पहुंची हल्द्वानी के शुद्धिकरण की आग
हवन की आग में तपने लगी उत्तराखण्ड की सियासत
शुद्धिकरण पर सियासी संग्राम से मच गया ‘तूफान’
देहरादून/हल्द्वानी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे ने कहा कि उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में जिस मंच से मैने रैली को सम्बोधित किया उस मंच का बीजेपी के लोगों के साथ मिलकर कुछ लोगों ने गंगाजल से शुद्धिकरण किया, मैं दलित हंूं इसलिए, क्या यही लोकतंत्र है? कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जहां राज्यसभा और राज्यसभा के बाहर मीडिया के सामने इस घटना को लेकर अपनी खुली नाराजगी दिखाई वहीं कांग्रेस के कई बडे नेताओं ने भी इस घटना को लेकर अपना आक्रोश दिखाया है। हल्द्वानी के शुद्धिकरण की आग राज्यसभा तक पहुंची तो उससे देश की सियासत में एक बडा भूचाल मच गया। हवन की आग में अब कहीं न कहीं उत्तराखण्ड की सियासत भी तपने लगी है और हल्द्वानी के मंच का शुद्धिकरण अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बन रहा है जिससे कहीं न कहीं भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं में भी एक चिंता का दौर चल रहा होगा क्योंकि मामला बेहद संवेदनशील है और यह मामला आने वाले दिनों में उत्तराखण्ड भाजपा के लिए बडा सिरदर्द बन सकता है?
हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सभा स्थल पर कुछ लोगों द्वारा हवन और ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मामला अब उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में गर्मा गया है। सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है, वहीं खुद मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए इसे अपने अपमान और सामाजिक भेदभाव से जोड़ दिया। खरगे ने सदन में कहा कि हल्द्वानी में जो कुछ हुआ, वह देश के लिए उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर इस तरह का ‘शुद्धिकरण’ समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम करता है। खरगे ने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी किसी के सामने यह कहकर सहानुभूति नहीं मांगी कि वह दलित हैं और न ही अपनी रक्षा के लिए किसी के सामने गिड़गिड़ाए। उनके भीतर संघर्ष करने की ताकत है और वे हमेशा लड़ते आए हैं। लेकिन हल्द्वानी की घटना को लेकर खरगे का स्वर बेहद तल्ख दिखाई दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस मंच पर उन्होंने सभा को संबोधित किया, उसके बाद वहां कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ ने उन्हें अस्पृश्यता का अहसास कराया और उनका अपमान किया। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी तक की मांग कर डाली।
राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संसद के उच्च सदन में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। अब सवाल केवल एक हवन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस इसे सामाजिक सम्मान और दलित अस्मिता से जोड़कर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं पूरे विवाद में यह भी महत्वपूर्ण है कि हवन करने वाले लोगों की पहचान, उनका भाजपा से आधिकारिक संबंध और हवन आयोजित करने का घोषित उद्देश्य क्या था। इन तथ्यों पर संबंधित पक्ष का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है। क्योंकि यदि आयोजकों का दावा राजनीतिक या किसी अन्य उद्देश्य का है, तो उसे भी तथ्य के रूप में सामने रखा जाना चाहिए?
फिलहाल इतना तय है कि हल्द्वानी के मैदान में जली हवन की अग्नि की सियासी तपिश अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। खरगे ने जिस तरह राज्यसभा में इसे अपने सम्मान और अस्पृश्यता से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है, उससे यह प्रकरण उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच आने वाले दिनों में एक बड़े राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस के कुछ राष्ट्रीय नेताओं और उत्तराखण्ड कांग्रेस के कुछ नेता इस मामले को लेकर भाजपा को अपनी रडार पर ले रहे हैं। उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा का कहना है कि शुद्धिकरण का होना चाहिए कि ऐसी विचारधारा, ऐसी सोच इन लोगों की है।