मासूमों की पढ़ाई पर इंतजार का पहरा

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आरटीई की दूसरी लाटरी न खुलने से अभिभावक परेशान
मंत्री धन सिंह ने गरीबों से क्यों मुंह मोड़ लिया
विकासनगर(संवाददाता)। जन संघर्ष मोर्चा हर किसी की आवाज बनता जा रहा है जो सिस्टम में अपने आपको असहाय महसूस कर रहा है कि उसकी सुनने वाला शायद कोई नहीं है। सामाजिक कार्य करने और आवाम की आवाज बन चुके जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने आवाम को यह संदेश दे दिया है कि जरूरी नहीं है कि राजनीति में आने के बाद ही कोई जनहित के कार्य करने के लिए आगे आये बल्कि एक आम इंसान बनकर भी वह हर उस व्यक्ति की मद्द कर सकता है जो सिस्टम के अन्दर अपने आपको अलग-थलग महसूस करता आ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा मुखर रहने वाले मोर्चा अध्यक्ष ने एक बार फिर शिक्षा मंत्री को कटघरे में खडा किया है और कहा है कि बच्चे आखिर कहां जायें क्योंकि शिक्षा मंत्री ने गरीबों से अपना मुंह मोड़ लिया है। हैरानी वाली बात है कि स्कूलों में घंटी बज रही है लेकिन गरीब बच्चों को अभी भी दाखिले का इंतजार है और उनके परिजनों में एक ही दर्द है कि आखिरकार आरटीई की दूसरी लाटरी कब खुलेगी। गजब बात तो यह है कि अगस्त चल रहा है लेकिन आरटीई की दूसरी लाटरी के इंतजार में बचपन स्कूलों की तरफ टकटकी लगाये देख रहा है कि कब उसका स्कूल जाने का सपना पूरा होगा? मासूमों की पढ़ाई पर इंतजार का पहरा शिक्षा मंत्री को कटघरे में खडा कर रहा है।
स्कूल खुल चुके हैं… कक्षाओं में पढ़ाई चल रही है… बच्चे किताब-कॉपी लेकर रोज स्कूल जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश के कई गरीब परिवारों की निगाहें आज भी आरटीई की दूसरी लॉटरी पर टिकी हैं। उनके बच्चों के हाथों में भी स्कूल बैग हो, वे भी दूसरे बच्चों के साथ कक्षा में बैठकर पढ़ें इसी उम्मीद में अभिभावक इंतजार कर रहे हैं। अप्रैल में पहली लॉटरी निकल गई, जुलाई भी गुजर गया और अब अगस्त का पहला सप्ताह भी बीत चुका है, लेकिन दूसरी लॉटरी को लेकर तस्वीर साफ नहीं होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को कठघरे में खड़ा किया है। नेगी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल कागज पर लिखा कानून नहीं, बल्कि उस गरीब परिवार की उम्मीद है जो महंगे निजी विद्यालय की फीस नहीं चुका सकता, लेकिन अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने का सपना जरूर देखता है। नेगी के मुताबिक दूसरी लॉटरी सामान्यतः जुलाई में हो जाती थी। इस बार अगस्त का पहला सप्ताह गुजरने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इन बच्चों की गलती क्या है? गरीबी क्या किसी बच्चे की शिक्षा के रास्ते में दीवार बन जानी चाहिए?
उन्होंने कहा कि हर गुजरते दिन के साथ बच्चों की पढ़ाई पीछे छूट रही है। जिन कक्षाओं में उन्हें अपने साथियों के साथ बैठना था, वहां पढ़ाई लगातार आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ उनके माता-पिता प्रवेश की उम्मीद लगाए बैठे हैं। नेगी ने शिक्षा मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि केंद्र अथवा किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के स्तर पर कोई अड़चन है तो उसे दूर कराने की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की है। इसकी कीमत गरीब बच्चे अपने शैक्षणिक सत्र से क्यों चुकाएं? मोर्चा ने शिक्षा मंत्री से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा है कि आरटीई की दूसरी लॉटरी कब निकलेगी, देरी का कारण क्या है और जिन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? नेगी ने कहा कि प्रदेश के गरीब अभिभावक सरकार से कोई विशेष कृपा नहीं मांग रहे, वे अपने बच्चों के लिए कानून से मिला शिक्षा का अधिकार मांग रहे हैं। सरकार को उनकी प्रतीक्षा और बच्चों के भविष्य की गंभीरता समझते हुए तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मोर्चा ने इस मामले को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने की बात कही है। पत्रकार वार्ता में दिलबाग सिंह और ब्लॉक मीडिया प्रभारी अतुल हांडा भी मौजूद रहे।

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