टोंस नदी का रौद्र रूप बहा ले गया एप्रोच रोड

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उफनाई नदी का गुस्सा एप्रोच रोड पर उतरा
आखिर चंद दिनों में कैसे धस गई रोड़़
तो क्या निर्माण करने वाले इंजीनियरों पर गिरेगी गाज
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चलती रहती है कि पुल बनते ही टूटने के लिए हैं? हाल ही में फिर से बने देहरादून का प्रेमनगर वाले महत्वपूर्ण पुल की एप्रोच रोड़ टूटने से सिस्टम के पैरों तले जमीन खिसक गई और वहां जिस तरह से प्रशासन के अफसरों और विपक्षी नेताओं ने डेरा डालकर टूटी एप्रोच रोड का हाल देखा तो सिस्टम को कटघरे में खडा किया जा रहा है कि आखिर सोलह करोड की लागत से बनाये गये पुल की चंद दिनों में ही एप्रोच रोड आखिर कैसे जरा सी बारिश में धस गई। सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद हो रही है कि पुल का निर्माण करने वाले इंजीनियरों पर सरकार कब गाज गिरायेगी क्योंकि एप्रोच रोड कैसे बनती है और कैसे नहीं अगर इसका पता इंजीनियरों को नहीं है तो फिर उनके खिलाफ सख्त एक्शन तो होना ही चाहिए। एप्रोच रोड टूटने से विकासनगर व हिमाचल जाने के लिए जनता को एक बार फिर वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पडेेगा। एप्रोच रोड टूटने से पुल निर्माण कार्य की कलई एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड आज अचानक धंस गई जिससे दून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। पुल की एप्रोच रोड धंसते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों यात्रियों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर आवाजाही रोक दी गई। यह घटना केवल यातायात बाधित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पुल निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुल पर रोजाना भारी वाहनों सहित हजारों लोग आवाजाही करते हैं, उसका इस तरह धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुल की एप्रोच रोड टूटते समय उस समय भारी वाहन गुजर रहे होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने और यदि निर्माण में लापरवाही या मानकों से समझौता पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक मार्गों से यातायात सुचारु कराने का प्रयास कर रहा है। पुल की एप्रोच रोड़ धंसने से पुल का निर्माण करने वाले इंजीनियरों की कार्यशैली पर भी एक बडा सवाल आकर खडा हो गया है? वहीं सवाल खडे हो रहे हैं कि धामी सरकार इस लापरवाही के लिए क्या फैसला करती है इसका तो अभी इंतजार सबको रहेगा लेकिन बीते कुछ साल में थानो रोड के तीनों पुल जिनकी लागत लगभग 55 करोड रूपये थी और रानीपोखरी के पुल का टूटना भी शायद सबको याद है इसलिए सरकार को भी सख्त एक्शन लेना होगा कि आखिरकार जो पुल आवाम के लिए चंद समय पूर्व ही खुला था भले वह पुल न टूटा हो लेकिन उसकी एप्रोच रोड़ कैसे जरा सी बारिश में ही धस गई यह एक बडा सवाल जरूर खडा हो गया है।

फील्ड में डटे रहे डीएम
डीएम ने प्रातःकाल नंदा चौकी पुल के क्षतिग्रस्त एप्रोच वॉल का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को तीन घंटों के अन्दर रिस्टोर करने के निर्देश दिये। इसके उपरांत डीएम शहर से निरीक्षण करते हुए सोडा सरोली पहुंचे जहां पीएमजीएसवाई की वर्षा से क्षतिग्रस्त सडक को तत्काल खोलने के निर्देश दिये। वहीं मलवा आने से बंद थानों मार्ग को यातायात हेतु बहाल कर दिया गया है। डीएम फील्ड में बने हुये हैं तथा वर्षा से क्षति का निरीक्षण कर रहे हैं।

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