विकास पिच पर दमदार शॉट लगाते धामी

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विजन की सटीक रणनीति, विकास की तेज रफ्तार
सियासत में आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे सीएम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। भाजपा हाईकमान ने जब पांच साल पहले युवा राजनेता को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी थी तो किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि युवा मुख्यमंत्री राज्य के अन्दर विकास के पथ पर शानदार सियासत करेंगे। मुख्यमंत्री का एक ही विजन रहा कि राज्य डेवलपमेंट मॉडल बने और हर कदम पर विकास की बयार बहे। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक भाजपा की बडी लीडरशिप को दिखाया कि वह विकास की पिच पर एक के बाद एक दमदार शॉट लगाकर राज्य को एक नई उडान पर ले जा रहे हैं। उत्तराखण्ड के विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री ने जिस विजन से सियासत की उसे देखकर राज्य की जनता उनकी कायल है क्योंकि नई सोच, तेज फैसले और विकास की रफ्तार ही मुख्यमंत्री का संकल्प है और उसी संकल्प को धरातल पर उतारते हुए वह नया उत्तराखण्ड बना रहे हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कार्यशैली को तेज फैसलों, समयबद्ध क्रियान्वयन और विकास केंद्रित सोच के साथ जोड़ने का प्रयास किया है। सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि प्रदेश का भविष्य केवल नई घोषणाओं से नहीं, बल्कि उन योजनाओं को जमीन पर उतारने की क्षमता से तय होगा। यही कारण है कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, निवेश, पेयजल, चारधाम यात्रा, खेल और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की बात सरकार लगातार करती रही है। बीते वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए कई पहलें की हैं। विभिन्न योजनाओं को वित्तीय स्वीकृतियां देने के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा भी सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बताई जाती है। सरकार का दावा है कि विकास का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे, इसी सोच के साथ योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक निर्णयों की गति बढ़ाने और विकास को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने का प्रयास किया है। सरकार की रणनीति यह रही है कि पर्यटन, उद्योग, धार्मिक आस्था, कनेक्टिविटी और रोजगार जैसे क्षेत्रों में एक साथ काम कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी जाए। साथ ही निवेश और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भविष्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। हालांकि किसी भी सरकार की सफलता का अंतिम पैमाना जनता तक पहुंचने वाले परिणाम ही होते हैं। विकास की योजनाएं तब सार्थक मानी जाएंगी जब उनका लाभ गांवों, सीमांत क्षेत्रों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों तक समान रूप से पहुंचे। आने वाले वर्षों में यही सबसे बड़ी परीक्षा भी होगी। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाने का प्रयास किया है। यदि घोषित योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समयसीमा में होता है और उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देता है, तो उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई दिशा और नई गति मिल सकती है। यही वह चुनौती भी है और अवसर भी, जिस पर आने वाले समय में प्रदेश की जनता अपनी राय तय करेगी।

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