धामी मॉडल ने बदली विकास की तस्वीर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की कमान जब देश के प्रधानमंत्री ने युवा विधायक को सौंपी थी तब उन्हें एक ही टास्क दिया था कि वह विकास की दौड़़ पर इतनी तेजी से आगे बढे़ कि जो राज्य बाइस सालों से पैसिंजर ट्रेन की तरह विकास के रास्ते पर चल रही थी वह बुलट ट्रेन की तरह विकास के पथ पर आगे बढ़ती जाये। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को विकसित भारत की राह पर जिस तेजी के साथ आगे दौड़ाया है उसको देखकर आज राज्य नहीं बल्कि देशभर में धामी मॉडल के विकास की तस्वीर देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा कि अगर किसी राजनेता में विकास करने का जुनून हो तो फिर उस राज्य की तस्वीर बदलना कोई कठिन काम नहीं।
उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय तक नेतृत्व परिवर्तन, अधूरी परियोजनाओं और सुस्त प्रशासनिक व्यवस्था की चर्चाओं में घिरी रही। ऐसे दौर के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लगातार पांच वर्ष पूरे होना राज्य की राजनीति में एक उल्लेखनीय पड़ाव माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे राज्य की नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक कार्यशैली में उतारने का प्रयास किया गया। सरकार के अनुसार, सरलीकरण, समाधान, निस्तारण केवल एक प्रशासनिक नारा नहीं, बल्कि शासन का कार्यमंत्र बना। उद्देश्य यह रहा कि सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाएं सरल हों, जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो और विकास परियोजनाएं वर्षों तक फाइलों में अटकी न रहें। इसी सोच के तहत विभागों की जवाबदेही बढ़ाने, तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने और योजनाओं की नियमित समीक्षा पर बल दिया गया।
धामी सरकार अपने कार्यकाल में निवेश आकर्षित करने, सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार, चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को मजबूत करने, पर्यटन को नई गति देने, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने जैसे प्रयासों को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने रखती है। सरकार का कहना है कि इन पहलों ने राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा देने का काम किया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास केवल बजट का विषय नहीं होता, बल्कि इच्छाशक्ति, निर्णय क्षमता और प्रभावी क्रियान्वयन की भी परीक्षा होती है। सरकार का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में निर्णय लेने की गति बढ़ी, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत हुई और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दी गई।
हालांकि, किसी भी सरकार की उपलब्धियों का अंतिम मूल्यांकन जनता करती है। विकास, रोजगार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का वास्तविक प्रभाव ही यह तय करेगा कि सरकार के दावे किस हद तक आम लोगों के जीवन में बदलाव ला सके। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड के विकास को लेकर सरकार ने एक स्पष्ट दिशा और कार्यशैली प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। जब देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब उत्तराखंड भी अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा कर रहा है। आने वाले वर्षों में यही देखा जाएगा कि विकास की यह गति कितनी स्थायी, समावेशी और जनकेंद्रित साबित होती है।